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सीबीआई कोर्ट में ही चलेगा अंजू तिवारी का मुकदमा
ब्यूरो,अमर उजाला गाजियाबाद
Updated Fri, 29 Apr 2016 12:39 AM IST
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supreme court
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एनआरएचएम घोटाला प्रकरण में फंसी लखनऊ की एनजीओ संचालिका अंजू तिवारी की उस अर्जी को खारिज कर दिया, जिसमें उसने केस स्टे करने या फिर अन्य सक्षम न्यायालय में ट्रांसफर करने की मांग की थी।
एनआरएचएम योजना के तहत लखनऊ में ही ग्रामीण क्षेत्रों में टीकाकरण का कार्य एक एनजीओ को सौंपा गया था। इसके लिए एनजीओ को कुल 54 लाख का बजट जारी किया गया था। सीबीआई पड़ताल में एनजीओ द्वारा लगाए गए करीब 48 लाख के बिल फर्जी मिले थे।
पिछले दिनों एनजीओ संचालिका अंजू तिवारी ने कोर्ट में अर्जी देकर गुहार लगाई थी कि उसके केस की सुनवाई का अधिकार सीबीआई कोर्ट को नहीं है। इसमें दलील दी गई थी कि चूंकि उस पर सीबीआई ने सिर्फ आईपीसी की धाराएं लगाई हैं, ऐसे में उसका मामला या तो स्टे किया जाए या फिर किसी सक्षम न्यायालय में ट्रांसफर किया जाए।
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अर्जी के साथ ही एनजीओ संचालिका ने सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व आदेश का हवाला दिया था। आरोपी एनजीओ संचालिका की इस अर्जी पर सीबीआई के स्पेशल लोक अभियोजक वीके शर्मा ने विरोध जताया। बृहस्पतिवार को दोनों पक्षों की बहस पूरी होने पर विशेष न्यायाधीश जी. श्रीदेवी ने उक्त अर्जी को खारिज कर दिया।
दवा कारोबारी नरेश ग्रोवर समेत चार को मिली जमानत
एनआरएचएम घोटाले में विगत कई वर्षों से डासना जेल में बंद दिल्ली के दवा कारोबारी नरेश ग्रोवर, जल निगम के चीफ इंजीनियर पीके जैन, जल निगम की निर्माण इकाई के प्रोजक्ट मैनेजर बीएम श्रीवास्तव और लिपिक अरुण कुमार दीक्षित को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीबीआई विशेष न्यायाधीश जी. श्रीदेवी ने सभी आरोपियों को 50-50 हजार के दो जमानती पेश करने पर जमानत दे दी।
विशेष न्यायाधीश ने नरेश ग्रोवर, पीके जैन और बीएम श्रीवास्तव को 50-50 लाख रुपये कोर्ट में जमा कराने की शर्त पर जमानत दी है। नरेश ग्रोवर पर चूंकि एनआरएचएम के तीन मामले कोर्ट में विचाराधीन हैं, ऐसे में उन्हें कुल डेढ़ करोड़ रुपया कोर्ट में जमा कराना होगा। इसके अलावा लिपिक अरुण दीक्षित को कोर्ट 5 लाख रुपये जमा कराने के आदेश दिए हैं। यह रकम जमा कराने के लिए कोर्ट ने सभी को चार-चार सप्ताह का समय दिया है। जमानती पेश किए जाने के बाद कोर्ट ने चारों आरोपियों के रिहाई परवाने जारी कर दिए।
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एनआरएचएम योजना के तहत लखनऊ में ही ग्रामीण क्षेत्रों में टीकाकरण का कार्य एक एनजीओ को सौंपा गया था। इसके लिए एनजीओ को कुल 54 लाख का बजट जारी किया गया था। सीबीआई पड़ताल में एनजीओ द्वारा लगाए गए करीब 48 लाख के बिल फर्जी मिले थे।
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पिछले दिनों एनजीओ संचालिका अंजू तिवारी ने कोर्ट में अर्जी देकर गुहार लगाई थी कि उसके केस की सुनवाई का अधिकार सीबीआई कोर्ट को नहीं है। इसमें दलील दी गई थी कि चूंकि उस पर सीबीआई ने सिर्फ आईपीसी की धाराएं लगाई हैं, ऐसे में उसका मामला या तो स्टे किया जाए या फिर किसी सक्षम न्यायालय में ट्रांसफर किया जाए।
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अर्जी के साथ ही एनजीओ संचालिका ने सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व आदेश का हवाला दिया था। आरोपी एनजीओ संचालिका की इस अर्जी पर सीबीआई के स्पेशल लोक अभियोजक वीके शर्मा ने विरोध जताया। बृहस्पतिवार को दोनों पक्षों की बहस पूरी होने पर विशेष न्यायाधीश जी. श्रीदेवी ने उक्त अर्जी को खारिज कर दिया।
दवा कारोबारी नरेश ग्रोवर समेत चार को मिली जमानत
एनआरएचएम घोटाले में विगत कई वर्षों से डासना जेल में बंद दिल्ली के दवा कारोबारी नरेश ग्रोवर, जल निगम के चीफ इंजीनियर पीके जैन, जल निगम की निर्माण इकाई के प्रोजक्ट मैनेजर बीएम श्रीवास्तव और लिपिक अरुण कुमार दीक्षित को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीबीआई विशेष न्यायाधीश जी. श्रीदेवी ने सभी आरोपियों को 50-50 हजार के दो जमानती पेश करने पर जमानत दे दी।
विशेष न्यायाधीश ने नरेश ग्रोवर, पीके जैन और बीएम श्रीवास्तव को 50-50 लाख रुपये कोर्ट में जमा कराने की शर्त पर जमानत दी है। नरेश ग्रोवर पर चूंकि एनआरएचएम के तीन मामले कोर्ट में विचाराधीन हैं, ऐसे में उन्हें कुल डेढ़ करोड़ रुपया कोर्ट में जमा कराना होगा। इसके अलावा लिपिक अरुण दीक्षित को कोर्ट 5 लाख रुपये जमा कराने के आदेश दिए हैं। यह रकम जमा कराने के लिए कोर्ट ने सभी को चार-चार सप्ताह का समय दिया है। जमानती पेश किए जाने के बाद कोर्ट ने चारों आरोपियों के रिहाई परवाने जारी कर दिए।