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मंदिर और बाजार सजे, नवरात्र आज से
ब्यूरो,अमर उजाला गाजियाबाद
Updated Fri, 08 Apr 2016 12:57 AM IST
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मंदिर में भ्ाक्त
- फोटो : अमर उजाला
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वासंतिक नवरात्र शुक्रवार से शुरू हो रहा है। पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा होगी। तैयारियों को लेकर बाजारों में भी रौनक रही। माता की चुनरी से लेकर नारियल के साथ व्रत व पूजन की सामग्रियों की खरीदारी हुई।
उधर, मंदिरों में भी तैयारियां पूरी हो गईं हैं। दिल्ली गेट मंदिर, सिद्धपीठ प्रचंड देवी मंदिर डासना, गुफा वाले मंदिर और श्री मनन धाम मंदिर में माता के जागरण, बगलामुखी यज्ञ और विशेष पूजा-अर्चना होगी। पंडित दुलीदत्त कौशिक ने बताया कि नवरात्र शुक्रवार से शुरू हो रहा है और तृतीया तिथि का क्षय होने के कारण नवरात्र आठ दिनों का ही होगा।
घट स्थापना का मुहूर्त सुबह 7.58 से 9.54 तक
नवरात्र में घट स्थापन मुहूर्त अति महत्वपूर्ण होता है। नवरात्र पूजन के लिए घट स्थापन शुभ मुहूर्त में करने से पूरे वर्ष, हर क्षेत्र में, शुभ समाचार मिलते हैं। इस बार घट स्थापना का शुभ मुहूर्त प्रात: 7.58 से लेकर 9.54 बजे तक रहेगा। कलश स्थापना वृष लग्न में होगी।
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पंडित दुलीदत्त कौशिक ने बताया कि इस समय लाभ का चौघड़िया भी रहेगा इसलिए यह मुहूर्त अति शुभ रहेगा। नवरात्र पूजन करने वाले व्यक्ति को एक दिन पहले शाम से ही मां दुर्गा का स्मरण करते हुए उपवास प्रारंभ कर देना चाहिए। अगले दिन नवरात्र प्रतिपदा पर सूर्योदय से पूर्व ही स्नान आदि से निपटकर घट स्थापन करनी चाहिए।
हथेली में फूल, जल, सिक्का, रखकर अपनी मनोकामना बोलते हुए दुर्गा पूजन का संकल्प लेना चाहिए।
दिल्ली गेट देवी मंदिर में दूर-दूर से आते हैं भक्त
दिल्ली गेट देवी मंदिर में दूरदराज से भक्त पूजा करने आते हैं। नवरात्र में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है। यहां मेला भी लगता है। भक्तों में मान्यता है कि यहां परिक्रमा करने वालों की मनोकामना पूरी होती है। मंदिर के महंत परमानंद ने बताया कि यह मंदिर 500 वर्ष से अभी अधिक पुराना है।
महंत बताते हैं कि यहां रावण के पिता विश्वश्रवा ने पूजा की थी। मंदिर में बाला सुंदरी देवी, संतोषी मां, मीनाक्षी देवी, कादंबरी देवी, बड़ी माता के साथ-साथ राम परिवार, शंकर परिवार की मूर्तियां स्थापित हैं।
मंदिर में स्थापित है प्राचीन देवी की मूर्ति
लोग बताते हैं कि मंदिर स्थापना से पूर्व इस स्थान पर ऋषि मुनि तप किया करते थे। बाद में यह स्थान बड़े टीलों में तब्दील हो गया। वर्षों बाद खुदाई के दौरान देवी की मूर्ति मिली। जो आज भी मंदिर में स्थापित है।
नवरात्र में अष्टमी के दिन विशेष पूजा होती है और पंखा यात्रा निकाली जाती है। इसके बाद हवन और आरती की जाती है। आरती के बाद अष्टड्ढमी पर चढ़ावे के रूप में आने वाले धन को श्रद्धालुओं में बांट दिया जाता है जिसको खजाना लुटाना कहते हैं। अष्टमी के दिन मंदिर में मेला लगता है और नवमी के दिन विशाल भंडारा किया जाता है।
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उधर, मंदिरों में भी तैयारियां पूरी हो गईं हैं। दिल्ली गेट मंदिर, सिद्धपीठ प्रचंड देवी मंदिर डासना, गुफा वाले मंदिर और श्री मनन धाम मंदिर में माता के जागरण, बगलामुखी यज्ञ और विशेष पूजा-अर्चना होगी। पंडित दुलीदत्त कौशिक ने बताया कि नवरात्र शुक्रवार से शुरू हो रहा है और तृतीया तिथि का क्षय होने के कारण नवरात्र आठ दिनों का ही होगा।
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घट स्थापना का मुहूर्त सुबह 7.58 से 9.54 तक
नवरात्र में घट स्थापन मुहूर्त अति महत्वपूर्ण होता है। नवरात्र पूजन के लिए घट स्थापन शुभ मुहूर्त में करने से पूरे वर्ष, हर क्षेत्र में, शुभ समाचार मिलते हैं। इस बार घट स्थापना का शुभ मुहूर्त प्रात: 7.58 से लेकर 9.54 बजे तक रहेगा। कलश स्थापना वृष लग्न में होगी।
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पंडित दुलीदत्त कौशिक ने बताया कि इस समय लाभ का चौघड़िया भी रहेगा इसलिए यह मुहूर्त अति शुभ रहेगा। नवरात्र पूजन करने वाले व्यक्ति को एक दिन पहले शाम से ही मां दुर्गा का स्मरण करते हुए उपवास प्रारंभ कर देना चाहिए। अगले दिन नवरात्र प्रतिपदा पर सूर्योदय से पूर्व ही स्नान आदि से निपटकर घट स्थापन करनी चाहिए।
हथेली में फूल, जल, सिक्का, रखकर अपनी मनोकामना बोलते हुए दुर्गा पूजन का संकल्प लेना चाहिए।
दिल्ली गेट देवी मंदिर में दूर-दूर से आते हैं भक्त
दिल्ली गेट देवी मंदिर में दूरदराज से भक्त पूजा करने आते हैं। नवरात्र में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है। यहां मेला भी लगता है। भक्तों में मान्यता है कि यहां परिक्रमा करने वालों की मनोकामना पूरी होती है। मंदिर के महंत परमानंद ने बताया कि यह मंदिर 500 वर्ष से अभी अधिक पुराना है।
महंत बताते हैं कि यहां रावण के पिता विश्वश्रवा ने पूजा की थी। मंदिर में बाला सुंदरी देवी, संतोषी मां, मीनाक्षी देवी, कादंबरी देवी, बड़ी माता के साथ-साथ राम परिवार, शंकर परिवार की मूर्तियां स्थापित हैं।
मंदिर में स्थापित है प्राचीन देवी की मूर्ति
लोग बताते हैं कि मंदिर स्थापना से पूर्व इस स्थान पर ऋषि मुनि तप किया करते थे। बाद में यह स्थान बड़े टीलों में तब्दील हो गया। वर्षों बाद खुदाई के दौरान देवी की मूर्ति मिली। जो आज भी मंदिर में स्थापित है।
नवरात्र में अष्टमी के दिन विशेष पूजा होती है और पंखा यात्रा निकाली जाती है। इसके बाद हवन और आरती की जाती है। आरती के बाद अष्टड्ढमी पर चढ़ावे के रूप में आने वाले धन को श्रद्धालुओं में बांट दिया जाता है जिसको खजाना लुटाना कहते हैं। अष्टमी के दिन मंदिर में मेला लगता है और नवमी के दिन विशाल भंडारा किया जाता है।