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Ghaziabad News: तकनीकी अड़चन और कोर्ट के स्टे में फंसा पेंच, सीएक्यूएम ने अफसरों को किया तलब

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 20 Oct 2026 01:23 AM IST
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Caught in technical hurdles and a court stay, the CAQM has summoned officials.
गाजियाबाद। वाहन की प्रदूषण जांच (पीयूसीसी) की वैधता सुनिश्चित किए बिना पंपों पर पेट्रोल-डीजल और सीएनजी न दिए जाने के सरकारी आदेश को लागू हुए तीन सप्ताह बीतने को हैं लेकिन प्रशासनिक सख्ती के बावजूद जमीन पर इसका कोई असर नहीं दिख रहा है। हाईकोर्ट के स्टे और तकनीकी बाधाओं के चलते यह नियम फिलहाल कागजों तक ही सीमित होकर रह गया है, जिससे बढ़ते प्रदूषण के बीच अधिकारियों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं।
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-तकनीकी अड़चन और कोर्ट के स्टे से फंसा पेंच : नियम के हिसाब से वाहन चालकों को वैध प्रदूषण प्रमाणपत्र दिखाने के बाद ही ईंधन मिलना था। इसके लिए आपूर्ति विभाग की ओर से एक विशेष मोबाइल एप तैयार किया गया था। इसको 1300 से अधिक पंपकर्मियों के मोबाइल फोन में डाउनलोड कराया गया लेकिन तकनीकी खराबी के चलते यह एप अभी तक ठीक से काम नहीं कर पा रहा है। दूसरी ओर, पेट्रोल पंप स्वामियों पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर) कैमरे लगवाने के दबाव के खिलाफ पंप संचालकों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अदालत ने इस मामले में पंप स्वामियों के पक्ष में स्टे ऑर्डर जारी कर दिया है। हालांकि, अभी मामले की अगली तारीख तय नहीं हुई है लेकिन कोर्ट का स्टे आदेश पूरी तरह बरकरार है। इसके चलते अधिकारियों और पंप संचालकों के बीच गतिरोध बना हुआ है।
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-दिल्ली के मुकाबले पिछड़ रहे जिले : राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एएनपीआर कैमरों की मदद से स्वचालित तरीके से वाहनों की जांच के बाद ही ईंधन वितरित किया जा रहा है। इसके उलट, बुलंदशहर, बागपत सहित आसपास के जिलों में न तो कैमरे लगे हैं और न ही आपूर्ति विभाग का एप सुचारु रूप से चल पा रहा है। स्थिति यह है कि बिना किसी जांच के धड़ल्ले से वाहनों को ईंधन मिल रहा है।
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-सीएक्यूएम की सख्ती और अधिकारियों का पक्ष :
बढ़ते प्रदूषण को गंभीरता से लेते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने इस मामले में स्थानीय अधिकारियों को तलब किया है, जिससे प्रशासनिक अमले की बेचैनी बढ़ी हुई है। कोई ठोस समाधान न निकल पाने के कारण प्रदूषण नियंत्रण की यह मुहिम जिले में दम तोड़ती नजर आ रही है। जिला पूर्ति अधिकारी अमित तिवारी का कहना है कि एप फिलहाल तकनीकी कारणों से प्रभावित है लेकिन इसे दुरुस्त कराने के प्रयास जारी हैं। उन्होंने बताया कि पंप स्वामियों को निर्देशित किया गया है कि वे उपलब्ध माध्यमों से वाहनों की पीयूसीसी वैधता की जांच करने के बाद ही ईंधन उपलब्ध कराएं। वहीं, पेट्रोल पंप एसोसिएशन के महासचिव अभिषेक जैन का स्पष्ट करना है कि नियमों के मुताबिक पंप संचालकों को अपने खर्चे पर एएनपीआर कैमरे लगाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर अदालत से राहत मिली है और जब तक कोई अग्रिम न्यायिक निर्णय नहीं आता, तब तक जमीनी स्तर पर स्थिति यथावत बनी रहेगी।
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