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नोटबदी के 50 दिन: कैश का फ्लो लगा बढ़ने, हालात लगे सुधरने
ब्यूरो, अमर उजाला /गाजियाबाद
Updated Fri, 30 Dec 2016 12:04 AM IST
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बैंक के बाहर लगी भीड़
- फोटो : अमर उजाला
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नोटबंदी को 50 दिन बीत चुके हैं। अब स्थिति धीरे-धीरे बेहतर हो रही है। बैंकों के बाहर लाइनें छोटी होे गई हैं। बाजार में कैश फ्लो बढ़ रहा है। हालात में 40 से 50 प्रतिशत तक सुधार आ गया है। हालांकि स्थिति पूरी तरह सामान्य होने में तीन, चार सप्ताह और लगेंगे।
बैंक अधिकारियों की मानें तो जिन बैंकों का करेंसी चेस्ट दूसरे जनपदों में हैं, उन बैंकों को दिक्कत हो सकती है। ऐसे बैंक अपने ग्राहकों को पांच से 10 हजार ही दे पा रहे हैं। वहीं जिन बैंकों में कैश ज्यादा पहुंच रहा है, वह ग्राहकों को निर्धारित 24 हजार और करंट एकाउंट खाताधारकों को 50 हजार तक कैशदे रहे हैं।
पटरी पर आने लगा बाजार
बाजार भी संभल गया है। नोटबंदी के तुरंत बाद बाजार 80 से 90 प्रतिशत तक गिर गया था। लोगों के पास कैश नहीं था, जिस वजह से बाजार खाली पड़े थे। अब कैश आने पर लोग बाजार पहुंचकर अपनी जरूरतों का सामान खरीद रहे हैं। दूसरी ओर ज्यादातर दुकानदार भी स्वाइप मशीन व पेटीएम जैसे कैशलेस ट्रांजेक्शन को अपना रहे हैं। बैंकों में 14 हजार स्वाइप मशीन की डिमांड है।
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उद्योगों में हुआ सुधार लेकिन हालात सामान्य नहीं
बैंकों में कैश फ्लो बढ़ने पर उद्योगों ने भी गति पकड़ी है। हालांकि पूर्व की तरह हालात सामान्य नहीं हुए हैं। सूक्ष्म व लघु उद्योगों में कामकाज शुरू हो गया है। उद्यमी एनएन मिश्रा ने बताया कि करीब 30 से 40 प्रतिशत तक छोटे व मझौले उद्योगों में सुधार हुआ है।
श्रमिकों को कैश मिल रहा है। बाकी कामकाज चेक के जरिए किया जा रहा है। आईआईए के प्रदेश उपाध्यक्ष नीरज सिंघल का कहना है कि अब स्थिति कुछ बेहतर हुई है। हालांकि बैंकों में कैश फ्लो और ज्यादा होना चाहिए, ताकि उद्यमियों को ज्यादा से ज्यादा कैश मिल सके, जिससे वह जरूरी काम निपटाया जा सके।
- बोले लोग
- पहले अधिकांश लोग कैश का ज्यादा उपयोग करते थे। अब वही डेबिट या क्रेेडिट कार्ड का प्रयोग कर रहे हैं। शुरुआत में जो परेशानी झेलनी पड़ी, उतनी अब नहीं है।- हरेंद्र पाल सिंह, आर्य नगर
- किराना कारोबार में 50 प्रतिशत तक सुधार हुआ है। पहले छोटे व्यापारी गायब थे। अब मंडी में वह आने लगे हैं। नुकसान हुआ है, जिसकी भरपाई धीरे-धीरे ही होगी। - संजय गर्ग, किराना व्यापारी
- अब सब कामकाज चेक से हो गया है। छोटे व्यापारी ही कैश लेकर आते हैं। बैंकाें में भी स्थिति सुधरी है। कैश मिल रहा है, उसके लिए लाइन नहीं लगानी पड़ रही है। -विजय चौधरी, व्यापारी
- नोटबंदी के बाद अब स्थिति बेहतर है। वैसे लोगों को पूरा पैसा अभी भी नहीं मिल रहा है, लेकिन घर के कामकाज हो जा रहे हैं।-संतोष कुमारी, ग्रहिणी, रामनगर
- सरकार यदि बैंकों पर नकेल कसती तो हालात ज्यादा नहीं बिगड़ते। लोगों को मिलने वाले कैश को बैंक अधिकारियों ने काले धन को सफेद करने में लगा दिया। वैसे अब स्थिति ठीक है। - पारस अग्रवाल, व्यापारी
- अगले माह की सैलरी देने को बैंक तैयार
अगले माह की सैलरी व पेंशन देने के लिए बैंकों ने तैयारी कर ली है। एसबीआई के आरएम एसके गोयल के मुताबिक कैश ज्यादा मंगाया जाएगा। पेंशन व सैलरी धारक और अन्य ग्राहकों के लिए अलग-अलग काउंटर लगाए जाएंगे।
ताकि व्यवस्था नहीं बिगड़े। दूसरी ओर कुछ बैंकों में कैश ज्यादा नहीं आ रहा है। यूनियन बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, यूनाइटेड बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा समेत कई अन्य बैंकों में परेशानी हो सकती है।
- आज है पुराने नोट जमा कराने का अंतिम दिन
500 व 1000 के पुराने नोट जमा कराने का शुक्रवार को अंतिम दिन है। बैंक ग्राहक यदि शुक्रवार को नोट जमा नहीं कर पाए तो उन्हें बाद में परेशानी उठानी पड़ सकती है। आरबीआई के पूर्व के निर्देश के मुताबिक तय समय सीमा खत्म होने के बाद पुराने नोट सिर्फ आरबीआई या आरबीआई द्वारा चिन्हित सेंटरों पर ही जमा होंगे। उस वक्त ग्राहकों को स्पष्ट करना होगा कि ये नोट उनके पास कहां से आए।
किसान बोले - फैसला ठीक लेकिन सरकार की तैयारी थी अधूरी
प्रधानमंत्री के वादे के मुताबिक नोटबंदी के 50 दिन पूरे हो चुके हैं। नोटबंदी की परेशानी झेलने के बाद अब किसानों की मिलीजुली प्रक्रिया सामने आई है। किसानों का कहना है कि फैसला तो ठीक रहा लेकिन सरकारी की तैयारी अधूरी थी।
फफराना गांव के किसान नरेंद्र ने कहा कि शुरुआत में परेशानी हुई लेकिन अब पहले से काफी सुधार है। किसी बड़े काम पर थोड़ी परेशानी तो लाजिमी है। फसलों की बुवाई पर कैश की किल्लत का अधिक प्रभाव नहीं पड़ा।
कोल्हू संचालक हरशरण का कहना है कि किसान दो से तीन दिन के उधार पर गन्ना डालते रहे और उन्हें भुगतान भी किया जाता रहा, जिससे ज्यादा दिक्कत नहीं आई। जबकि जगतपुरी निवासी गुड़ विक्रेता तेजपाल सिंह ने कहा कि 50 दिन में तो उनका कारोबार ही चौपट हो गया है। गुड़ नहीं बिकने से परिवार के लालन-पालन की समस्या पैदा हो गई है। अभी भी कारोबार पटरी पर नहीं आया है।
गन्ना विकास समिति मोदीनगर के इंचार्ज सुभाष चंद ने बताया कि समिति से करीब 35 हजार किसान और करीब ढाई लाख परिवार जुड़े हैं। अधिकतर किसान समिति के गोदाम से ही खाद और बीज खरीदते हैं।
उन्होंने बताया कि नोटबंदी से दिक्कत जरूर हुई लेकिन बीते 15 दिन के दौरान किसानों की दिक्कतें कम हुईं हैं। अधिकांश किसान समिति से खाद और बीज उधार में ही खरीदते हैं, इसलिए गेहूं की बुवाई के लिए किसानों को कोई परेशानी नहीं हुई।
कलछीना निवासी किसान वारस और गांव दौसा निवासी किसान सुकरम पाल भी इसे मानते हैं लेकिन रोरी निवासी किसान जगमोहन और ईख की कटाई कर रहीं महिलाएं परेशानी कम होने की बात से सहमत नहीं हैं।
उनका कहना है कि नोटबंदी के फैसले ने किसानों को बर्बाद कर दिया है। तीन-तीन दिन तक लाइन में लगने के बाद भी सिर्फ दो हजार रुपये ही मिले, इतने में घर कहां चलता है। रालोद नेता रामानुज ने कहा कि 50 दिन पूरे होने के बावजूद किसानों की दिक्कतें दूर नहीं हुई हैं।
- कम मिला कैश, जिससे रही दिक्कत
बैंक मैनेजर केपी सिंह का कहना है कि उनके बैंक में किसानों के सबसे ज्यादा करीब छह हजार खाते हैं। पिछले पचास दिनों में एक से दो दिन के अंतराल में केवल आठ से दस लाख रुपये का कैश ही मिला। इतनी कम राशि से सभी किसानों को जरूरत भर का कैश दे पाना संभव नहीं था। इसी वजह से बैंक में सबसे ज्यादा हंगामे भी हुए।
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बैंक अधिकारियों की मानें तो जिन बैंकों का करेंसी चेस्ट दूसरे जनपदों में हैं, उन बैंकों को दिक्कत हो सकती है। ऐसे बैंक अपने ग्राहकों को पांच से 10 हजार ही दे पा रहे हैं। वहीं जिन बैंकों में कैश ज्यादा पहुंच रहा है, वह ग्राहकों को निर्धारित 24 हजार और करंट एकाउंट खाताधारकों को 50 हजार तक कैशदे रहे हैं।
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पटरी पर आने लगा बाजार
बाजार भी संभल गया है। नोटबंदी के तुरंत बाद बाजार 80 से 90 प्रतिशत तक गिर गया था। लोगों के पास कैश नहीं था, जिस वजह से बाजार खाली पड़े थे। अब कैश आने पर लोग बाजार पहुंचकर अपनी जरूरतों का सामान खरीद रहे हैं। दूसरी ओर ज्यादातर दुकानदार भी स्वाइप मशीन व पेटीएम जैसे कैशलेस ट्रांजेक्शन को अपना रहे हैं। बैंकों में 14 हजार स्वाइप मशीन की डिमांड है।
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उद्योगों में हुआ सुधार लेकिन हालात सामान्य नहीं
बैंकों में कैश फ्लो बढ़ने पर उद्योगों ने भी गति पकड़ी है। हालांकि पूर्व की तरह हालात सामान्य नहीं हुए हैं। सूक्ष्म व लघु उद्योगों में कामकाज शुरू हो गया है। उद्यमी एनएन मिश्रा ने बताया कि करीब 30 से 40 प्रतिशत तक छोटे व मझौले उद्योगों में सुधार हुआ है।
श्रमिकों को कैश मिल रहा है। बाकी कामकाज चेक के जरिए किया जा रहा है। आईआईए के प्रदेश उपाध्यक्ष नीरज सिंघल का कहना है कि अब स्थिति कुछ बेहतर हुई है। हालांकि बैंकों में कैश फ्लो और ज्यादा होना चाहिए, ताकि उद्यमियों को ज्यादा से ज्यादा कैश मिल सके, जिससे वह जरूरी काम निपटाया जा सके।
- बोले लोग
- पहले अधिकांश लोग कैश का ज्यादा उपयोग करते थे। अब वही डेबिट या क्रेेडिट कार्ड का प्रयोग कर रहे हैं। शुरुआत में जो परेशानी झेलनी पड़ी, उतनी अब नहीं है।- हरेंद्र पाल सिंह, आर्य नगर
- किराना कारोबार में 50 प्रतिशत तक सुधार हुआ है। पहले छोटे व्यापारी गायब थे। अब मंडी में वह आने लगे हैं। नुकसान हुआ है, जिसकी भरपाई धीरे-धीरे ही होगी। - संजय गर्ग, किराना व्यापारी
- अब सब कामकाज चेक से हो गया है। छोटे व्यापारी ही कैश लेकर आते हैं। बैंकाें में भी स्थिति सुधरी है। कैश मिल रहा है, उसके लिए लाइन नहीं लगानी पड़ रही है। -विजय चौधरी, व्यापारी
- नोटबंदी के बाद अब स्थिति बेहतर है। वैसे लोगों को पूरा पैसा अभी भी नहीं मिल रहा है, लेकिन घर के कामकाज हो जा रहे हैं।-संतोष कुमारी, ग्रहिणी, रामनगर
- सरकार यदि बैंकों पर नकेल कसती तो हालात ज्यादा नहीं बिगड़ते। लोगों को मिलने वाले कैश को बैंक अधिकारियों ने काले धन को सफेद करने में लगा दिया। वैसे अब स्थिति ठीक है। - पारस अग्रवाल, व्यापारी
- अगले माह की सैलरी देने को बैंक तैयार
अगले माह की सैलरी व पेंशन देने के लिए बैंकों ने तैयारी कर ली है। एसबीआई के आरएम एसके गोयल के मुताबिक कैश ज्यादा मंगाया जाएगा। पेंशन व सैलरी धारक और अन्य ग्राहकों के लिए अलग-अलग काउंटर लगाए जाएंगे।
ताकि व्यवस्था नहीं बिगड़े। दूसरी ओर कुछ बैंकों में कैश ज्यादा नहीं आ रहा है। यूनियन बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, यूनाइटेड बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा समेत कई अन्य बैंकों में परेशानी हो सकती है।
- आज है पुराने नोट जमा कराने का अंतिम दिन
500 व 1000 के पुराने नोट जमा कराने का शुक्रवार को अंतिम दिन है। बैंक ग्राहक यदि शुक्रवार को नोट जमा नहीं कर पाए तो उन्हें बाद में परेशानी उठानी पड़ सकती है। आरबीआई के पूर्व के निर्देश के मुताबिक तय समय सीमा खत्म होने के बाद पुराने नोट सिर्फ आरबीआई या आरबीआई द्वारा चिन्हित सेंटरों पर ही जमा होंगे। उस वक्त ग्राहकों को स्पष्ट करना होगा कि ये नोट उनके पास कहां से आए।
किसान बोले - फैसला ठीक लेकिन सरकार की तैयारी थी अधूरी
प्रधानमंत्री के वादे के मुताबिक नोटबंदी के 50 दिन पूरे हो चुके हैं। नोटबंदी की परेशानी झेलने के बाद अब किसानों की मिलीजुली प्रक्रिया सामने आई है। किसानों का कहना है कि फैसला तो ठीक रहा लेकिन सरकारी की तैयारी अधूरी थी।
फफराना गांव के किसान नरेंद्र ने कहा कि शुरुआत में परेशानी हुई लेकिन अब पहले से काफी सुधार है। किसी बड़े काम पर थोड़ी परेशानी तो लाजिमी है। फसलों की बुवाई पर कैश की किल्लत का अधिक प्रभाव नहीं पड़ा।
कोल्हू संचालक हरशरण का कहना है कि किसान दो से तीन दिन के उधार पर गन्ना डालते रहे और उन्हें भुगतान भी किया जाता रहा, जिससे ज्यादा दिक्कत नहीं आई। जबकि जगतपुरी निवासी गुड़ विक्रेता तेजपाल सिंह ने कहा कि 50 दिन में तो उनका कारोबार ही चौपट हो गया है। गुड़ नहीं बिकने से परिवार के लालन-पालन की समस्या पैदा हो गई है। अभी भी कारोबार पटरी पर नहीं आया है।
गन्ना विकास समिति मोदीनगर के इंचार्ज सुभाष चंद ने बताया कि समिति से करीब 35 हजार किसान और करीब ढाई लाख परिवार जुड़े हैं। अधिकतर किसान समिति के गोदाम से ही खाद और बीज खरीदते हैं।
उन्होंने बताया कि नोटबंदी से दिक्कत जरूर हुई लेकिन बीते 15 दिन के दौरान किसानों की दिक्कतें कम हुईं हैं। अधिकांश किसान समिति से खाद और बीज उधार में ही खरीदते हैं, इसलिए गेहूं की बुवाई के लिए किसानों को कोई परेशानी नहीं हुई।
कलछीना निवासी किसान वारस और गांव दौसा निवासी किसान सुकरम पाल भी इसे मानते हैं लेकिन रोरी निवासी किसान जगमोहन और ईख की कटाई कर रहीं महिलाएं परेशानी कम होने की बात से सहमत नहीं हैं।
उनका कहना है कि नोटबंदी के फैसले ने किसानों को बर्बाद कर दिया है। तीन-तीन दिन तक लाइन में लगने के बाद भी सिर्फ दो हजार रुपये ही मिले, इतने में घर कहां चलता है। रालोद नेता रामानुज ने कहा कि 50 दिन पूरे होने के बावजूद किसानों की दिक्कतें दूर नहीं हुई हैं।
- कम मिला कैश, जिससे रही दिक्कत
बैंक मैनेजर केपी सिंह का कहना है कि उनके बैंक में किसानों के सबसे ज्यादा करीब छह हजार खाते हैं। पिछले पचास दिनों में एक से दो दिन के अंतराल में केवल आठ से दस लाख रुपये का कैश ही मिला। इतनी कम राशि से सभी किसानों को जरूरत भर का कैश दे पाना संभव नहीं था। इसी वजह से बैंक में सबसे ज्यादा हंगामे भी हुए।