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1.5 लाख मुकदमों में अदालत में हाजिर नहीं हो रहे आरोपी

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 26 Jun 2022 12:51 AM IST
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1.5 लाख मुकदमों में अदालत में हाजिर नहीं हो रहे आरोपी
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गाजियाबाद। जिले की अदालतों में 2.45 लाख से ज्यादा मुकदमों के लंबित होने की बड़ी वजह आरोपियों का पेश न होना है। 1.50 लाख मुकदमे ऐसे हैं जिनमें सम्मन जारी होने के बाद भी आरोपी हाजिर नहीं हो रहे हैं। इन सभी मामलों में सिर्फ तारीख लग रही है। इनमें महिलाओं के 18,716 और वरिष्ठ नागरिकों के 7,347 मुकदमे हैं। ये लोग तारीख पर आते हैं और अगली तारीख लेकर चले जाते हैं। गैर हाजिर आरोपियों के हर महीने 900 सम्मन जारी हो रहे हैं लेकिन इनमें से ज्यादातर की पेशी तभी होती है जब कई सम्मन और वारंट के बाद गैर जमानती वारंट जारी किए जाते हैं।
नेशनल ज्यूडिशियल डाटा ग्रिड के आंकड़ों के अनुसार गाजियाबाद की अलग-अलग अदालतों में 2,45,742 मुकदमे विचाराधीन हैं। इनमें 2,15,415 अपराध और 30,327 सिविल से संबंधित हैं। इनमें सिर्फ 60,216 मामले गवाही और बहस के लिए लगे हैं। एक महीने में 28272 मुकदमों का निस्तारण भी हुआ है, जबकि 26537 मामले दायर हुए हैं। अधिवक्ता राजकुमार चौहान का कहना है कि न अदालत की आदेशिका का पालन नहीं हो पा रहा है। पुलिस सम्मन तामील कराने को गंभीरता से नहीं ले रही है। बार सचिव नितिन यादव का कहना है कि जिला जज को बार की तरफ से पत्र लिखा जाएगा कि गवाह बुलाने में अदालतें सख्ती बरतें जिससे मुकदमों को निस्तारण जल्द हो सके।
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पुलिस भी गवाही पर गंभीर नहीं
सिर्फ आरोपी ही नहीं, पुलिसवाले भी गवाही पर गंभीर नहीं है। जिला शासकीय अधिवक्ता राजेश चंद्र शर्मा का कहना है कि हर महीने अदालत से 150 से अधिक पुलिस कर्मियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी होते हैं। मुकदमे के विवेचक और गवाह पुलिस कर्मियों के तबादले गैर जनपदों में हो जाते हैं। गवाही के लिए बुलाने पर पहले एसएसपी कार्यालय के लिए समन जारी होता है, दूसरी बार उनके मौजूदा कार्यस्थल पर जाता है। इसके बावजूद अदालत में पेश नहीं होते हैं तो उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी होता है।
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20 साल से नहीं पेश हुआ सरकारी गवाह
भोजपुर के कलछीना निवासी रनवीर पर 2002 में तमंचा दिखाकर पुलिस ने चालान किया था। इस मामले में गवाही नहीं हो सकी है। इस कारण मुकदमा लंबित है। सिर्फ तारीख लग रही हैं।

करंट लगने से हुई मौत, पांच साल बाद भी नहीं हुई गवाही
इलाहाबाद हाईकोर्ट में वकालत कर रहे अधिवक्ता के बेटे की पांच साल पहले एनएच-9 स्थित एक इंजीनियरिंग कालेज में करंट लगने से मौत हो गई थी, इस मामले में अभी तक गवाही नहीं हो पाई, जबकि पीड़ित पक्ष लगातार मुकदमे की पैरवी कर रहा है।
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