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Ghaziabad News: हरीश को लेकर शाम तक हुई विशेषज्ञों की बैठक, आज शिफ्ट हो सकते हैं एम्स

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 14 Mar 2026 12:16 AM IST
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Experts held a meeting regarding Harish till evening, he may be shifted to AIIMS today
गाजियाबाद। 13 साल के संघर्ष के बाद सुप्रीम कोर्ट के इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) के फैसले के बाद शुक्रवार को एम्स में इस संबंध में बैठक हुई। शाम चार बजे तक बैठक चलने के कारण हरीश राणा को एम्स शिफ्ट नहीं किया जा सका। उन्हें शनिवार को एम्स लेकर जाया जा सकता है। दूसरी तरफ जिला प्रशासन की तरफ से हरीश के पिता अशोक राणा से संपर्क कर एंबुलेंस उपलब्ध कराने की जानकारी ली गई, हालांकि उन्होंने एम्स से टीम नहीं आने के चलते इससे इन्कार कर दिया। हालांकि प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम परिवार से संपर्क बनाए हुए है।
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हर हालात में हरीश के साथ खड़ा रहा परिवार

इस मामले में शनिवार को अमर उजाला की टीम अशोक राणा के घर पहुंची। जहां परिवार से बात के साथ हरीश की हालत की भी जानकारी दी गई। अशोक राणा ने बताया कि हरीश को सांस लेने, फीड कराने के साथ मल त्याग के लिए नली लगी हुई हैं। पूरा परिवार उनके साथ रहा है। अब इस घड़ी में उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि किस प्रकार से प्रतिक्रिया देनी है। कुछ भी हो उनका बेटा अब छोड़कर ही जा रहा है। राहत सिर्फ इतनी है कि उसे एक सम्मानजनक मृत्यु मिलेगी।
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लोग पूछते हैं कैसा लग रहा है

हरीश की मां निर्मला देवी ने बताया कि 13 साल के संघर्ष और अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद लोग पहुंचते हैं और पूछते हैं, आपको कैसा लग रहा है? हम जिन हालात से गुजरे और अब आगे जो भी होगा, उन हालात में एक माता-पिता क्या बोल सकते हैं। परिवार के तौर पर हम चाहते हैं कि हमें हमारे बेटे के साथ छोड़ दिया जाए। कोई सवाल न हो। जितना वक्त हम उसके साथ हैं, हमारी निजता का ध्यान रखा जाए, ताकि अंतिम समय में उसे अलविदा ठीक से कह सकें।
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छोटी तो कभी बड़ी नली लेकर आते थे लोग

अशोक राणा ने बताया कि 13 साल में उन्होंने जो देखा, वह किसी को देखने को न मिले। उन्होंने बताया कि नोएडा से कुछ समय के लिए फिजियोथेरेपिस्ट दिया गया था। 14 दिन आने के बाद वह लौटा नहीं। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने निजी स्तर पर थेरेपिस्ट तलाशने को कह दिया। उन्होंने कुछ प्राइवेट थेरेपिस्ट से बात की तो उन्होंने सरकार से रुपये नहीं मिलने की बात कर कार्य से ही इन्कार कर दिया। कुछ आते थे तो उसका कारण यहां कार्य कर लाइसेंस लेना होता था। यह भी उन्होंने बहुत सहा है। इसके अलावा कई बार इलाज के नाम पर हरीश के लिए आने वाली पाइप छोटी-बड़ी आ जाती थी। सवाल करने पर उनकी कीमत ज्यादा होने की बात कही जाती थी। इसके बाद वह खुद ही व्यवस्था करते रहे। इस समय उन्हें किसी से कोई शिकायत नहीं है। उनके भाग्य में जो लिखा था, उन्होंने वह देखा। अब बस बेटे को एक सम्मानजनक विदाई देना चाहते हैं।
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