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छले गए केडीपी घरौंदा के खरीदार, पांच साल बीते, नहीं मिला आशियाना
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छले गए केडीपी घरौंदा के खरीदार, पांच साल बाद भी नहीं मिला आशियाना
गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन स्थित केडीपी एमजीआई घरौंदा में फ्लैट खरीदारों को बिल्डर ने खूब छला है। 2012 जनवरी में फ्लैट बुक कराने वाले खरीदारों को 36 माह में आशियाने की चाबी मिलनी थी, लेकिन पांच साल बीतने के बावजूद बिल्डर ने तय शर्तों के साथ खरीदारों को पजेशन नहीं दिया। खरीदारों ने बिल्डर पर तय संख्या से कम लिफ्ट लगाने, हरित क्षेत्र पर कब्जा करने और क्लब नहीं देने का आरोप लगाया है। बिल्डर द्वारा 266 की जगह 330 फ्लैट बनाने के कारण अब सोसाइटी में अतिरिक्त फ्लैटों के लिए पार्किंग तक नहीं है। जिला प्रशासन व जीडीए से राहत न मिलने पर अब खरीदारों ने हाईकोर्ट में आखिरी लड़ाई लड़ने का फैसला किया है।
केडीपी घरोंदा केफ्लैट खरीदारों ने बताया कि बिल्डर ने एग्रीमेंट में जनवरी 2015 में पजेशन देने की बात कही थी, लेकिन अब तक उन्हें तय सुविधाओं व शर्तों के साथ पजेशन नहीं दिया गया है। सोसाइटी में बिल्डर ने आठ लिफ्ट लगाने की बात कही थी, लेकिन केवल चार लिफ्ट हीं चल रहीं हैं। अग्निशमन विभाग से फायर सेफ्टी की एनओसी तक नहीं ली गई है। शासन व जीडीए के नियमों के तहत 15 फीसदी ग्रीन एरिया छोड़ना अनिवार्य है, लेकिन बिल्डर ने उस पर टावर खड़ा कर दिए है।
बिल्डर ने तय क्षमता से कम बिजली का लोड लिया है। अभी तक कंप्लीशन सर्टिफिकेट नहीं लिया है। धोखाधड़ी कर करीब 25 से 30 फैमिली को शिफ्ट कर दिया। मामले की शिकायत मेरठ में रजिस्ट्रार विभाग से करने पर बिल्डर पर 5.50 करोड़ की पेनाल्टी के साथ बाद में एफआईआर तक दर्ज हुई। मंत्री समूह की बैठक में मामला ले जाने के बाद भी उन्हें राहत नहीं मिली है।
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एनसीडीआरसी में केस दर्ज, नक्शे में क्लब नहीं
बिल्डर ने बीबीए में खरीदारों से क्लब देने की बात कही थी, लेकिन जीडीए में आरटीआई से अपील करने पर पता चला कि नक्शे में क्लब है ही नहीं। क्लब के लिए प्रति खरीदार से 36 हजार व सर्विस टैक्स वसूला किया। मामला उठाने पर एक कमरेमें क्लब खोल दिया है। खरीदारों ने बीबीए की शर्तों के अनुसार पजेशन, विधिक कार्रवाई में हुए खर्च और अतिरिक्त बैंक ब्याज का भुगतान करने की मांग को लेकर नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट रिड्रेसल कमीशन (एनसीडीआरसी) नई दिल्ली में मामला दर्ज कराया है। मामले में फैसला इसी साल आ जाएगा। मामले में रेरा, जीडीए व मंत्री समूह से राहत न मिलने पर इसी माह हाईकोर्ट में अपील करेंगे। शर्तें पूरी होने व कंम्पीशन सर्टिफिकेट लेने के बाद ही खरीदारों ने शिफ्ट करने की बात कही है।
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मंत्री समूह का दबाव काम न आया, 3000 फ्लैट खरीदार परेशान
फ्लैट खरीदारों की समस्याओं के लिए अगस्त 2017 में गठित मंत्री समूह का दबाव, एफआईआर और हर प्रयास बिल्डरों पर फेल साबित हुए हैं। तीन प्रोजेक्ट में 3000 फ्लैट के खरीदारों को अब तक पजेशन नहीं मिला है। इनमें राजनगर एक्सटेंशन स्थित मंजू जे होम्स में 786 आवंटियों, जीटी रोड अर्थला पर पार्श्वनाथ एक्जोटिका में 858 लोगों, एनएच-9 पर हिंडन नदी पुल से सटी रक्षा विज्ञान सहकारी समिति के प्रोजेक्ट में 1120 खरीदारों को अब तक पजेशन नहीं मिला है।
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गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन स्थित केडीपी एमजीआई घरौंदा में फ्लैट खरीदारों को बिल्डर ने खूब छला है। 2012 जनवरी में फ्लैट बुक कराने वाले खरीदारों को 36 माह में आशियाने की चाबी मिलनी थी, लेकिन पांच साल बीतने के बावजूद बिल्डर ने तय शर्तों के साथ खरीदारों को पजेशन नहीं दिया। खरीदारों ने बिल्डर पर तय संख्या से कम लिफ्ट लगाने, हरित क्षेत्र पर कब्जा करने और क्लब नहीं देने का आरोप लगाया है। बिल्डर द्वारा 266 की जगह 330 फ्लैट बनाने के कारण अब सोसाइटी में अतिरिक्त फ्लैटों के लिए पार्किंग तक नहीं है। जिला प्रशासन व जीडीए से राहत न मिलने पर अब खरीदारों ने हाईकोर्ट में आखिरी लड़ाई लड़ने का फैसला किया है।
केडीपी घरोंदा केफ्लैट खरीदारों ने बताया कि बिल्डर ने एग्रीमेंट में जनवरी 2015 में पजेशन देने की बात कही थी, लेकिन अब तक उन्हें तय सुविधाओं व शर्तों के साथ पजेशन नहीं दिया गया है। सोसाइटी में बिल्डर ने आठ लिफ्ट लगाने की बात कही थी, लेकिन केवल चार लिफ्ट हीं चल रहीं हैं। अग्निशमन विभाग से फायर सेफ्टी की एनओसी तक नहीं ली गई है। शासन व जीडीए के नियमों के तहत 15 फीसदी ग्रीन एरिया छोड़ना अनिवार्य है, लेकिन बिल्डर ने उस पर टावर खड़ा कर दिए है।
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बिल्डर ने तय क्षमता से कम बिजली का लोड लिया है। अभी तक कंप्लीशन सर्टिफिकेट नहीं लिया है। धोखाधड़ी कर करीब 25 से 30 फैमिली को शिफ्ट कर दिया। मामले की शिकायत मेरठ में रजिस्ट्रार विभाग से करने पर बिल्डर पर 5.50 करोड़ की पेनाल्टी के साथ बाद में एफआईआर तक दर्ज हुई। मंत्री समूह की बैठक में मामला ले जाने के बाद भी उन्हें राहत नहीं मिली है।
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एनसीडीआरसी में केस दर्ज, नक्शे में क्लब नहीं
बिल्डर ने बीबीए में खरीदारों से क्लब देने की बात कही थी, लेकिन जीडीए में आरटीआई से अपील करने पर पता चला कि नक्शे में क्लब है ही नहीं। क्लब के लिए प्रति खरीदार से 36 हजार व सर्विस टैक्स वसूला किया। मामला उठाने पर एक कमरेमें क्लब खोल दिया है। खरीदारों ने बीबीए की शर्तों के अनुसार पजेशन, विधिक कार्रवाई में हुए खर्च और अतिरिक्त बैंक ब्याज का भुगतान करने की मांग को लेकर नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट रिड्रेसल कमीशन (एनसीडीआरसी) नई दिल्ली में मामला दर्ज कराया है। मामले में फैसला इसी साल आ जाएगा। मामले में रेरा, जीडीए व मंत्री समूह से राहत न मिलने पर इसी माह हाईकोर्ट में अपील करेंगे। शर्तें पूरी होने व कंम्पीशन सर्टिफिकेट लेने के बाद ही खरीदारों ने शिफ्ट करने की बात कही है।
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मंत्री समूह का दबाव काम न आया, 3000 फ्लैट खरीदार परेशान
फ्लैट खरीदारों की समस्याओं के लिए अगस्त 2017 में गठित मंत्री समूह का दबाव, एफआईआर और हर प्रयास बिल्डरों पर फेल साबित हुए हैं। तीन प्रोजेक्ट में 3000 फ्लैट के खरीदारों को अब तक पजेशन नहीं मिला है। इनमें राजनगर एक्सटेंशन स्थित मंजू जे होम्स में 786 आवंटियों, जीटी रोड अर्थला पर पार्श्वनाथ एक्जोटिका में 858 लोगों, एनएच-9 पर हिंडन नदी पुल से सटी रक्षा विज्ञान सहकारी समिति के प्रोजेक्ट में 1120 खरीदारों को अब तक पजेशन नहीं मिला है।