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Ghaziabad News: पुराने सेंटर पर ही शुरू होगी वाहनों की फिटनेस जांच
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गाजियाबाद। जिले में इलेक्टि्रक वाहनों की फिटनेस जांच जल्द ही शुरू हो जाएगी। मुख्यालय ने पुराने सेंटर के संचालक को ही इन वाहनों की फिटनेस जांच करने के आदेश जारी किए हैं। इसी के साथ पोर्टल को भी अपडेट कर दिया गया है।
लंबे समय से जिले में इलेक्टि्रक वाहनों के अलावा डंपर, क्रेन आदि विशेष श्रेणी के वाहनों की फिटनेस नहीं हो पा रही थी। ये लोग लगातार निराश होकर लौट रहे थे। इस मामले ने तब तूल पकड़ी जब नगर निगम की इलेक्टि्रक बसों की फिटनेस जांच नहीं हो सकी। इस प्रकरण में एआरएम की ओर से संभागीय परिवहन अधिकारी को पत्र लिखा तो सामने आया कि फिटनेस सेंटर पर मानक ही पूरे नहीं थे। हालत यह थी कि सेंटर पर 12,500 वाहनों की फिटनेस जांच नियम विरूद्ध कर दी गई। मुख्यालय ने सेंटर संचालक पर करीब 25 लाख का जुर्माना लगाया और मानकों को पूरा करने के फरवरी में आदेश जारी किए थे। तब तक इलेक्टि्रक व विशेष श्रेणी के वाहनों की फिटनेस जांच न करने के लिए मुख्यालय से सेंटर संचालक को कहा गया था। इस बारे में आरटीओ प्रमोद कुमार सिंह ने बताया कि मुख्यालय ने सेंटर के अधिकारों पर लगी रोक को हटाते हुए फिटनेस जांच शुरू कराने के आदेश जारी किए हैं। जल्द ही वहां फिटनेस जांच शुरू हो जाएगी।
ई-रिक्शा चालक सबसे ज्यादा परेशान : फिटनेस जांच न होने से ज्यादा परेशानी ई-रिक्शा चालकों को रही थी। जिले में 17 हजार ई-रिक्शा में से 10 हजार ई-रिक्शा की फिटनेस जांच छह माह पहले ही खत्म हो चुकी है। चेकिंग के दौरान ई-रिक्शा का चालान हो रहा था। उनको दोहरी मार झेलनी पड़ रही थी। चाहते हुए भी ये लोग फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं ले पा रहे थे। जबकि, व्यवसायिक वाहनों की फिटनेस जांच दो साल में खत्म हो जाती है।
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लंबे समय से जिले में इलेक्टि्रक वाहनों के अलावा डंपर, क्रेन आदि विशेष श्रेणी के वाहनों की फिटनेस नहीं हो पा रही थी। ये लोग लगातार निराश होकर लौट रहे थे। इस मामले ने तब तूल पकड़ी जब नगर निगम की इलेक्टि्रक बसों की फिटनेस जांच नहीं हो सकी। इस प्रकरण में एआरएम की ओर से संभागीय परिवहन अधिकारी को पत्र लिखा तो सामने आया कि फिटनेस सेंटर पर मानक ही पूरे नहीं थे। हालत यह थी कि सेंटर पर 12,500 वाहनों की फिटनेस जांच नियम विरूद्ध कर दी गई। मुख्यालय ने सेंटर संचालक पर करीब 25 लाख का जुर्माना लगाया और मानकों को पूरा करने के फरवरी में आदेश जारी किए थे। तब तक इलेक्टि्रक व विशेष श्रेणी के वाहनों की फिटनेस जांच न करने के लिए मुख्यालय से सेंटर संचालक को कहा गया था। इस बारे में आरटीओ प्रमोद कुमार सिंह ने बताया कि मुख्यालय ने सेंटर के अधिकारों पर लगी रोक को हटाते हुए फिटनेस जांच शुरू कराने के आदेश जारी किए हैं। जल्द ही वहां फिटनेस जांच शुरू हो जाएगी।
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ई-रिक्शा चालक सबसे ज्यादा परेशान : फिटनेस जांच न होने से ज्यादा परेशानी ई-रिक्शा चालकों को रही थी। जिले में 17 हजार ई-रिक्शा में से 10 हजार ई-रिक्शा की फिटनेस जांच छह माह पहले ही खत्म हो चुकी है। चेकिंग के दौरान ई-रिक्शा का चालान हो रहा था। उनको दोहरी मार झेलनी पड़ रही थी। चाहते हुए भी ये लोग फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं ले पा रहे थे। जबकि, व्यवसायिक वाहनों की फिटनेस जांच दो साल में खत्म हो जाती है।
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