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करोड़ों रुपये के चिट फंड घोटोले में पश्चिम बंगाल की कंपनी पर केस दर्ज
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करोड़ों रुपये के चिट फंड घोटाले में पश्चिम बंगाल की कंपनी पर मुकदमा दर्ज
गाजियाबाद। कोलकाता की एक चिट फंड कंपनी ने आठ साल पहले गाजियाबाद में शाखा खोलकर लोगों को रियल एस्टेट में निवेश कराने के नाम पर दोगुना मुनाफा देने का झांसा देकर सैकड़ों लोगों से करोड़ों रुपये निवेश करा लिए। कुछ समय बाद कार्यालय बंद कर फरार हो गए और रुपये लौटाने के लिए लोगों को अब तक गुमराह कर रहे हैं। इस मामले में कोर्ट के आदेश पर कंपनी निदेशक व अन्य कर्मचारियों के खिलाफ गाजियाबाद में कोर्ट के आदेश पर धोखाधड़ी का केस दर्ज हुआ है।
कोर्ट के आदेश पर थाना कविनगर पुलिस ने पश्चिम बंगाल के बर्दवान में गजाधर माधोपुर कालोनी निवासी कंपनी के निदेशक मनोज कुमार चंद्र, उसके भाई मनीष कुमार, वंदना चंद्र, नंद कुमार सिंह व हरगोविंद के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। लेखराज ने बताया कि कंपनी के अधिकारियों ने लोगों को निवेश करने पर दो गुना मुनाफा और लोगों को जोड़ने पर कमीशन देने के नाम पर सैकड़ों लोगों जोड़ लिया और उनसे करोड़ों रुपये निवेश करा लिए। इस मामले में अन्य शहरों में इस कंपनी के द्वारा धोखाधड़ी करने के मामले की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने पुलिस से इस मामले की शिकायत की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। ऐसे में उन्होंने कोर्ट में न्याय की गुहार लगाई।
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कंपनी ने रियल एस्टेट में निवेश करने का दिया झांसा
विजयनगर निवासी लेखराज ने बताया कि वह 10 साल पहले अपने एक परिचित के माध्यम से विश्वामित्र सोशल एंड एजुकेशन ट्रस्ट एवं विश्वामित्र इंडिया परिवार चिट फंड कंपनी की गोविंदपुरम शाखा में गए थे। शाखा के डिविजनल हेड मनोज कुमार ने बताया कि कंपनी रियल एस्टेट में निवेश करती है। निवेश करने पर कंपनी दो गुना रिटर्न और अन्य लोगों से निवेश कराने पर 5 से 10 प्रतिशत का कमीशन देती है। ऐसे में उन्होंने अपने और पत्नी के नाम से अलग-अलग स्कीम में 3.60 लाख रुपये निवेश कर दिए। कुछ समय बाद उन्हें रिटर्न के रूप में कमीशन मिला। इसके बाद उन्होंने पर अपने कुछ साथियों को स्कीम के बारे में जानकारी देकर कई लोगो के करीब 10 करोड़ रुपये निवेश करा दिए। लेकिन कुछ समय बाद कंपनी ने अपना कार्यालय और गोविंदपुरम की शाखा को बंद कर दिया। इसके बाद कंपनी के कर्मचारियों से काफी संपर्क किया, तो कुछ समय में रुपये लौटाना का झांसा देकर गुमराह करते रहे। बाद में रुपये लौटाने से इनकार कर दिया।
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लोगों को जोड़ने पर 5 से 10 प्रतिशत का कमीशन बनाया था एजेंट
पीड़ित लेखराज ने बताया कि कंपनी के डिवीजनल हेड ने एजेंट बनाने और लोगों को कंपनी में निवेश कराने के एवज में 5 से 10 प्रतिशत का कमीशन देने की बात कही। ऐसे में सैकड़ों लोग एक दूसरे से संपर्क में आकर कंपनी से जुड़ गए और धोखाधड़ी का शिकार हो गए।
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400 से अधिक लोगों ने किया निवेश
चिट फंड कंपनी में सैंकड़ों लोगों ने निवेश किया था। इसमें पीड़ित लेखराज ने बताया कि उन्होंने अपने, पत्नी और कुछ साथियों के 22 लाख रुपये अलग-अलग स्कीम में निवेश कराए थे। वहीं दीपक कुमार ने अपने, पत्नी और कुछ साथियों के 12 लाख रुपये, सुखबीर सिंह ने साढ़े आठ लाख रुपये, मुकेश कुमार ने 64 लाख रुपये, वीर सिंह चौहान ने 73 लाख रुपये, राजीव त्यागी ने 90 लाख रुपये, मनोज कुमार ने 24 लाख रुपये, सुंदरलाल गौतम ने 5 लाख रुपये, प्रदीप कुमार ने 80 लाख रुपये, कमल कुमार ने डेढ़ लाख रुपये समेत अन्य सैकड़ों लोगों ने एक दूसरे के संपर्क में आकर करोड़ों रुपये कंपनी में निवेश किए।
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एजेंट बनकर निवेश कराने वाले को मिल रही धमकी
जानकारी के अनुसार जिन लोगों ने कंपनी में एजेंट बनकर रुपये निवेश कराए थे, वे लोग परेशान हो रहे हैं। उनका कहना कि एक तरह तो लाखों रुपये कंपनी में निवेश करके नुकसान उठाना पड़ रहा है। वहीं दूसरी ओर उन्होंने अन्य जिन लोगों के रुपये निवेश कराए थे वे लोग रुपये वापस नहीं मिलने पर जान से मारने की धमकी दे रहे हैं।
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गाजियाबाद। कोलकाता की एक चिट फंड कंपनी ने आठ साल पहले गाजियाबाद में शाखा खोलकर लोगों को रियल एस्टेट में निवेश कराने के नाम पर दोगुना मुनाफा देने का झांसा देकर सैकड़ों लोगों से करोड़ों रुपये निवेश करा लिए। कुछ समय बाद कार्यालय बंद कर फरार हो गए और रुपये लौटाने के लिए लोगों को अब तक गुमराह कर रहे हैं। इस मामले में कोर्ट के आदेश पर कंपनी निदेशक व अन्य कर्मचारियों के खिलाफ गाजियाबाद में कोर्ट के आदेश पर धोखाधड़ी का केस दर्ज हुआ है।
कोर्ट के आदेश पर थाना कविनगर पुलिस ने पश्चिम बंगाल के बर्दवान में गजाधर माधोपुर कालोनी निवासी कंपनी के निदेशक मनोज कुमार चंद्र, उसके भाई मनीष कुमार, वंदना चंद्र, नंद कुमार सिंह व हरगोविंद के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। लेखराज ने बताया कि कंपनी के अधिकारियों ने लोगों को निवेश करने पर दो गुना मुनाफा और लोगों को जोड़ने पर कमीशन देने के नाम पर सैकड़ों लोगों जोड़ लिया और उनसे करोड़ों रुपये निवेश करा लिए। इस मामले में अन्य शहरों में इस कंपनी के द्वारा धोखाधड़ी करने के मामले की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने पुलिस से इस मामले की शिकायत की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। ऐसे में उन्होंने कोर्ट में न्याय की गुहार लगाई।
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कंपनी ने रियल एस्टेट में निवेश करने का दिया झांसा
विजयनगर निवासी लेखराज ने बताया कि वह 10 साल पहले अपने एक परिचित के माध्यम से विश्वामित्र सोशल एंड एजुकेशन ट्रस्ट एवं विश्वामित्र इंडिया परिवार चिट फंड कंपनी की गोविंदपुरम शाखा में गए थे। शाखा के डिविजनल हेड मनोज कुमार ने बताया कि कंपनी रियल एस्टेट में निवेश करती है। निवेश करने पर कंपनी दो गुना रिटर्न और अन्य लोगों से निवेश कराने पर 5 से 10 प्रतिशत का कमीशन देती है। ऐसे में उन्होंने अपने और पत्नी के नाम से अलग-अलग स्कीम में 3.60 लाख रुपये निवेश कर दिए। कुछ समय बाद उन्हें रिटर्न के रूप में कमीशन मिला। इसके बाद उन्होंने पर अपने कुछ साथियों को स्कीम के बारे में जानकारी देकर कई लोगो के करीब 10 करोड़ रुपये निवेश करा दिए। लेकिन कुछ समय बाद कंपनी ने अपना कार्यालय और गोविंदपुरम की शाखा को बंद कर दिया। इसके बाद कंपनी के कर्मचारियों से काफी संपर्क किया, तो कुछ समय में रुपये लौटाना का झांसा देकर गुमराह करते रहे। बाद में रुपये लौटाने से इनकार कर दिया।
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लोगों को जोड़ने पर 5 से 10 प्रतिशत का कमीशन बनाया था एजेंट
पीड़ित लेखराज ने बताया कि कंपनी के डिवीजनल हेड ने एजेंट बनाने और लोगों को कंपनी में निवेश कराने के एवज में 5 से 10 प्रतिशत का कमीशन देने की बात कही। ऐसे में सैकड़ों लोग एक दूसरे से संपर्क में आकर कंपनी से जुड़ गए और धोखाधड़ी का शिकार हो गए।
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400 से अधिक लोगों ने किया निवेश
चिट फंड कंपनी में सैंकड़ों लोगों ने निवेश किया था। इसमें पीड़ित लेखराज ने बताया कि उन्होंने अपने, पत्नी और कुछ साथियों के 22 लाख रुपये अलग-अलग स्कीम में निवेश कराए थे। वहीं दीपक कुमार ने अपने, पत्नी और कुछ साथियों के 12 लाख रुपये, सुखबीर सिंह ने साढ़े आठ लाख रुपये, मुकेश कुमार ने 64 लाख रुपये, वीर सिंह चौहान ने 73 लाख रुपये, राजीव त्यागी ने 90 लाख रुपये, मनोज कुमार ने 24 लाख रुपये, सुंदरलाल गौतम ने 5 लाख रुपये, प्रदीप कुमार ने 80 लाख रुपये, कमल कुमार ने डेढ़ लाख रुपये समेत अन्य सैकड़ों लोगों ने एक दूसरे के संपर्क में आकर करोड़ों रुपये कंपनी में निवेश किए।
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एजेंट बनकर निवेश कराने वाले को मिल रही धमकी
जानकारी के अनुसार जिन लोगों ने कंपनी में एजेंट बनकर रुपये निवेश कराए थे, वे लोग परेशान हो रहे हैं। उनका कहना कि एक तरह तो लाखों रुपये कंपनी में निवेश करके नुकसान उठाना पड़ रहा है। वहीं दूसरी ओर उन्होंने अन्य जिन लोगों के रुपये निवेश कराए थे वे लोग रुपये वापस नहीं मिलने पर जान से मारने की धमकी दे रहे हैं।