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आय से अधिक संपत्ति का मामला: सीनियर पीसीएस अफसर बीएस ओझा के वारंट जारी

Thu, 04 Aug 2016 12:36 AM IST
ब्यूरो,अमर उजाला गाजियाबाद
ब्यूरो,अमर उजाला गाजियाबाद Updated Thu, 04 Aug 2016 12:36 AM IST
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Disproportionate assets case: PCS senior warrant officer BS Ojha
अदालत का फैसला
यूपी के एक और सीनियर पीसीएस अधिकारी भ्रष्टाचार के मामले में फंस गए हैं। सीबीआई को इनके पास से आय से अधिक संपत्ति मिली है। मामले की जांच के बाद सीबीआई ने गाजियाबाद कोर्ट में चार्जशीट भी पेश कर दी है।
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सम्मन तामील होने के बावजूद बुधवार को पेशी पर न आने के चलते कोर्ट ने आरोपी अफसर के खिलाफ वारंट जारी किए हैं। मूल रूप से प्रतापगढ़ के रहने वाले आरोपी अफसर बीएस ओझा गैस अथारिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (गेल) में भी प्रतिनियुक्ति पर रह चुके हैं।
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इस मामले की जांच देहरादून सीबीआई ने की थी। जांच में सीबीआई ने पाया कि आरोपी अफसर के पास आय से अधिक 3,90,92736 रुपये की रकम मिली। इस मामले में गाजियाबाद सीबीआई विशेष कोर्ट में सीबीआई ने चार्जशीट पेश कर दी थी।
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कोर्ट ने आरोपी के खिलाफ सम्मन भी जारी कर दिए थे। सीबीआई अधिकरियों की मानें तो आरोपी को सम्मन तामील भी करा दिए गए थे। इस मामले में आरोपी अफसर को 3 अगस्त को गाजियाबाद कोर्ट में पेश होना था, मगर वह पेशी पर नहीं आया। इस पर सीबीआई के विशेष न्यायाधीश एके झा ने आरोपी बीएस ओझा के खिलाफ वारंट जारी कर दिए।

हर्षवर्धन हत्याकांड में फरार आरोपी को भी उम्रकैद
 मोदीनगर में हुए डॉक्टर हर्षवर्धन हत्याकांड में फरार चल रहे तीसरे और मुख्य आरोपी पीयूष त्यागी को भी कोर्ट ने आजीवन कारावास और 51 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। इसके साथ ही कोर्ट ने पीयूष त्यागी को भगौड़ा घोषित कर दिया है।

इसी मामले में न्यायाधीश कमलेश कुमार ने मंगलवार को ही दो आरोपियों प्रमोद और प्रदीप को उम्रकैद और जुर्माने की सजा सुनाई थी। स्पेशल डीजीसी (पॉक्सो) रणवीर सिंह डागर ने बताया कि 353 सीआरपीसी की उपधारा 6 में यह प्राविधान है कि फरार चल रहे दोषी को उसके बिना पेश हुए भी सजा सुनाई जा सकती है।


इसी के चलते बुधवार को फास्ट ट्रैक कोर्ट न्यायाधीश कमलेश कुमार ने पीयूष को भी आजीवन कारावास के साथ ही 51 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुना दी। उन्होंने बताया कि मोदीनगर में हुए डा. हर्षवर्धन हत्याकांड का मुख्य आरोपी भी पीयूष त्यागी है। शनिवार को कोर्ट ने जब आरोपियों को दोषी करार दिया था, तभी पीयूष कोर्ट परिसर से ही फरार हो गया था।
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