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सीएम ऑफिस की भी नहीं सुनता नगर निगम
ब्यूरो, अमर उजाला /गाजियाबाद
Updated Sun, 27 Nov 2016 01:14 AM IST
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नगर निगम
- फोटो : अमर उजाला
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आम जनता की तो बात ही छोड़ो, नगर निगम में मुख्यमंत्री कार्यालय से आने वाली शिकायतें भी लंबित पड़ी हैं। शनिवार को डीएम ने सख्ती की तो अपर नगर आयुक्त डीके सिन्हा ने भी विभागाध्यक्षों के पेंच कसे। निगम अधिकारी दूसरे काम काज छोड़ दिनभर मुख्यमंत्री संदर्भ की शिकायतों को निस्तारण कराने में जुटे रहे।
दरअसल, आईजीआरएस (इंटीग्रेटेड ग्रीवांस रीड्रेसल सिस्टम) में मुख्यमंत्री, डीएम, तहसील दिवस और नगर निगम के अपने ग्रीवांस सिस्टम की शिकायतें आती हैं। इनकी मॉनीटरिंग नगर निगम के साथ-साथ डीएम, मंडलायुक्त और मुख्यमंत्री कार्यालय से की जाती है।
शिकायतों का निस्तारण होने के बाद ऑनलाइन सिस्टम पर संबंधित शिकायत के सामने ग्रीन सिग्नल दिखने लगता है। यानी लखनऊ में सीएम कार्यालय में बैठे अफसरों को भी दिखता रहता है कि किस विभाग में कितनी शिकायतें लंबित हैं।
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नगर निगम में आईजीआरएस पर जून से अब तक 1188 शिकायतें आई थीं, इनमें से 904 निस्तारित कर दी गई हैं, लेकिन 284 शिकायतें अभी तक अनिस्तारित हैं। इनमें निर्माण और स्वास्थ्य विभाग की शिकायतें सबसे ज्यादा हैं।
मुख्यमंत्री संदर्भ की शिकायतें समय पर निस्तारित न होने पर शनिवार को डीएम ने निगम अफसरों से नाराजगी जताई। इसके बाद अपर नगर आयुक्त डीके सिन्हा ने सभी विभागों के अधिकारियों के पेंच कसे तो वह शिकायतों का निस्तारण कराते नजर आए।
विवादित इंजीनियर ने ही बनाई थी पुलिया की फाइल
निगम में जिन इंजीनियर्स पर रमते राम रोड कामर्शियल कांप्लेक्स निर्माण में धांधली का आरोप है, उन्हीं ने एमपी नगर में पुलिया की फाइल बनाई थी। किसी भी काम के भुगतान से पहले भी संबंधित इंजीनियर की संस्तुति ली जाती है। ऐसे में अब यह मामला उजागर होने के बाद संबंधित इंजीनियर के अन्य काम भी संदेह के घेरे में आ गए हैं।
निगम सत्रों की मानें तो एक फाइल पर चार इंजीनियरों जेई, एई, अधिशासी अभियंता और मुख्य अभियंता के हस्ताक्षर होते हैं। पुलिया की फाइल में दो इंजीनियरों ने ही दो-दो पदों के हस्ताक्षर किए हुए हैं। यानी निर्माण कार्य स्वीकृति से ही गड़बड़ियां शुरू हो गई थीं।
अब महापौर अशु वर्मा ने इस पुलिया के अलावा शहर में पास हुईं अन्य पुलिया की फाइल भी तलब की हैं। हालांकि दो-दो फर्जीवाड़े सामने आने के बावजूद संबंधित इंजीनियरों पर कार्रवाई नहीं की जा रही है। नगर निगम में ही मामलों को दबा लिया जाता है। अब पुलिया के फर्जी भुगतान के मामले में महापौर शासन और मंडलायुक्त से शिकायत करने की तैयारी कर रहे हैं।
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दरअसल, आईजीआरएस (इंटीग्रेटेड ग्रीवांस रीड्रेसल सिस्टम) में मुख्यमंत्री, डीएम, तहसील दिवस और नगर निगम के अपने ग्रीवांस सिस्टम की शिकायतें आती हैं। इनकी मॉनीटरिंग नगर निगम के साथ-साथ डीएम, मंडलायुक्त और मुख्यमंत्री कार्यालय से की जाती है।
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शिकायतों का निस्तारण होने के बाद ऑनलाइन सिस्टम पर संबंधित शिकायत के सामने ग्रीन सिग्नल दिखने लगता है। यानी लखनऊ में सीएम कार्यालय में बैठे अफसरों को भी दिखता रहता है कि किस विभाग में कितनी शिकायतें लंबित हैं।
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नगर निगम में आईजीआरएस पर जून से अब तक 1188 शिकायतें आई थीं, इनमें से 904 निस्तारित कर दी गई हैं, लेकिन 284 शिकायतें अभी तक अनिस्तारित हैं। इनमें निर्माण और स्वास्थ्य विभाग की शिकायतें सबसे ज्यादा हैं।
मुख्यमंत्री संदर्भ की शिकायतें समय पर निस्तारित न होने पर शनिवार को डीएम ने निगम अफसरों से नाराजगी जताई। इसके बाद अपर नगर आयुक्त डीके सिन्हा ने सभी विभागों के अधिकारियों के पेंच कसे तो वह शिकायतों का निस्तारण कराते नजर आए।
विवादित इंजीनियर ने ही बनाई थी पुलिया की फाइल
निगम में जिन इंजीनियर्स पर रमते राम रोड कामर्शियल कांप्लेक्स निर्माण में धांधली का आरोप है, उन्हीं ने एमपी नगर में पुलिया की फाइल बनाई थी। किसी भी काम के भुगतान से पहले भी संबंधित इंजीनियर की संस्तुति ली जाती है। ऐसे में अब यह मामला उजागर होने के बाद संबंधित इंजीनियर के अन्य काम भी संदेह के घेरे में आ गए हैं।
निगम सत्रों की मानें तो एक फाइल पर चार इंजीनियरों जेई, एई, अधिशासी अभियंता और मुख्य अभियंता के हस्ताक्षर होते हैं। पुलिया की फाइल में दो इंजीनियरों ने ही दो-दो पदों के हस्ताक्षर किए हुए हैं। यानी निर्माण कार्य स्वीकृति से ही गड़बड़ियां शुरू हो गई थीं।
अब महापौर अशु वर्मा ने इस पुलिया के अलावा शहर में पास हुईं अन्य पुलिया की फाइल भी तलब की हैं। हालांकि दो-दो फर्जीवाड़े सामने आने के बावजूद संबंधित इंजीनियरों पर कार्रवाई नहीं की जा रही है। नगर निगम में ही मामलों को दबा लिया जाता है। अब पुलिया के फर्जी भुगतान के मामले में महापौर शासन और मंडलायुक्त से शिकायत करने की तैयारी कर रहे हैं।