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निठारी कांड: बयान से मुकरने पर साढ़े तीन साल कारावास
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निठारी कांड: बयान से मुकरने पर साढ़े तीन साल कारावास
गाजियाबाद। निठारी कांड में बेटी की हत्या और दुष्कर्म के मामले में बयान से मुकरने वाले दोषी पिता को अदालत ने साढ़े तीन वर्ष का कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। उसके बयान बदलने पर मोनिंदर सिंह पंढेर को लाभ मिला था। वह दुष्कर्म और हत्या के मामले में बरी हो गया था।
अधिवक्ता खालिद खान ने बताया कि निठारी निवासी व्यक्ति की बेटी की 2006 में दुष्कर्म के बाद हत्या हुई थी। इस केस में सुरेंद्र कोली को सजा ए मौत हुई लेकिन युवती के पिता के बयान से मुकर जाने के कारण पंढेर बरी हो गया था। इसी वजह से 22 मार्च 2007 को सीबीआई ने युवती की हत्या के मामले में सुरेंद्र कोली के खिलाफ हत्या और दुष्कर्म के मामले में चार्जशीट पेश की,
जबकि पंढेर के खिलाफ सिर्फ देह व्यापार कानून में चार्जशीट पेश की। युवती के पिता ने तत्कालीन सीबीआई जज रमा जैन की अदालत में छह जुलाई 2007 को बयान दर्ज कराया कि मोनिंदर सिंह पंढेर ने मेरे सामने सभी हत्या का जुर्म कबूल किया। मेरे सामने ही पंढेर व सुरेंद्र कोली ने हत्या में इस्तेमाल आरी बरामद की थी। इसी बयान के आधार पर अदालत ने पंढेर को आरोपी बनाया। इसके बाद 15 जनवरी 2007 को उसी कोर्ट में बयान से मुकर गया। दोबारा बताया कि पंढेर ने न तो मेरे सामने आरी बरामद करायी और न ही हत्या का जुर्म कुबूल किया था। अदालत से कहा कि मैने पहले वाला बयान अपने वकील खालिद खान के कहने पर दिया था। निठारी पीड़ित दो अन्य ने 19 नवंबर 2007 को अधिवक्ता खालिद खान से सीबीआई कोर्ट में व्यक्ति के खिलाफ बयान से मुकरने का मामला पेश कराया, इसकी पुष्टि होने पर तत्कालीन सीबीआई जज रमा जैन ने यह मामला दर्ज कराया।
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15 साल से विचाराधीन मामले में हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि तीन महीने के अंदर मामले का निस्तारण किया जाए। 9 मई को निर्णय को रोकने के लिए व्यक्ति ने जिला जज की अदालत में डिस्चार्ज अर्जी लगाई, जिसे 13 माई को अदालत ने खारिज कर नियत तिथि पर निर्णय करने का आदेश दिया था। 27 मई को अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने दोषी मानते हुए अंतरिम जमानत अर्जी खारिज कर सजा सुनाई।
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गाजियाबाद। निठारी कांड में बेटी की हत्या और दुष्कर्म के मामले में बयान से मुकरने वाले दोषी पिता को अदालत ने साढ़े तीन वर्ष का कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। उसके बयान बदलने पर मोनिंदर सिंह पंढेर को लाभ मिला था। वह दुष्कर्म और हत्या के मामले में बरी हो गया था।
अधिवक्ता खालिद खान ने बताया कि निठारी निवासी व्यक्ति की बेटी की 2006 में दुष्कर्म के बाद हत्या हुई थी। इस केस में सुरेंद्र कोली को सजा ए मौत हुई लेकिन युवती के पिता के बयान से मुकर जाने के कारण पंढेर बरी हो गया था। इसी वजह से 22 मार्च 2007 को सीबीआई ने युवती की हत्या के मामले में सुरेंद्र कोली के खिलाफ हत्या और दुष्कर्म के मामले में चार्जशीट पेश की,
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जबकि पंढेर के खिलाफ सिर्फ देह व्यापार कानून में चार्जशीट पेश की। युवती के पिता ने तत्कालीन सीबीआई जज रमा जैन की अदालत में छह जुलाई 2007 को बयान दर्ज कराया कि मोनिंदर सिंह पंढेर ने मेरे सामने सभी हत्या का जुर्म कबूल किया। मेरे सामने ही पंढेर व सुरेंद्र कोली ने हत्या में इस्तेमाल आरी बरामद की थी। इसी बयान के आधार पर अदालत ने पंढेर को आरोपी बनाया। इसके बाद 15 जनवरी 2007 को उसी कोर्ट में बयान से मुकर गया। दोबारा बताया कि पंढेर ने न तो मेरे सामने आरी बरामद करायी और न ही हत्या का जुर्म कुबूल किया था। अदालत से कहा कि मैने पहले वाला बयान अपने वकील खालिद खान के कहने पर दिया था। निठारी पीड़ित दो अन्य ने 19 नवंबर 2007 को अधिवक्ता खालिद खान से सीबीआई कोर्ट में व्यक्ति के खिलाफ बयान से मुकरने का मामला पेश कराया, इसकी पुष्टि होने पर तत्कालीन सीबीआई जज रमा जैन ने यह मामला दर्ज कराया।
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15 साल से विचाराधीन मामले में हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि तीन महीने के अंदर मामले का निस्तारण किया जाए। 9 मई को निर्णय को रोकने के लिए व्यक्ति ने जिला जज की अदालत में डिस्चार्ज अर्जी लगाई, जिसे 13 माई को अदालत ने खारिज कर नियत तिथि पर निर्णय करने का आदेश दिया था। 27 मई को अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने दोषी मानते हुए अंतरिम जमानत अर्जी खारिज कर सजा सुनाई।