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पहली रोडवेज महिला बस चालक फिर से ट्रक चलाने को मजबूर
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पहली रोडवेज महिला बस चालक फिर से ट्रक चलाने को मजबूर
कौशांबी। जिले में पहली महिला रोडवेज बस चालक के तौर पर प्रशिक्षण ले रहीं प्रियंका कुमारी फिर से ट्रक चलाने को मजबूर हैं। तीन महीने से चल रहे प्रशिक्षण में उन्हें बस 4600 रुपये ही रोडवेज से मिले हैं। इससे घर खर्च चलाना भी मुश्किल हो रहा है। दो साल पहले पति की मौत के बाद प्रियंका कुमारी फुटपाथ पर काम करने लगीं थी। इसमें कमाई इतनी नहीं हो पाती थी कि दो बच्चों की परवरिश कर सके। तब ड्राइविंग सीख ली। रोडवेज में चालक बनने का मौका मिला तो सरकारी नौकरी से जिंदगी को संवारने की चाहत में प्रशिक्षण लेना शुरू कर दिया।
परिवहन निगम से प्रशिक्षण के दौरान उन्हें केवल छह हजार रुपये ही मासिक वेतन पर रखा गया है। प्रियंका ने बताया कि उन्होंने सितंबर माह में कौशांबी डिपो से प्रशिक्षण लेना शुरू किया था। उन्हें पिछले तीन माह में केवल 4600 रुपये ही मिले हैं। कौशांबी से पहले उनका प्रशिक्षण कानपुर में हुआ था। पिछले एक साल से उनका प्रशिक्षण चल रहा है। वह रोजाना सुबह डिपो पर आती हैं और प्रशिक्षण लेकर अपने घर जाती हैं।
रात में चला रही ट्रक दिन में प्रशिक्षण
प्रियंका ने बताया कि अब वह दिन में प्रशिक्षण लेने के बाद रात में ट्रक चलाती हैं। ताकि अपना घर चला सके। रोडवेज परिवहन निगम में आने से वह हर माह 20 हजार रुपए कमाती थीं, लेकिन अब प्रशिक्षण की वजह से वह महीने में पांच से छह दिन ही ट्रक चलाकर कुछ पैसे कमा रही हैं। प्रियंका के पति राजीव का 2020 निधन हो चुका है, उनके दो बेटे हैं। पति के इलाज कराने में उनका घर भी बिक चुका है। ऐसे में प्रियंका कुमारी अपने माता-पिता के साथ दिल्ली के शालीमार बाग में किराए के घर में रहती हैं।
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14 महीने तक मिलेंगे छह हजार
कौशांबी एआरएम शिव बालक ने बताया कि शासन की ओर से 14 महीने तक छह हजार रुपए का वेतन दिया जाएगा। प्रियंका बेहद मेहनती हैं। जनवरी तक उनका प्रशिक्षण जारी रहेगा। इसके बाद शासन से जो भी आदेश आएंगे उसके हिसाब से ही वेतना बढ़ाया जाएगा। उनका वेतन माह की 26-27 ता रिख के बीच आता है।
डेढ़ वर्ष बाद चला सकेंगी बस
- सात महीने तक डिपो की वर्कशाप में प्रशिक्षण लेंगी
- 10 माह तक बसों में सहचालक के रूप में रहेंगी
- इसके बाद महिला चालकों को स्वतंत्र रूप से बस चलाने को दी जाएगी
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कौशांबी। जिले में पहली महिला रोडवेज बस चालक के तौर पर प्रशिक्षण ले रहीं प्रियंका कुमारी फिर से ट्रक चलाने को मजबूर हैं। तीन महीने से चल रहे प्रशिक्षण में उन्हें बस 4600 रुपये ही रोडवेज से मिले हैं। इससे घर खर्च चलाना भी मुश्किल हो रहा है। दो साल पहले पति की मौत के बाद प्रियंका कुमारी फुटपाथ पर काम करने लगीं थी। इसमें कमाई इतनी नहीं हो पाती थी कि दो बच्चों की परवरिश कर सके। तब ड्राइविंग सीख ली। रोडवेज में चालक बनने का मौका मिला तो सरकारी नौकरी से जिंदगी को संवारने की चाहत में प्रशिक्षण लेना शुरू कर दिया।
परिवहन निगम से प्रशिक्षण के दौरान उन्हें केवल छह हजार रुपये ही मासिक वेतन पर रखा गया है। प्रियंका ने बताया कि उन्होंने सितंबर माह में कौशांबी डिपो से प्रशिक्षण लेना शुरू किया था। उन्हें पिछले तीन माह में केवल 4600 रुपये ही मिले हैं। कौशांबी से पहले उनका प्रशिक्षण कानपुर में हुआ था। पिछले एक साल से उनका प्रशिक्षण चल रहा है। वह रोजाना सुबह डिपो पर आती हैं और प्रशिक्षण लेकर अपने घर जाती हैं।
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रात में चला रही ट्रक दिन में प्रशिक्षण
प्रियंका ने बताया कि अब वह दिन में प्रशिक्षण लेने के बाद रात में ट्रक चलाती हैं। ताकि अपना घर चला सके। रोडवेज परिवहन निगम में आने से वह हर माह 20 हजार रुपए कमाती थीं, लेकिन अब प्रशिक्षण की वजह से वह महीने में पांच से छह दिन ही ट्रक चलाकर कुछ पैसे कमा रही हैं। प्रियंका के पति राजीव का 2020 निधन हो चुका है, उनके दो बेटे हैं। पति के इलाज कराने में उनका घर भी बिक चुका है। ऐसे में प्रियंका कुमारी अपने माता-पिता के साथ दिल्ली के शालीमार बाग में किराए के घर में रहती हैं।
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14 महीने तक मिलेंगे छह हजार
कौशांबी एआरएम शिव बालक ने बताया कि शासन की ओर से 14 महीने तक छह हजार रुपए का वेतन दिया जाएगा। प्रियंका बेहद मेहनती हैं। जनवरी तक उनका प्रशिक्षण जारी रहेगा। इसके बाद शासन से जो भी आदेश आएंगे उसके हिसाब से ही वेतना बढ़ाया जाएगा। उनका वेतन माह की 26-27 ता रिख के बीच आता है।
डेढ़ वर्ष बाद चला सकेंगी बस
- सात महीने तक डिपो की वर्कशाप में प्रशिक्षण लेंगी
- 10 माह तक बसों में सहचालक के रूप में रहेंगी
- इसके बाद महिला चालकों को स्वतंत्र रूप से बस चलाने को दी जाएगी