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Ghaziabad News: टीओडी प्लान पर विकास ने पकड़ी रफ्तार, बिल्डरों ने शुरू किया काम
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साहिबाबाद। ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी) योजना के तहत वसुंधरा सेक्टर-7 में बिल्डरों ने काम शुरू कर दिया है। आवास विकास परिषद ने यहां 20-20 हजार वर्ग मीटर के तीन प्लॉट काटे हैं। तीनों प्लॉट के लिए अलग-अलग बिल्डरों ने परिषद में कुछ पैसा जमा करके बुकिंग लेनी भी शुरू कर दी है। इंदिरापुरम थाने के पीछे गगनचुंबी इमारतों के निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
इस योजना के अंतर्गत आरआरटीएस के 800 मीटर की दूरी पर मिश्रित भू योजना के तहत सोसायटी विकसित की जानी है। वसुंधरा सेक्टर-7 और 8 जनपद की पहली ऐसी जगह होगी जहां टीओडी के तहत सोसायटी विकसित की जानी है। वसुंधरा सेक्टर-7 में परिषद ने तीन प्लॉट काटे हैं, जो 20-20 हजार वर्गमीटर के हैं।
इस जमीन पर एम्स सेटेलाइट सेंटर के लिए भी करीब नौ हजार वर्ग मीटर जमीन परिषद ने आरक्षित की है। परिषद सेटेलाइट सेंटर की जमीन की कीमत शासन और एम्स प्रबंधन को पहले ही भेज चुकी है। अब इस पर एम्स प्रबंधन की टीम आगे काम करेगी।
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गगनचुंबी होंगी इमारतें : सेक्टर-7 में तीन अलग-अलग सोसायटी विकसित हो रही हैं, जिसमें चार से पांच टावर हैं। प्रत्येक टावर में 30 से 35 मंजिल तक की इमारत बनाई जा रही है। यहां व्यावसायिक दफ्तरों के साथ ही बाजार भी बनाया जाएगा। सोसायटी का नक्शा भी परिषद की टीम ही पास करेगी। इमारत में क्या सामग्री लगाई जा रही है, उसकी गुणवत्ता कैसी है, परिषद की क्वालिटी टीम की निगरानी में रहेगा।
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इस योजना के अंतर्गत आरआरटीएस के 800 मीटर की दूरी पर मिश्रित भू योजना के तहत सोसायटी विकसित की जानी है। वसुंधरा सेक्टर-7 और 8 जनपद की पहली ऐसी जगह होगी जहां टीओडी के तहत सोसायटी विकसित की जानी है। वसुंधरा सेक्टर-7 में परिषद ने तीन प्लॉट काटे हैं, जो 20-20 हजार वर्गमीटर के हैं।
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इस जमीन पर एम्स सेटेलाइट सेंटर के लिए भी करीब नौ हजार वर्ग मीटर जमीन परिषद ने आरक्षित की है। परिषद सेटेलाइट सेंटर की जमीन की कीमत शासन और एम्स प्रबंधन को पहले ही भेज चुकी है। अब इस पर एम्स प्रबंधन की टीम आगे काम करेगी।
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गगनचुंबी होंगी इमारतें : सेक्टर-7 में तीन अलग-अलग सोसायटी विकसित हो रही हैं, जिसमें चार से पांच टावर हैं। प्रत्येक टावर में 30 से 35 मंजिल तक की इमारत बनाई जा रही है। यहां व्यावसायिक दफ्तरों के साथ ही बाजार भी बनाया जाएगा। सोसायटी का नक्शा भी परिषद की टीम ही पास करेगी। इमारत में क्या सामग्री लगाई जा रही है, उसकी गुणवत्ता कैसी है, परिषद की क्वालिटी टीम की निगरानी में रहेगा।