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Ghaziabad News: करोड़ों के बजट के बावजूद कागजों में सिमटी योजना, सड़कों पर आवारा कुत्तों का खौफ

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 20 Oct 2026 01:32 AM IST
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Despite a multi-crore budget, the scheme remains confined to paper, while stray dogs pose a menace on the streets.
रजापुर में जमा लावारिस कुत्तों का झुंड। संवाद - फोटो : Archive
गाजियाबाद। सिहानी चुंगी के पास आवारा कुत्तों के हमले से स्कूटी सवार बुजुर्ग रमेश चंद वर्मा की मौत के बाद नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शहर की सड़कों पर करीब 60 हजार से अधिक आवारा कुत्ते घूम रहे हैं, लेकिन निगम प्रशासन की सुस्ती और ढुलमुल रवैये के कारण योजनाएं सिर्फ बैठकों और कागजों तक सीमित रह गई हैं।
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-करोड़ों रुपये पानी में, नसबंदी का काम पड़ा सुस्त :
नगर निगम कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने के लिए भारी-भरकम बजट खर्च कर रहा है। पिछले चार सालों में नसबंदी और टीकाकरण पर 1.80 करोड़ रुपये से अधिक पहले ही खर्च किए जा चुके हैं। इसके अलावा 1.10 करोड़ रुपये का टेंडर हाल ही में आवारा कुत्तों के विशेष टीकाकरण अभियान के लिए फिर से जारी किया गया है। वहीं 1.20 करोड़ रुपये का बजट माइक्रोचिप प्रोजेक्ट के लिए मंजूर किया गया है, ताकि कुत्तों की मॉनिटरिंग और डेटा ट्रैक किया जा सके। इतनी बड़ी रकम खर्च होने के बावजूद नगर निगम का दावा है कि अब तक केवल 60 प्रतिशत नसबंदी ही पूरी हो पाई है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि धरातल पर काम न होने से आक्रामक कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ रहा है।
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-कागजों में अटका शेल्टर होम और एबीसी केंद्र :
सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद लोनी के मेवला भटटी और अर्थला क्षेत्र में आवारा व आक्रामक कुत्तों को रखने के लिए शेल्टर होम बनाने की योजना बनी थी। इस प्रोजेक्ट में पांच हजार कुत्तों की क्षमता तय की गई थी, जिस पर प्रतिदिन भोजन और रख-रखाव पर पांच लाख रुपये (प्रति कुत्ता 100 रुपये प्रतिदिन) का खर्च अनुमानित किया गया है। सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर बनने वाले इस शेल्टर होम के लिए जमीन चिह्नित करने और सदन से मंजूरी की प्रक्रिया महीनों बाद भी अधर में लटकी हुई है। फिलहाल पूरा शहर महज दो एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) केंद्रों के भरोसे चल रहा है, जो 60 हजार कुत्तों की विशाल आबादी को नियंत्रित करने में पूरी तरह नाकाफी साबित हो रहे हैं। एबीसी में भी कुत्तों को सीमित अवधि तक ही रखने की व्यवस्था है।
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मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, नगर निगम गाजियाबाद डॉ. अनुज कुमार का कहना है कि कई वार्डों में कुत्तों के बंध्याकरण और टीकाकरण का काम 100 फीसदी पूरा कर लिया गया है। जन सहयोग से शेष वार्डों में भी यह काम चल रहा है। शेल्टर होम की दिशा में भी निगम लगातार काम कर रहा है।
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