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तिरंगे के पीछे दूसरे देश के छात्र बोले, काश हम भी भारतीय होते
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तिरंगे के पीछे दूसरे देश के छात्र बोले, काश हम भी भारतीय होते
लोनी। चारों ओर से बमबारी की आवाज आ रही थी। सब घबराए थे। शिवम ठाकुर हाथ में तिरंगा लेकर चल रहे थे। उनके साथ पाकिस्तान समेत अन्य देशों के छात्र भी थे। वह भी तिरंगे के पीछे साथ-साथ चल रहे थे। रास्ते में रूस और यूक्रेन की सेना मिली। उन्होंने रास्ता दिखाने में मदद की।
शिवम ने बताया कि जिस स्थान पर वह छिप कर अपनी जान बचा रहे थे। वहां से बस के माध्यम से हंगरी बॉर्डर पहुंचने में करीब 30 घंटे लगे। अलग-अलग रास्तों में कहीं रूसी सेना तो कहीं यूक्रेन की सेना मिली। सेना ने उन्हें रोका लेकिन हाथ में तिरंगा झंडा देखकर किसी भी देश की सेना ने उन्हें परेशान नहीं किया। दोनों देशों की सेना उन्हें खतरे वाले रास्ते से बचाकर सही रास्ता दिखा रही थी। शिवम ने बताया कि बॉर्डर पर पहुंचने पर पता चला कि केवल भारत और यूक्रेन के लोगों को ही जाने दिया जा रहा है। बॉर्डर पर पहुंचने पर अन्य देश के छात्रों का वीजा देखा तो उन्हें वहीं रोक दिया। जिन छात्रों को रोका गया, वे बोल रहे थे कि काश हम भी भारतवासी होते। अन्य किसी भी देश का झंडा वहां नहीं दिख रहा था।
युद्ध शांत होने पर फिर जाएंगे यूक्रेन
शिवम ने बताया कि वह अपनी पढ़ाई को जारी रखेंगे। युद्ध खत्म होने पर वह फिर से यूक्रेन जाएंगे और अपनी पढ़ाई को जारी रखेंगे। बम धमाकों से वह डर गए, लेकिन उनका हौसला नहीं टूटा है।
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लोनी। चारों ओर से बमबारी की आवाज आ रही थी। सब घबराए थे। शिवम ठाकुर हाथ में तिरंगा लेकर चल रहे थे। उनके साथ पाकिस्तान समेत अन्य देशों के छात्र भी थे। वह भी तिरंगे के पीछे साथ-साथ चल रहे थे। रास्ते में रूस और यूक्रेन की सेना मिली। उन्होंने रास्ता दिखाने में मदद की।
शिवम ने बताया कि जिस स्थान पर वह छिप कर अपनी जान बचा रहे थे। वहां से बस के माध्यम से हंगरी बॉर्डर पहुंचने में करीब 30 घंटे लगे। अलग-अलग रास्तों में कहीं रूसी सेना तो कहीं यूक्रेन की सेना मिली। सेना ने उन्हें रोका लेकिन हाथ में तिरंगा झंडा देखकर किसी भी देश की सेना ने उन्हें परेशान नहीं किया। दोनों देशों की सेना उन्हें खतरे वाले रास्ते से बचाकर सही रास्ता दिखा रही थी। शिवम ने बताया कि बॉर्डर पर पहुंचने पर पता चला कि केवल भारत और यूक्रेन के लोगों को ही जाने दिया जा रहा है। बॉर्डर पर पहुंचने पर अन्य देश के छात्रों का वीजा देखा तो उन्हें वहीं रोक दिया। जिन छात्रों को रोका गया, वे बोल रहे थे कि काश हम भी भारतवासी होते। अन्य किसी भी देश का झंडा वहां नहीं दिख रहा था।
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युद्ध शांत होने पर फिर जाएंगे यूक्रेन
शिवम ने बताया कि वह अपनी पढ़ाई को जारी रखेंगे। युद्ध खत्म होने पर वह फिर से यूक्रेन जाएंगे और अपनी पढ़ाई को जारी रखेंगे। बम धमाकों से वह डर गए, लेकिन उनका हौसला नहीं टूटा है।
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