{"_id":"62869c28ea16f81df629ce8a","slug":"ghaziabad-ghaziabad-news-gbd2386807115","type":"story","status":"publish","title_hn":"संघर्ष के दम पर पर्वतों के शिखर पर पहुंचीं प्रकृति","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
संघर्ष के दम पर पर्वतों के शिखर पर पहुंचीं प्रकृति
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संघर्ष के दम पर पर्वतों के शिखर पर पहुंचीं प्रकृति
गाजियाबाद। अगर कुछ करने की ठान लो तो कोई भी चीज आपके लक्ष्य को पाने में बाधा नहीं बन सकती है। क्रॉसिंग रिपब्लिक की पैरामाउंट सिंफनी में रहने वाली प्रकृति वार्ष्णेय ने यह साबित कर दिखाया है। 26 वर्षीय प्रकृति पहली शाकाहारी युवती हैं, जिसने माउंट एवरेस्ट को फतह किया है। उनका अगला लक्ष्य आठ हजार चोटियों को फतह करने का है।
प्रकृति ने फैशन डिजाइनिंग करने के बाद दो साल तक इस क्षेत्र में नौकरी की लेकिन कुछ दिनों बाद से ही उनको लगने लगा कि वह इसके लिए नहीं बनी हैं। उन्होंने 21 वर्ष की उम्र से ट्रेवलिंग शुरू की। वह एक ट्रेवल ब्लॉगर हैं और सोशल मीडिया पर इंफ्लूएंसर्स भी हैं। पहले छोटे-छोटे पहाड़ों पर चढ़ाई की। उन्होंने बताया कि सबसे पहली सोलो ट्रिप नेपाल के माउंट अमा डबलाम (6,812 मीटर) की थी। माउंट एवरेस्ट के लिए प्रशिक्षण लिया और इसके खत्म होते ही माउंट एवरेस्ट और लोह्त्से दोनों की चढ़ाई एक साथ करने की योजना बनाई। दोनों की चढ़ाई का खर्चा लगभग 50 लाख रुपये आ रहा था। प्रकृति की बहन ने बताया कि मध्यम वर्गीय परिवार से होने की वजह से इतना खर्चा वहन नहीं कर सकते थे इसलिए उसने लोह्त्से को छोड़कर पहले माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई करने की सोची। इसमें लगभग 24 लाख का खर्चा था। इसके लिए पहले सरकारी सहायता के लिए प्रयास किया लेकिन कुछ फायदा नहीं हुआ फिर सोशल मीडिया पर फंड इक्ट्ठा किया, जिससे उन्हें 11 लाख रुपये मिले। अपने पास बचत के पांच लाख थे बाकी अपने दोस्तों रिश्तेदारों से कर्जा लिया और चढ़ाई शुरू की। प्रकृति ने सात मई को चढ़ाई शुरू की और 12 मई को चोटी पर पहुंच गईं।
ना शाकाहार, ना फंड बनी बाधा
प्रकृति ना सिर्फ शाकाहारी है बल्कि विगन डाइट अपनाने के बाद पिछले तीन साल से डेयरी प्रोडक्ट्स भी नहीं लेती हैं। वह पूरी तरह से नेचुरल प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करती हैं। शरीर में कैल्शियम, प्रोटीन की पूर्ति के लिए ड्राइ फ्रूट्स, चने, सोयाबीन, दालें, आर्गेनिक फल और सब्जियों आदि का सेवन करती हैं। उनको सभी ने कहा कि वह इस डाइट के सहारे इतनी कठिन चढ़ाई नहीं चढ़ सकेंगी। सभी ने उनको रोकने की कोशिश की लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उसके बाद फंड की कमी को भी कर्ज लेकर पूरा किया।
विज्ञापन
बचपन से आकर्षित करते हैं पहाड़
प्रकृति ने बताया कि उनको बचपन से ही पहाड़, झरने, नदियां अपनी तरफ आकर्षित करती थीं। बचपन से सपने देखती थी कि वह जिप्सी से पहाड़ियों का भ्रमण करेंगी। सीमित संसाधनों के कारण यह सब सपने कैसे पूरे होंगे नहीं पता था लेकिन जिद थी कि एक दिन तो यह सपना जरूर पूरा करूंगी। मैं पूरा पूर्वोत्तर सहित अधिकतर पहाड़ी क्षेत्र घूम चुकी हूं। पिता सिविल इंजीनियर और मां गृहणी हैं। एक बहन और एक छोटा भाई है। प्रकृति ने बताया कि उनके हर सपने को पूरा करने में परिवार का सबसे बड़ा सहयोग रहा है।
विज्ञापन
गाजियाबाद। अगर कुछ करने की ठान लो तो कोई भी चीज आपके लक्ष्य को पाने में बाधा नहीं बन सकती है। क्रॉसिंग रिपब्लिक की पैरामाउंट सिंफनी में रहने वाली प्रकृति वार्ष्णेय ने यह साबित कर दिखाया है। 26 वर्षीय प्रकृति पहली शाकाहारी युवती हैं, जिसने माउंट एवरेस्ट को फतह किया है। उनका अगला लक्ष्य आठ हजार चोटियों को फतह करने का है।
प्रकृति ने फैशन डिजाइनिंग करने के बाद दो साल तक इस क्षेत्र में नौकरी की लेकिन कुछ दिनों बाद से ही उनको लगने लगा कि वह इसके लिए नहीं बनी हैं। उन्होंने 21 वर्ष की उम्र से ट्रेवलिंग शुरू की। वह एक ट्रेवल ब्लॉगर हैं और सोशल मीडिया पर इंफ्लूएंसर्स भी हैं। पहले छोटे-छोटे पहाड़ों पर चढ़ाई की। उन्होंने बताया कि सबसे पहली सोलो ट्रिप नेपाल के माउंट अमा डबलाम (6,812 मीटर) की थी। माउंट एवरेस्ट के लिए प्रशिक्षण लिया और इसके खत्म होते ही माउंट एवरेस्ट और लोह्त्से दोनों की चढ़ाई एक साथ करने की योजना बनाई। दोनों की चढ़ाई का खर्चा लगभग 50 लाख रुपये आ रहा था। प्रकृति की बहन ने बताया कि मध्यम वर्गीय परिवार से होने की वजह से इतना खर्चा वहन नहीं कर सकते थे इसलिए उसने लोह्त्से को छोड़कर पहले माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई करने की सोची। इसमें लगभग 24 लाख का खर्चा था। इसके लिए पहले सरकारी सहायता के लिए प्रयास किया लेकिन कुछ फायदा नहीं हुआ फिर सोशल मीडिया पर फंड इक्ट्ठा किया, जिससे उन्हें 11 लाख रुपये मिले। अपने पास बचत के पांच लाख थे बाकी अपने दोस्तों रिश्तेदारों से कर्जा लिया और चढ़ाई शुरू की। प्रकृति ने सात मई को चढ़ाई शुरू की और 12 मई को चोटी पर पहुंच गईं।
विज्ञापन
ना शाकाहार, ना फंड बनी बाधा
प्रकृति ना सिर्फ शाकाहारी है बल्कि विगन डाइट अपनाने के बाद पिछले तीन साल से डेयरी प्रोडक्ट्स भी नहीं लेती हैं। वह पूरी तरह से नेचुरल प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करती हैं। शरीर में कैल्शियम, प्रोटीन की पूर्ति के लिए ड्राइ फ्रूट्स, चने, सोयाबीन, दालें, आर्गेनिक फल और सब्जियों आदि का सेवन करती हैं। उनको सभी ने कहा कि वह इस डाइट के सहारे इतनी कठिन चढ़ाई नहीं चढ़ सकेंगी। सभी ने उनको रोकने की कोशिश की लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उसके बाद फंड की कमी को भी कर्ज लेकर पूरा किया।
विज्ञापन
बचपन से आकर्षित करते हैं पहाड़
प्रकृति ने बताया कि उनको बचपन से ही पहाड़, झरने, नदियां अपनी तरफ आकर्षित करती थीं। बचपन से सपने देखती थी कि वह जिप्सी से पहाड़ियों का भ्रमण करेंगी। सीमित संसाधनों के कारण यह सब सपने कैसे पूरे होंगे नहीं पता था लेकिन जिद थी कि एक दिन तो यह सपना जरूर पूरा करूंगी। मैं पूरा पूर्वोत्तर सहित अधिकतर पहाड़ी क्षेत्र घूम चुकी हूं। पिता सिविल इंजीनियर और मां गृहणी हैं। एक बहन और एक छोटा भाई है। प्रकृति ने बताया कि उनके हर सपने को पूरा करने में परिवार का सबसे बड़ा सहयोग रहा है।