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12 फर्मों की जांच में नौ निकलीं बोगस, 73 करोड़ की टैक्स चोरी पकड़ी
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जालसाजी : नौ बोगस फर्म बनाकर लगा दी 73 करोड़ की चपत
1148 करोड़ की फर्जी खरीद-फरोख्त दिखाई जालसाजों ने
41 फर्मों की चेन बना किया फर्जीवाड़ा, इनमें 32 दिल्ली की
माई सिटी रिपोर्टर
गाजियाबाद। राज्य कर विभाग ने गाजियाबाद और नोएडा की रेडीमेट गारमेंट की ऐसी नौ बोगस फर्मो पर शिकंजा कसा है, जिन्होंने 1148.29 करोड़ की फर्जी खरीद-फरोख्त दिखाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के रूप में 73 करोड़ रुपये वसूल कर लिए। यह जालसाजी 41 फर्मों की चेन बनाकर की गई, इनमें 32 दिल्ली की हैं। इनके ई-वे बिल पर शक होने के बाद 12 की जांच-पड़ताल की गई तो नौ का मौके पर कोई अस्तित्व ही नहीं मिला। इन सभी के वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) पंजीकरण रद्द करा दिए गए हैं। सभी के मालिकों पर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी और पूरी रकम की वसूली होगी।
दिल्ली की फर्मों के बारे में जानकारी की गई तो इनमें से ज्यादातर फर्जी मिलीं। जांच में साफ हो गया कि यह जालसाजों का बड़ा नेटवर्क है, जो फर्जी ई-वे बिल तैयार करके आईटीसी वसूल करता है। दिल्ली की फर्मों के बारे में वहां के अधिकारियों को जानकारी दे दी गई है। गाजियाबाद और नोएडा की कई और फर्म जांच के घेरे में हैं।
राज्य कर विभाग की अपर आयुक्त अदिति सिंह ने बताया, 12 में सिर्फ तीन फर्मों में कारोबार होता मिला। इनमें से एक आरए सिल्क इंटरनेशनल, नोएडा की जांच में स्टॉक में हेरफेर मिली। इस पर 1.52 करोड़ रुपये का कर और अर्थदंड जमा कराया गया है। नोएडा की एक और फर्म है जिसमें गड़बड़ी नहीं मिली। एक लोनी की है। लोनी की फर्म के स्टॉक में भी गड़बड़ी मिली। इससे 3.90 करोड़ जमा कराए गए हैं।
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गाजियाबाद में तीन बोगस फर्म
1.गणपति ट्रेडर्स, इंदिरापुरम
2.एक्सट्रीम इंटरनेशनल, इंदिरापुरम
3. सुपर्ब एंटरप्राइजेज, इंदिरापुरम
नोएडा में छह बोगस फर्म
1. अंबिका ट्रेडर्स, वीर प्रधान सिंह मार्केट सेक्टर-141
2. जीत ट्रेडर्स, वीर प्रधान सिंह मार्केट सेक्टर-141
3. कालका ट्रेडर्स, वीर प्रधान सिंह मार्केट सेक्टर-141
4. सिम्बा ट्रेडिंग कंपनी, वीर प्रधान सिंह मार्केट सेक्टर-141
5. वान्या फैशन, डी-91, सेक्टर-6
6. अंजनी फैशन, डी-51, सेक्टर-7
फर्म की जगह चल रहा था क्लीनिक
इंदिरापुरम में पंजीकृत जी-12 गणपति ट्रेडर्स की जांच करने के लिए जब अधिकारी पहुंचे तो मौके पर फिजियोथैरिपी क्लीनिक चलता मिला। वहां गणपति ट्रेडर्स के बारे में जानकारी की गई तो लोग बोले कि यह नाम ही नहीं सुना। जांच में पता चला कि फर्म के पंजीकरण के लिए फर्जी दस्तावेज लगाए गए थे।
कागजों में फैक्टरी, मौके पर खाली प्लॉट
इंदिरापुरम में फर्म की जांच के लिए टीम पहुंची तो कहीं खाली दुकान मिली जिसे किराए पर देने की सूचना अंकित थी और मोबाइल नंबर दिया गया था। गारमेंट की फैक्टरी की जगह खाली प्लॉट मिला। इस पर कूड़ा डाला जा रहा था। जांच के लिए पांच टीमें पहुंची थीं।
दूसरों के दस्तावेज पर करा रहे पंजीकरण
बोगस फर्मों के मालिकों तक पहुंचना आसान नहीं है। ये जालसाज जीएसटी पंजीकरण के लिए दूसरों के दस्तावेज इस्तेमाल कर रहे हैं। इंदिरापुरम में एक फर्म सीए के बिजली बिल पर पंजीकृत कराई गई। इसी तरह अन्य फर्मों में दूसरे लोगों के आधार कार्ड और पैन कार्ड इस्तेमाल किए गए। ये जालसाज सिम कार्ड भी दूसरों के दस्तावेज पर लेते हैं।
भारी पड़ रहा सत्यापन न करना
बोगस फर्मों के पूरे खेल में अफसरों की लापरवाही भी सामने आ रही है। जो फर्म मौके पर है ही नहीं, उसका पंजीकरण कर दिया जा रहा है। अगर पंजीकरण से पहले मौके पर जाकर सत्यापन किया जाए तो पूरा खेल उसी समय पकड़ा जाए और बोगस फर्म खुल ही न पाए। आईटीसी क्लेम पर शक होने के बाद अधिकारी जांच के लिए जाते हैं।
अप्रैल में पकड़ी थी 128 करोड़ की की चोरी
अप्रैल माह में राज्य कर विभाग ने गाजियाबाद, नोएडा, बुलंदशहर सहित अन्य जिलों में जांच कर 128 करोड़ की कर चोरी का पर्दाफाश किया था। इनमें विभाग ने अलग-अलग थानों में 24 तहरीर दी थी। 10 मामलों में मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस जांच कर रही है। इनके आरोपी घरों पर ताले लगाकर फरार हो गए हैं। ये सभी फर्में लोहे की थीं। इनके मालिक भी चेन बनाकर जालसाजी कर रहे थे। फर्जी ई-वे बिल तैयार करके आईटीसी वसूल कर ली गई। बोगस फर्मों के मालिकों की गिरफ्तारी होने के बाद इनसे वसूली की जाएगी।
साढ़े तीन साल में 400 करोड़ वसूले
राज्य कर विभाग ने पिछले साढ़े तीन साल में बोगस फर्मों पर शिकंजा कसा तो आईटीसी के जरिए 400 करोड़ रुपये की वसूली के मामले पकड़े गए। लोगों ने यह पैसा विभाग से वसूल कर लिया। इसके बाद इनकी करतूत का पता चला। इन मामलों में केस दर्ज कराए जा रहे हैं। पुलिस इनके आरोपियों की तलाश कर रही है। लगातार चल रही जांच में यह साफ हो गया है कि दिल्ली-एनसीआर में एक नहीं, कई रैकेट काम कर रहे हैं।
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1148 करोड़ की फर्जी खरीद-फरोख्त दिखाई जालसाजों ने
41 फर्मों की चेन बना किया फर्जीवाड़ा, इनमें 32 दिल्ली की
माई सिटी रिपोर्टर
गाजियाबाद। राज्य कर विभाग ने गाजियाबाद और नोएडा की रेडीमेट गारमेंट की ऐसी नौ बोगस फर्मो पर शिकंजा कसा है, जिन्होंने 1148.29 करोड़ की फर्जी खरीद-फरोख्त दिखाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के रूप में 73 करोड़ रुपये वसूल कर लिए। यह जालसाजी 41 फर्मों की चेन बनाकर की गई, इनमें 32 दिल्ली की हैं। इनके ई-वे बिल पर शक होने के बाद 12 की जांच-पड़ताल की गई तो नौ का मौके पर कोई अस्तित्व ही नहीं मिला। इन सभी के वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) पंजीकरण रद्द करा दिए गए हैं। सभी के मालिकों पर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी और पूरी रकम की वसूली होगी।
दिल्ली की फर्मों के बारे में जानकारी की गई तो इनमें से ज्यादातर फर्जी मिलीं। जांच में साफ हो गया कि यह जालसाजों का बड़ा नेटवर्क है, जो फर्जी ई-वे बिल तैयार करके आईटीसी वसूल करता है। दिल्ली की फर्मों के बारे में वहां के अधिकारियों को जानकारी दे दी गई है। गाजियाबाद और नोएडा की कई और फर्म जांच के घेरे में हैं।
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राज्य कर विभाग की अपर आयुक्त अदिति सिंह ने बताया, 12 में सिर्फ तीन फर्मों में कारोबार होता मिला। इनमें से एक आरए सिल्क इंटरनेशनल, नोएडा की जांच में स्टॉक में हेरफेर मिली। इस पर 1.52 करोड़ रुपये का कर और अर्थदंड जमा कराया गया है। नोएडा की एक और फर्म है जिसमें गड़बड़ी नहीं मिली। एक लोनी की है। लोनी की फर्म के स्टॉक में भी गड़बड़ी मिली। इससे 3.90 करोड़ जमा कराए गए हैं।
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गाजियाबाद में तीन बोगस फर्म
1.गणपति ट्रेडर्स, इंदिरापुरम
2.एक्सट्रीम इंटरनेशनल, इंदिरापुरम
3. सुपर्ब एंटरप्राइजेज, इंदिरापुरम
नोएडा में छह बोगस फर्म
1. अंबिका ट्रेडर्स, वीर प्रधान सिंह मार्केट सेक्टर-141
2. जीत ट्रेडर्स, वीर प्रधान सिंह मार्केट सेक्टर-141
3. कालका ट्रेडर्स, वीर प्रधान सिंह मार्केट सेक्टर-141
4. सिम्बा ट्रेडिंग कंपनी, वीर प्रधान सिंह मार्केट सेक्टर-141
5. वान्या फैशन, डी-91, सेक्टर-6
6. अंजनी फैशन, डी-51, सेक्टर-7
फर्म की जगह चल रहा था क्लीनिक
इंदिरापुरम में पंजीकृत जी-12 गणपति ट्रेडर्स की जांच करने के लिए जब अधिकारी पहुंचे तो मौके पर फिजियोथैरिपी क्लीनिक चलता मिला। वहां गणपति ट्रेडर्स के बारे में जानकारी की गई तो लोग बोले कि यह नाम ही नहीं सुना। जांच में पता चला कि फर्म के पंजीकरण के लिए फर्जी दस्तावेज लगाए गए थे।
कागजों में फैक्टरी, मौके पर खाली प्लॉट
इंदिरापुरम में फर्म की जांच के लिए टीम पहुंची तो कहीं खाली दुकान मिली जिसे किराए पर देने की सूचना अंकित थी और मोबाइल नंबर दिया गया था। गारमेंट की फैक्टरी की जगह खाली प्लॉट मिला। इस पर कूड़ा डाला जा रहा था। जांच के लिए पांच टीमें पहुंची थीं।
दूसरों के दस्तावेज पर करा रहे पंजीकरण
बोगस फर्मों के मालिकों तक पहुंचना आसान नहीं है। ये जालसाज जीएसटी पंजीकरण के लिए दूसरों के दस्तावेज इस्तेमाल कर रहे हैं। इंदिरापुरम में एक फर्म सीए के बिजली बिल पर पंजीकृत कराई गई। इसी तरह अन्य फर्मों में दूसरे लोगों के आधार कार्ड और पैन कार्ड इस्तेमाल किए गए। ये जालसाज सिम कार्ड भी दूसरों के दस्तावेज पर लेते हैं।
भारी पड़ रहा सत्यापन न करना
बोगस फर्मों के पूरे खेल में अफसरों की लापरवाही भी सामने आ रही है। जो फर्म मौके पर है ही नहीं, उसका पंजीकरण कर दिया जा रहा है। अगर पंजीकरण से पहले मौके पर जाकर सत्यापन किया जाए तो पूरा खेल उसी समय पकड़ा जाए और बोगस फर्म खुल ही न पाए। आईटीसी क्लेम पर शक होने के बाद अधिकारी जांच के लिए जाते हैं।
अप्रैल में पकड़ी थी 128 करोड़ की की चोरी
अप्रैल माह में राज्य कर विभाग ने गाजियाबाद, नोएडा, बुलंदशहर सहित अन्य जिलों में जांच कर 128 करोड़ की कर चोरी का पर्दाफाश किया था। इनमें विभाग ने अलग-अलग थानों में 24 तहरीर दी थी। 10 मामलों में मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस जांच कर रही है। इनके आरोपी घरों पर ताले लगाकर फरार हो गए हैं। ये सभी फर्में लोहे की थीं। इनके मालिक भी चेन बनाकर जालसाजी कर रहे थे। फर्जी ई-वे बिल तैयार करके आईटीसी वसूल कर ली गई। बोगस फर्मों के मालिकों की गिरफ्तारी होने के बाद इनसे वसूली की जाएगी।
साढ़े तीन साल में 400 करोड़ वसूले
राज्य कर विभाग ने पिछले साढ़े तीन साल में बोगस फर्मों पर शिकंजा कसा तो आईटीसी के जरिए 400 करोड़ रुपये की वसूली के मामले पकड़े गए। लोगों ने यह पैसा विभाग से वसूल कर लिया। इसके बाद इनकी करतूत का पता चला। इन मामलों में केस दर्ज कराए जा रहे हैं। पुलिस इनके आरोपियों की तलाश कर रही है। लगातार चल रही जांच में यह साफ हो गया है कि दिल्ली-एनसीआर में एक नहीं, कई रैकेट काम कर रहे हैं।