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डेढ़ लाख राशन कार्ड धारकों को होली से पहले नहीं मिला राशन
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डेढ़ लाख राशन कार्ड धारकों को होली से पहले नहीं मिला राशन
गाजियाबाद। कोरोना काल में लोगों को भूख से बचाने के लिए शुरू की गई गरीब कल्याण योजना आपूर्ति व्यवस्था की खामियों की भेंट चढ़ गई है। मार्च में गरीब कल्याण योजना के तहत लाखों कार्ड धारकों को वितरण की तय तिथि तक राशन नहीं मिल सका है। इससे उनकी होली फीकी रह गई। वहीं खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत मिलने वाले राशन के वितरण का काम भी अधर में लटका है। आदेश था कि होली से पहले दोनों राउंड का राशन उपलब्ध करा दिया जाए।
सरकार द्वारा गरीबों के भरण-पोषण के लिये हर महीने दो राउंड में राशन का वितरण किया जाता है। पहले राउंड में खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत हर महीने अंत्योदय कार्ड के माध्यम से प्रति परिवार 35 किलो राशन उपलब्ध कराया जाता है। वहीं प्राथमिकता घरेलू कार्ड के माध्यम से हर महीने प्रत्येक परिवार को प्रति सदस्य 5 किलोग्राम राशन उपलब्ध कराया जाता है। जिले में करीब 4 लाख 37 हजार कार्ड धारक हैं। समय से आपूर्ति नही होने से करीब डेढ़ लाख कार्ड धारक राशन पाने की वाट जोह रहे हैं।
वहीं दूसरे राउंड में गरीब कल्याण योजना के तहत आपूर्ति की जाती है। कोरोना काल में शुरू की गइ इस योजना के तहत पिछले दो सालों से 5 किलो राशन का वितरण किया जा रहा है। राशन के साथ ही नमक, चीनी, रिफाइंड तेल की आपूर्ति भी की जा रही है। आपूर्ति नहीं होने से डेढ़ लाख लोगों को बाजार से खरीदकर त्योहार मनाना पड़ा।
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होली से पहले राशन मिलने की थी उम्मीद
मानसरोवर पार्क में रहने वाले अमन कुमार पिछले एक सप्ताह से राशन की दुकान के चक्कर काट रहे हैं। हर बार राशन न होने की बात कह कर उन्हें वापस कर दिया जाता है। वहीं पंचशील कॉलोनी में रहने वाले मोहित दिहाड़ी मजदूरी का काम करते हैं। होली से पहले राशन मिलने की उम्मीद थी लेकिन राशन नहीं मिलने से परिवार में मायूसी है।
ठेकेदारों की लापरवाही से हो रही देरी
खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत एफसीआई के गोदामों में रखे अनाज को ठेकेदारों के माध्यम से राशन की दुकानों तक पहुंचाया जाता है। जिले में करीब 579 राशन वितरण की दुकानें हैं । ठेकेदारों की लापरवाही के चलते इन दुकानों पर समय पर राशन नहीं पहुंच पाता है। जिसका खामियाजा कार्ड धारकों को उठाना पड़ता है।
खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत इन लोगों को मिलता है राशन
ऐसे परिवार जिनमें कोई कैंसर या कुष्ठ रोग से पीड़ित है, अनाथ बच्चे, परित्यक्त्य महिलाएं, जूते- चप्पल की मरम्मत करने वाले, भिक्षावृत्ति करने वाले, फेरी लगाने वाले, गरीबी रेखा के नीचे के आवासहीन परिवार जिनकी वार्षिक आय 48 हजार रुपये से कम है, राशन कार्ड के लिये पात्र हैं
क्षेत्रीय खाद्य आपूर्ति अधिकारी अश्विनी कुमार का कहना है कि ठेकेदारों की लापवाही को उच्च अधिकारियों को सूचित कर दिया गया है। 25 मार्च तक दोनों राउंड को पूरा कर लिया जाएगा।
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गाजियाबाद। कोरोना काल में लोगों को भूख से बचाने के लिए शुरू की गई गरीब कल्याण योजना आपूर्ति व्यवस्था की खामियों की भेंट चढ़ गई है। मार्च में गरीब कल्याण योजना के तहत लाखों कार्ड धारकों को वितरण की तय तिथि तक राशन नहीं मिल सका है। इससे उनकी होली फीकी रह गई। वहीं खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत मिलने वाले राशन के वितरण का काम भी अधर में लटका है। आदेश था कि होली से पहले दोनों राउंड का राशन उपलब्ध करा दिया जाए।
सरकार द्वारा गरीबों के भरण-पोषण के लिये हर महीने दो राउंड में राशन का वितरण किया जाता है। पहले राउंड में खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत हर महीने अंत्योदय कार्ड के माध्यम से प्रति परिवार 35 किलो राशन उपलब्ध कराया जाता है। वहीं प्राथमिकता घरेलू कार्ड के माध्यम से हर महीने प्रत्येक परिवार को प्रति सदस्य 5 किलोग्राम राशन उपलब्ध कराया जाता है। जिले में करीब 4 लाख 37 हजार कार्ड धारक हैं। समय से आपूर्ति नही होने से करीब डेढ़ लाख कार्ड धारक राशन पाने की वाट जोह रहे हैं।
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वहीं दूसरे राउंड में गरीब कल्याण योजना के तहत आपूर्ति की जाती है। कोरोना काल में शुरू की गइ इस योजना के तहत पिछले दो सालों से 5 किलो राशन का वितरण किया जा रहा है। राशन के साथ ही नमक, चीनी, रिफाइंड तेल की आपूर्ति भी की जा रही है। आपूर्ति नहीं होने से डेढ़ लाख लोगों को बाजार से खरीदकर त्योहार मनाना पड़ा।
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होली से पहले राशन मिलने की थी उम्मीद
मानसरोवर पार्क में रहने वाले अमन कुमार पिछले एक सप्ताह से राशन की दुकान के चक्कर काट रहे हैं। हर बार राशन न होने की बात कह कर उन्हें वापस कर दिया जाता है। वहीं पंचशील कॉलोनी में रहने वाले मोहित दिहाड़ी मजदूरी का काम करते हैं। होली से पहले राशन मिलने की उम्मीद थी लेकिन राशन नहीं मिलने से परिवार में मायूसी है।
ठेकेदारों की लापरवाही से हो रही देरी
खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत एफसीआई के गोदामों में रखे अनाज को ठेकेदारों के माध्यम से राशन की दुकानों तक पहुंचाया जाता है। जिले में करीब 579 राशन वितरण की दुकानें हैं । ठेकेदारों की लापरवाही के चलते इन दुकानों पर समय पर राशन नहीं पहुंच पाता है। जिसका खामियाजा कार्ड धारकों को उठाना पड़ता है।
खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत इन लोगों को मिलता है राशन
ऐसे परिवार जिनमें कोई कैंसर या कुष्ठ रोग से पीड़ित है, अनाथ बच्चे, परित्यक्त्य महिलाएं, जूते- चप्पल की मरम्मत करने वाले, भिक्षावृत्ति करने वाले, फेरी लगाने वाले, गरीबी रेखा के नीचे के आवासहीन परिवार जिनकी वार्षिक आय 48 हजार रुपये से कम है, राशन कार्ड के लिये पात्र हैं
क्षेत्रीय खाद्य आपूर्ति अधिकारी अश्विनी कुमार का कहना है कि ठेकेदारों की लापवाही को उच्च अधिकारियों को सूचित कर दिया गया है। 25 मार्च तक दोनों राउंड को पूरा कर लिया जाएगा।
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