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पुरानी पेंशन की बहाली के लिए शिक्षकों, कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन
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पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन करते संयुक्त संघर्ष संचालन समिति क?
पुरानी पेंशन की बहाली के लिए शिक्षकों, कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन
गाजियाबाद। संयुक्त संघर्ष संचालन समिति के बैनर तले बृहस्पतिवार को बड़ी संख्या में शिक्षक और कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर धरना दिया। जिलाध्यक्ष रविंद्र राणा के नेतृत्व में कलक्ट्रेट पर सभी ने प्रदर्शन किया और ज्ञापन एसडीएम सदर विनय कुमार को ज्ञापन सौंपा।
संघर्ष संचालन समिति के संयोजक डॉ. अनुज त्यागी ने बताया कि मांग पत्र की अधिकांश मांगे पिछले कई वर्षों से शासन स्तर पर विचाराधीन है। संगठन के लगातार प्रयासों, अनगिनत धरने प्रदर्शन के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। पुरानी पेंशन की बहाली की मांग पिछले 15 वर्षों से लंबित है और सरकार इसे मानने को तैयार नहीं है जबकि यह प्रदेश के 17 लाख कर्मचारी, शिक्षकों और उनके परिवारों से जुड़ी मांग है। कहा कि कोरोना में प्रदेश के शिक्षकों, कर्मचारियों के सहयोग के प्रतिफल में उनके भत्तों और विशेष वेतन को समाप्त कर दिया गया और डीए, एरियर की धनराशि का भुगतान ना करने के आदेश मिले हैं। इससे यह संदेश जाता है कि कर्मचारी और शिक्षकों की इस सरकार में कोई सुनवाई नहीं है। पुरानी पेंशन योजना को बंद करके नई पेंशन योजना शुरू कर दी गई है जो कर्मचारियों के हित में नहीं है। हमारी मांग है कि प्रदेश में निजीकरण और आउटसोर्सिंग पर रोक लगाई जाए। वर्षों से लंबित कैशलेस चिकित्सा व्यवस्था शुरू की जाए। बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में मृतक आश्रित कर्मियों की नियुक्ति शैक्षिक योग्यता के आधार पर हो, शिक्षामित्रों व अनुदेशकों को शिक्षक के पद पर समायोजित किया जाए। इस मौके पर वरिष्ठ उपाध्यक्ष जमुना प्रसाद, महासचिव कनक सिंह, राज्यकर्मचारी परिषद के जिलाध्यक्ष देवव्रत चौधरी, उपाध्यक्ष पुष्पेंद्र सिंह, अमित यादव, मनोज कुमार, के के शर्मा, सचिव विपिन कुमार अन्य कर्मचारी और शिक्षक मौजूद रहे।
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गाजियाबाद। संयुक्त संघर्ष संचालन समिति के बैनर तले बृहस्पतिवार को बड़ी संख्या में शिक्षक और कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर धरना दिया। जिलाध्यक्ष रविंद्र राणा के नेतृत्व में कलक्ट्रेट पर सभी ने प्रदर्शन किया और ज्ञापन एसडीएम सदर विनय कुमार को ज्ञापन सौंपा।
संघर्ष संचालन समिति के संयोजक डॉ. अनुज त्यागी ने बताया कि मांग पत्र की अधिकांश मांगे पिछले कई वर्षों से शासन स्तर पर विचाराधीन है। संगठन के लगातार प्रयासों, अनगिनत धरने प्रदर्शन के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। पुरानी पेंशन की बहाली की मांग पिछले 15 वर्षों से लंबित है और सरकार इसे मानने को तैयार नहीं है जबकि यह प्रदेश के 17 लाख कर्मचारी, शिक्षकों और उनके परिवारों से जुड़ी मांग है। कहा कि कोरोना में प्रदेश के शिक्षकों, कर्मचारियों के सहयोग के प्रतिफल में उनके भत्तों और विशेष वेतन को समाप्त कर दिया गया और डीए, एरियर की धनराशि का भुगतान ना करने के आदेश मिले हैं। इससे यह संदेश जाता है कि कर्मचारी और शिक्षकों की इस सरकार में कोई सुनवाई नहीं है। पुरानी पेंशन योजना को बंद करके नई पेंशन योजना शुरू कर दी गई है जो कर्मचारियों के हित में नहीं है। हमारी मांग है कि प्रदेश में निजीकरण और आउटसोर्सिंग पर रोक लगाई जाए। वर्षों से लंबित कैशलेस चिकित्सा व्यवस्था शुरू की जाए। बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में मृतक आश्रित कर्मियों की नियुक्ति शैक्षिक योग्यता के आधार पर हो, शिक्षामित्रों व अनुदेशकों को शिक्षक के पद पर समायोजित किया जाए। इस मौके पर वरिष्ठ उपाध्यक्ष जमुना प्रसाद, महासचिव कनक सिंह, राज्यकर्मचारी परिषद के जिलाध्यक्ष देवव्रत चौधरी, उपाध्यक्ष पुष्पेंद्र सिंह, अमित यादव, मनोज कुमार, के के शर्मा, सचिव विपिन कुमार अन्य कर्मचारी और शिक्षक मौजूद रहे।
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