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हॉट सिटी में कान 30 डेसिबल अधिक शोर झेल रहे
ब्यूरो , अमर उजाला साहिबाबाद
Updated Mon, 26 Jun 2017 11:18 PM IST
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हार्ट अटैक
- फोटो : NBC News
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हॉट सिटी में आपके कान मानक से 30 डेसिबल तक अधिक शोर झेल रहे हैं। यहां शोर 85 डेसिबल तक पहुंच गया है, जबकि 55 डेसिबल शोर को सामान्य माना जाता है। इसकी वजह से लोग सेंसरी न्यूरल हियरिंग लॉस के शिकार हो रहे हैं, इसके साथ ही तनाव, चिड़चिड़ाहट, मांसपेशियों में खिंचाव और सिरदर्द की केस भी सामने आ रहे हैं।
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वायु प्रदूषण तो हॉट सिटी झेल ही रहा था, अब ध्वनि प्रदूषण भी हालात बदतर कर रहा है। प्रदूषण के प्रति सजग हॉट सिटी के लोग एंड्रायड एप के माध्यम से अपने आसपास के ध्वनि प्रदूषण पर भी नजर रख रहे हैं। इसी एप के माध्यम से अमर उजाला ने भी ध्वनि प्रदूषण की पड़ताल की और आंकड़े चौंकाने वाले निकले।
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एप ‘साउंड डेसिबल मीटर’ के जरिए वैशाली व कौशांबी मेट्रो स्टेशन, कौशांबी बस स्टेशन और इंदिरापुरम का ध्वनि प्रदूषण मापा गया, इन स्थानों पर 65 से 80 डेसिबल तक शोर मिला। इन्हीं जगहों पर दोपहर 12 से दोपहर तीन बजे तक और शाम को पांच बजे से रात आठ बजे तक ध्वनि प्रदूषण का स्तर अधिक मिला।
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सभी जगहों पर 85 डेसिबल तक शोर सामने आया। पड़ताल में सामाने आया कि रात के शांत माहौल में भी शोर 65 डेसिबल तक रहता है, जो सामान्य से 10 डेसिबल अधिक है। लोगों के बीच ध्वनि प्रदूषण मापने का यह एप तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। वैशाली सेक्टर-5 निवासी मनीष सेन ने बताया कि ध्वनि प्रदूषण बढ़ता जा रहा है, सिर में दर्द रहने लगा है।
शक्तिखंड-3 निवासी नवीन मिश्रा ने बताया कि शोर की वजह से उनके एक कान में हियरिंग लॉस हो गया है।प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक गाजियाबाद का ध्वनि प्रदूषण 75.60 डेसिबल है, लेकिन हैरानी की है कि गाजियाबाद में ध्वनि प्रदूषण की नियमित जांच नहीं की जाती है, जिसके चलते ध्वनि प्रदूषण का कोई रियल टाइम डाटा ही उपलब्ध नहीं है।
ईएनटी स्पेशलिस्ट एंड हेड सर्जन डा. बीपी त्यागी ने बताया कि कान के विभिन्न रोगों से ग्रस्त हर 100 मरीजों में से 20 सेंसरी न्यूरल हियरिंग लॉस से ग्रस्त होते हैं। इतना अधिक शोर मस्तिष्क की आठवीं क्रेनिएल नर्व पर असर डालता है और समय बीतने के साथ कानों तक पहुंचने वाली आवाज की गुणवत्ता गिरती जाती है।
डा. एके गुप्ता ने बताया कि 100 डेसिबल के शोर में डेढ़ घंटे से अधिक रहना खतर से खाली नहीं है। लोगों में तनाव, तेज सिरदर्द, मांसपेशियों में जकड़न और चिड़चिड़ापन के मामले में भी बढ़े हैं।
ध्वनि प्रदूषण का स्तर
स्थान ध्वनि प्रदूषण
कौशांबी बस स्टेशन के पास 80 डेसिबल
वैशाली मेट्रो 65 से 70 डेसिबल
कौशांबी मेट्रो 70 से 75 डेसिबल
इंद्रापुरम 75 डेसिबल
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय प्रबंधक पारस नाथ ने बताया कि प्रदूषण को कम करने की दिशा में हरियाली बढ़ाने के लिए लोगों को प्रेरित किया जा रहा है, जिससे आवासीय क्षेत्रों में प्रदूषण में कमी आई। ध्वनि प्रदूषण कम करने के लिए प्रेशर हॉर्न पर पाबंदी और साउंड लेस जनरेटर लगाने पर जोर दिया जा रहा है।