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रीढ़ की हड्डी का लचीलापन अच्छे स्वास्थ्य की निशानी- योगाचार्य डॉ वरुण वीर
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गाजियाबाद। केन्द्रीय आर्य युवक परिषद ने 'प्राणायाम -योग और वैदिक विद्धवान, वैज्ञानिक स्वामी सत्यप्रकाश सरस्वती की 115वीं जयंती" पर ऑनलाइन गोष्ठी का आयोजन किया। इस मौके पर योगाचार्य डॉ वरुण वीर ने कहा कि योग व प्राणायाम को दैनिक जीवन का अंग बनाने से शारीरिक व मानसिक क्षमता बढ़ जाती है और शरीर रोगों से मुकाबला कर सकता है। उन्होंने कहा कि यदि रोगप्रतिरोधक क्षमता का विकास करना है तो रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाने वाले आसनो का नियमित अभ्यास करना आवश्यक है। रीढ की हड्डी का लचीलापन अच्छे स्वास्थ्य की निशानी होती है। हमारे ऋषि मुनि पुरातन काल में योग प्राणायाम से ही दीर्घ आयु व अच्छा स्वास्थ्य बनाये रखते थे। केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने डॉ. सत्यप्रकाश (स्वामी सत्यप्रकाश सरस्वती) के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि चारों वेदों का अंग्रेजी में अनुवाद और मानक हिन्दी अंग्रेजी कोश का सम्पादन उनके द्वारा किये गये उल्लेखनीय कार्य हैं। संन्यास के बाद का लेखन वैदिक साहित्य आर्य समाज और स्वामी दयानन्द विषयक रहा। मुख्य अतिथि राष्ट्र निर्माण पार्टी के अध्यक्ष ठा. विक्रम सिंह और गोष्ठी अध्यक्ष आर्य केन्द्रीय सभा फरीदाबाद के प्रधान डॉ गजराज सिंह आर्य रहे। इस मौके पर प्रान्तीय महामंत्री प्रवीण आर्य, योगाचार्य सौरभ गुप्ता, गायिका वीना वोहरा, नरेन्द्र आर्य, ,उर्मिला आर्या, आचार्य महेन्द्र भाई, राजश्री यादव, यशोवीर आर्य, सुरेन्द्र शास्त्री, रविन्द्र गुप्ता, देवेन्द्र गुप्ता, मृदुला अग्रवाल, सुलोचना देवी आदि मौजूद रहीं।