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महीने के आखिर में खर्च का दबाव दे रहा है तनाव
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महीने के आखिर में खर्च का दबाव दे रहा है तनाव
गाजियाबाद। काम के अनुरूप पारिश्रमिक न मिलने और जरूरतों को पूरा करने के लिए आय से अधिक खर्च करने से लोगों में तनाव बढ़ रहा है। सबसे अधिक परेशानी युवा वर्ग व कामकाजी लोगों को हो रही है। संवेदना सोसायटी द्वारा किए गए सर्वे में पता चला है कि हर महीने के 20 से 30 तारीख तक लोगों का तनाव बढ़ जाता है। इसका कारण है कि इन्हीं तारीखों के दौरान होम लोन, क्रेडिट कार्ड, वाहन ऋण और पर्सनल लोन के मेसेज आने शुरू होते हैं। एमएमजी अस्पताल में भी इस समयावधि में 20 से 30 फीसदी मरीजों की संख्या बढ़ जाती है। तनाव से कैंसर, फेफड़ों की परेशानी, माइग्रेन, तेज सिरदर्द, गंभीर दुर्घटना, लिवर की समस्या, हृदयाघात, अल्सर, रक्तचाप, जैसी गंभीर बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं। एक तारीख के बाद लोगों में खुद ही तनाव कम होने लगता है।
सोसायटी के अध्यक्ष व मनोविज्ञानी डॉ. संजीव त्यागी का कहना है कि मौजूदा समय में युवा वर्ग (25 से 35 वर्ष) ने दिखावे के चक्कर में आय से अधिक खर्च करने में लगा है। इसकी भरपाई क्रेडिट कार्ड और पर्सनल लोन से हो जाती है। जब इनका भुगतान करने के लिए लिंक मोबाइल नंबर पर मेसेज आता है तो तनाव बढ़ जाता है कि आने वाले महीने में खर्च का संतुलन कैसे बनाएंगे। मनोचिकित्सक डॉ. हेमिका अग्रवाल का कहना है कि तनाव की प्रतिक्रिया में मांसपेशियां तनावग्रस्त हो जाती हैं। तनाव बढ़ने पर कोर्टिसोल नामक हार्मोंस का स्तर बढ़ जाता है। इससे सिर, गर्दन, पीठ और पीठ के निचले हिस्से की मांसपेशियां लगातार तनाव की स्थिति में रहती हैं। यह तनाव सिरदर्द और माइग्रेन सिरदर्द का कारण बनता है।
सर्वे में 60 फीसदी में मिला तनाव
मनोचिकित्सक एवं मनोवैज्ञानिकों की संस्था संवेदना सोसायटी ने तीन महीने के सर्वे में 1244 लोगों से बातचीत की। इस दौरान उनकी मनोस्थिति को को नोट किया गया। संस्था की रिपोर्ट में पता चला कि महीने से 20 से 30 तारीख के बीच चिंता के कारण लोगों में तनाव की स्थिति मिली। इनमें 746 लोगों में खर्च को लेकर तनाव देखा गया। युवाओं की संख्या सर्वे में अधिक मिली।
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जीवनशैली में बदलाव लाएं, योग अपनाएं
सुबह जल्दी उठें और नियमित प्राणायाम और योग करें
भरपूर नींद लें, जरूरत से ज्याद न सोएं। सोने और सुबह उठने का एक समय निश्चित करें।
अपनी परेशानियों को दोस्तों और परिवार के साथ साझा करें। इससे तनाव कम होगा।
तनाव की स्थिति में जंक और अधिक तला भुना न खाएं।
इनसे बचें
नकारात्मक लोगों के साथ उठने-बैठने से बचें, क्योंकि इससे आप भी नकारात्मक हो सकते हैं।
हर वक्त मोबाइल टीवी और लैपटॉप जैसे गैजेट से चिपके न रहें।
धूम्रपान और शराब का सेवन बिल्कुल न करें। इससे कुछ देर के लिए राहत महसूस हो सकती है, बाद में परेशानी दोगुनी बढ़ जाएगी।
बेवजह की बातों पर सोच विचार या बहस न करें। इससे तनाव और भी बढ़ जाता है।
शारीरिक क्षमता से अधिक काम न करें। घंटों काम में लगे रहने से तनाव की स्थिति पैदा होती है।
समस्याओं के बारे में सोचने के बजाय उनका समाधान निकालने की कोशिश करें।
क्या खाएं
काजू और भिगोए हुए बादाम खाएं।
विटामिन - सी से भरपूर फल खाएं।
हरे पत्तेदार सब्जियां खाएं।
डार्क चॉकलेट खाएं।
हर्बल टी पिएं।
क्या न खाएं
ऑयली चीजों और जंक फूड से बचें।
कैफीन का सेवन न करें।
शुगर का इस्तेमाल कम से कम करें।
चिप्स को नजरअंदाज करें।
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गाजियाबाद। काम के अनुरूप पारिश्रमिक न मिलने और जरूरतों को पूरा करने के लिए आय से अधिक खर्च करने से लोगों में तनाव बढ़ रहा है। सबसे अधिक परेशानी युवा वर्ग व कामकाजी लोगों को हो रही है। संवेदना सोसायटी द्वारा किए गए सर्वे में पता चला है कि हर महीने के 20 से 30 तारीख तक लोगों का तनाव बढ़ जाता है। इसका कारण है कि इन्हीं तारीखों के दौरान होम लोन, क्रेडिट कार्ड, वाहन ऋण और पर्सनल लोन के मेसेज आने शुरू होते हैं। एमएमजी अस्पताल में भी इस समयावधि में 20 से 30 फीसदी मरीजों की संख्या बढ़ जाती है। तनाव से कैंसर, फेफड़ों की परेशानी, माइग्रेन, तेज सिरदर्द, गंभीर दुर्घटना, लिवर की समस्या, हृदयाघात, अल्सर, रक्तचाप, जैसी गंभीर बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं। एक तारीख के बाद लोगों में खुद ही तनाव कम होने लगता है।
सोसायटी के अध्यक्ष व मनोविज्ञानी डॉ. संजीव त्यागी का कहना है कि मौजूदा समय में युवा वर्ग (25 से 35 वर्ष) ने दिखावे के चक्कर में आय से अधिक खर्च करने में लगा है। इसकी भरपाई क्रेडिट कार्ड और पर्सनल लोन से हो जाती है। जब इनका भुगतान करने के लिए लिंक मोबाइल नंबर पर मेसेज आता है तो तनाव बढ़ जाता है कि आने वाले महीने में खर्च का संतुलन कैसे बनाएंगे। मनोचिकित्सक डॉ. हेमिका अग्रवाल का कहना है कि तनाव की प्रतिक्रिया में मांसपेशियां तनावग्रस्त हो जाती हैं। तनाव बढ़ने पर कोर्टिसोल नामक हार्मोंस का स्तर बढ़ जाता है। इससे सिर, गर्दन, पीठ और पीठ के निचले हिस्से की मांसपेशियां लगातार तनाव की स्थिति में रहती हैं। यह तनाव सिरदर्द और माइग्रेन सिरदर्द का कारण बनता है।
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सर्वे में 60 फीसदी में मिला तनाव
मनोचिकित्सक एवं मनोवैज्ञानिकों की संस्था संवेदना सोसायटी ने तीन महीने के सर्वे में 1244 लोगों से बातचीत की। इस दौरान उनकी मनोस्थिति को को नोट किया गया। संस्था की रिपोर्ट में पता चला कि महीने से 20 से 30 तारीख के बीच चिंता के कारण लोगों में तनाव की स्थिति मिली। इनमें 746 लोगों में खर्च को लेकर तनाव देखा गया। युवाओं की संख्या सर्वे में अधिक मिली।
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जीवनशैली में बदलाव लाएं, योग अपनाएं
सुबह जल्दी उठें और नियमित प्राणायाम और योग करें
भरपूर नींद लें, जरूरत से ज्याद न सोएं। सोने और सुबह उठने का एक समय निश्चित करें।
अपनी परेशानियों को दोस्तों और परिवार के साथ साझा करें। इससे तनाव कम होगा।
तनाव की स्थिति में जंक और अधिक तला भुना न खाएं।
इनसे बचें
नकारात्मक लोगों के साथ उठने-बैठने से बचें, क्योंकि इससे आप भी नकारात्मक हो सकते हैं।
हर वक्त मोबाइल टीवी और लैपटॉप जैसे गैजेट से चिपके न रहें।
धूम्रपान और शराब का सेवन बिल्कुल न करें। इससे कुछ देर के लिए राहत महसूस हो सकती है, बाद में परेशानी दोगुनी बढ़ जाएगी।
बेवजह की बातों पर सोच विचार या बहस न करें। इससे तनाव और भी बढ़ जाता है।
शारीरिक क्षमता से अधिक काम न करें। घंटों काम में लगे रहने से तनाव की स्थिति पैदा होती है।
समस्याओं के बारे में सोचने के बजाय उनका समाधान निकालने की कोशिश करें।
क्या खाएं
काजू और भिगोए हुए बादाम खाएं।
विटामिन - सी से भरपूर फल खाएं।
हरे पत्तेदार सब्जियां खाएं।
डार्क चॉकलेट खाएं।
हर्बल टी पिएं।
क्या न खाएं
ऑयली चीजों और जंक फूड से बचें।
कैफीन का सेवन न करें।
शुगर का इस्तेमाल कम से कम करें।
चिप्स को नजरअंदाज करें।