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ज्यादा लोगों की जान लेने के लिए चुना था संकट मोचन मंदिर

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 07 Jun 2022 12:51 AM IST
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ज्यादा लोगों की जान लेने के लिए चुना था संकट मोचन मंदिर
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गाजियाबाद। वलीउल्लाह ने बम विस्फोट करने के लिए इसलिए संकटमोचन मंदिर को चुना था ताकि बड़े स्तर पर लोगों की जान जाए। क्योंकि मंदिर में हर समय हजारों की संख्या में दर्शनार्थियों की भीड़ होती है और अनसूझ विवाह संपन्न होते हैं। वलीउल्लाह के तार बांग्लादेश व पाकिस्तान से भी जुड़े हैं। हमले में सवा साल की एक बच्ची की मौत हुई तो 65 साल के बुजुर्ग की भी बलि चढ़ गई। बम विस्फोट में मारी गई बच्ची निर्दोष थी और बुजुर्ग का भी कोई दोष नहीं था। यह दलील जिला शासकीय अधिवक्ता राजेश चंद्र शर्मा ने सजा के प्रश्न पर सुनवाई के दौरान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के सामने रखे।
शासकीय अधिवक्ता ने अदालत से कहा कि यह सिद्ध हो चुका है कि यह आतंकवादी घटना है। उन्होंने तर्क दिया कि आतंकवादियों द्वारा घटना को अंजाम देने के लिए पूर्व योजना के अनुसार व उसके क्रियान्वयन के लिए घटना स्थल पर कई दिन तक आवागमन करते रहे हैं। वलीउल्लाह को आते जाते कई साक्षियों द्वारा देखा गया था। उसकी न्यायालय में भी लोगों ने पहचान की थी। हालांकि, बचाव पक्ष ने इसे कमजोर प्रकृति का साक्ष्य माना।
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प्रयागराज में राष्ट्रद्रोह का चल रहा है मुकदमा
वलीउल्लाह को एक मामले में लखनऊ न्यायालय से 10 वर्ष की सजा हो चुकी है। उसके विरुद्ध राष्ट्रद्रोह का मुकदमा प्रयागराज में चल रहा है। संकट मोचन मंदिर में जो घटना घटित हुई थी वह झकझोर देने वाली थी। धमाका इतना जबरदस्त था कि आसपास के मकानों में कंपन आ गया था। घटना में सात लोगों की जान चली गई और कई लोग अपंग व गंभीर रूप से घायल हो गये। यह भी तर्क दिया गया कि दोषसिद्ध अभियुक्त वलीउल्ला के द्वारा किया गया अपराध विरल से विरलतम श्रेणी का है। यह राष्ट्र एवं समाज को अस्थिर करने का कार्य है।
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बचाव पक्ष ने कहा- आजीवन कारावास को वर्ष में बदल दिया जाए
बचाव पक्ष के अधिवक्ता महेश कुमार ने तर्क दिया कि अभियुक्त एक शांतिपसंद नागरिक है और वह गरीब है। उसके ऊपर परिवार के भरण पोषण का दायित्व है। आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। घटना कारित करते हुए किसी ने नहीं देखा है। 16 वर्ष से कारागार में निरुद्ध रहा है। धारा 302 में न्यूनतम आजीवन कारावास की सजा दी जाए और इस कारावास को वर्षों में कर दिया जाए।

सड़क किनारे बैग रख लंका की ओर चला गया था वलीउल्लाह
घटना के दिन वलीउल्लाह को अन्य व्यक्तियों के साथ सड़क के किनारे बैग रखकर लंका की ओर जाते हुए देखा गया था। उसके जाने के कुछ देर बाद ही संकट मोचन मंदिर में धमाका हो गया। पांच गवाहों ने अदालत को बताया कि कैंट रेलवे स्टेशन से कचहरी जाते समय वलीउल्लाह व उसके अन्य तीन साथियों को चार मार्च 2006 को देखा था। घटना के बाद गिरफ्तारी होने पर इसे टीवी पर देखने और पहचानने की पुष्टि की थी।
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