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दस धार्मिक स्थल के शिफ्टिंग का काम शुरू, सात पर नहीं बनी सहमति
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दस धार्मिक स्थल के शिफ्टिंग का काम शुरू, सात पर नहीं बनी सहमति
लोनी। दिल्ली-देहरादून छह लेन एलिवेटेड इकोनॉमिक कारिडोर का काम तेजी से चल रहा है। खजूरी पुस्ता मार्ग से बागपत सीमा तक एलिवेटेड रोड के निर्माण के बीच 17 धार्मिक स्थल आ रहे हैं। धर्मगुरुओं से एनएचएआई (नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया)अधिकारियों की बातचीत के बाद शिफ्टिंग का काम शुरू हो गया है। वहीं सात धार्मिक स्थलों को हटाने की सहमति अभी तक नहीं बन सकी है।
एनएचएआई प्रोजेक्ट मैनेजर अरविंद कुमार का कहना है कि कॉरिडोर के प्रथम चरण का निर्माण दिल्ली खजूरी सीमा से बागपत सीमा तक किया जाना है। करीब 10 धार्मिक स्थलों के धर्मगुरुओं से वार्ता कर सहमति बनने के बाद उन्हें हटाने का काम शुरू कर दिया गया है।
300 पिलर का निर्माण किया जाना है
कॉरिडोर के पहले चरण में दिल्ली खजूरी सीमा से ईस्टर्न पेरिफेरल वे एक्सप्रेसवे तक करीब तीन सौ पिलर का निर्माण किया जाना है। निर्माण कार्य के दौरान हुई देरी के चलते आठ पिलर का निर्माण कार्य अधर में पड़ा था। अब तेजी से काम शुरू हो गया है।
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2023 अंत तक काम पूरा करने की तैयारी
अधिकारियों के अनुसार, इस कॉरिडोर के निर्माण से दिल्ली और देहरादून के बीच की दूरी महज ढाई घंटे में तय की जा सकेगी। कॉरिडोर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोनी, बागपत, शामली और सहारनपुर से होकर गुजरेगा। 2023 दिसंबर तक निर्माण कार्य पूरा किया जाना है।
2,918 करोड़ की आएगी लागत
दिल्ली अक्षरधाम से देहरादून तक प्रस्तावित छह लेन एलिवेटेड इकोनामिक कारिडोर का पहला चरण दिल्ली स्थित अक्षरधाम से लेकर ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे टोल तक करीब 32 किमी का होगा। जिसका अनुमानित खर्च करीब 2,918 करोड़ रुपये है। निर्माण कार्य दो भागों में किया जाएगा। पहले भाग में अक्षरधाम से दिल्ली की सीमा तक 15 किमी मार्ग का निर्माण और दूसरे भाग में दिल्ली सीमा से ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे टोल तक 17 किमी निर्माण कार्य किया जाएगा। दोनों भाग में करीब 50 प्रतिशत तक एलिवेटेड रोड का निर्माण किया जाना है।
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लोनी। दिल्ली-देहरादून छह लेन एलिवेटेड इकोनॉमिक कारिडोर का काम तेजी से चल रहा है। खजूरी पुस्ता मार्ग से बागपत सीमा तक एलिवेटेड रोड के निर्माण के बीच 17 धार्मिक स्थल आ रहे हैं। धर्मगुरुओं से एनएचएआई (नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया)अधिकारियों की बातचीत के बाद शिफ्टिंग का काम शुरू हो गया है। वहीं सात धार्मिक स्थलों को हटाने की सहमति अभी तक नहीं बन सकी है।
एनएचएआई प्रोजेक्ट मैनेजर अरविंद कुमार का कहना है कि कॉरिडोर के प्रथम चरण का निर्माण दिल्ली खजूरी सीमा से बागपत सीमा तक किया जाना है। करीब 10 धार्मिक स्थलों के धर्मगुरुओं से वार्ता कर सहमति बनने के बाद उन्हें हटाने का काम शुरू कर दिया गया है।
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300 पिलर का निर्माण किया जाना है
कॉरिडोर के पहले चरण में दिल्ली खजूरी सीमा से ईस्टर्न पेरिफेरल वे एक्सप्रेसवे तक करीब तीन सौ पिलर का निर्माण किया जाना है। निर्माण कार्य के दौरान हुई देरी के चलते आठ पिलर का निर्माण कार्य अधर में पड़ा था। अब तेजी से काम शुरू हो गया है।
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2023 अंत तक काम पूरा करने की तैयारी
अधिकारियों के अनुसार, इस कॉरिडोर के निर्माण से दिल्ली और देहरादून के बीच की दूरी महज ढाई घंटे में तय की जा सकेगी। कॉरिडोर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोनी, बागपत, शामली और सहारनपुर से होकर गुजरेगा। 2023 दिसंबर तक निर्माण कार्य पूरा किया जाना है।
2,918 करोड़ की आएगी लागत
दिल्ली अक्षरधाम से देहरादून तक प्रस्तावित छह लेन एलिवेटेड इकोनामिक कारिडोर का पहला चरण दिल्ली स्थित अक्षरधाम से लेकर ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे टोल तक करीब 32 किमी का होगा। जिसका अनुमानित खर्च करीब 2,918 करोड़ रुपये है। निर्माण कार्य दो भागों में किया जाएगा। पहले भाग में अक्षरधाम से दिल्ली की सीमा तक 15 किमी मार्ग का निर्माण और दूसरे भाग में दिल्ली सीमा से ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे टोल तक 17 किमी निर्माण कार्य किया जाएगा। दोनों भाग में करीब 50 प्रतिशत तक एलिवेटेड रोड का निर्माण किया जाना है।