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सबसे बड़ी विधानसभा में भाजपा की सबसे बड़ी जीत
अमर उजाला ब्यूरो, साहिबाबाद
Updated Sun, 12 Mar 2017 12:29 AM IST
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सुनील शर्मा
- फोटो : अमर उजाला
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देश की सबसे अधिक मतदाताओं वाली विधानसभा ने इस चुनाव में एक नया इतिहास रच दिया। साहिबाबाद से कांग्रेस-सपा गठबंधन प्रत्याशी को भाजपा प्रत्याशी सुनील शर्मा ने डेढ़ लाख से अधिक वोटों से हराकर रिकॉर्ड मतों से जीत दर्ज की।
मतगणना के तीसरे चरण के दौरान ही साफ हो गया कि मोदी लहर में सुनील शर्मा को खोड़ा जैसे पिछले इलाके से लेकर इंदिरापुरम की गगनचुंबी इमारत तक में रहने वाले लोगाें ने दिल खोलकर वोट किया।
विधानसभा साहिबाबाद में कुल 865641 वोटर पंजीकृत हैं। इनमें से 425000 लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। वर्ष 2012 में बसपा से चुनाव लड़कर विधायक बने अमरपाल शर्मा ने भाजपा से ही सुनील शर्मा को करीब 25 हजार वोटों से हराया था।
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इस बार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे अमरपाल से सुनील शर्मा की टक्कर कांटे की मानी जा रही थी। मगर चुनाव नतीजों ने सभी को आश्चर्य में डाल दिया। भाजपा प्रत्याशी सुनील शर्मा ने 262000 हजार मत प्राप्त करते हुए अमरपाल शर्मा को रिकॉर्ड 150685 मतों से हराया।
तेजी से विकसित होते साहिबाबाद विधानसभा में इंदिरापुरम में गगनचुंबी इमारतें हैं तो दूसरी ओर सबसे पिछले इलाकों में से एक खोड़ा। पहले राउंड की मतगणना में 3221 वोटों की बढ़त बनाने वाले सुनील शर्मा की बढ़त 30 राउंड खत्म होने के बाद डेढ़ लाख से भी ज्यादा की पहुंच गई।
मुस्लिम क्षेत्र से भी भाजपा विधायक को मिला वोट
सुनील शर्मा की जीत में साहिबाबाद के मुस्लिम बहुल इलाकों ने भी भूमिका निभाई। इसे मोदी लहर कहें या तीन तलाक के मुद्दे पर भाजपा का रवैया, मगर शहीदनगर, पसौंडा और महाराजपुर जैसे जिन मुस्लिम बहुल इलाकों में पिछली बार भाजपा का खाता भी नहीं खुला था। इस बार वहां से भी 25-30 फीसदी वोट भाजपा को मिली।
- इंदिरापुरम, वसुंधरा और वैशाली से मिले वोट से मिली जीत
2012 चुनाव तक वसुंधरा, वैशाली और इंदिरापुरम की हाईराइज सोसायटी का वोट प्रतिशत सिर्फ 15-20 तक ही रहता था। जबकि इस चुनाव में इंदिरापुरम में करीब 49, वसुंधरा में 51 और वैशाली में भी करीब 50 फीसदी वोटिंग हुई। तीनों कालोनियों में पढ़े लिखे वर्ग के लोगों की संख्या अधिक है। इन कालोनियों से सुनील शर्मा को एकतरफा वोट मिले। जो उनकी बड़ी जीत का कारण रहा।
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मतगणना के तीसरे चरण के दौरान ही साफ हो गया कि मोदी लहर में सुनील शर्मा को खोड़ा जैसे पिछले इलाके से लेकर इंदिरापुरम की गगनचुंबी इमारत तक में रहने वाले लोगाें ने दिल खोलकर वोट किया।
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विधानसभा साहिबाबाद में कुल 865641 वोटर पंजीकृत हैं। इनमें से 425000 लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। वर्ष 2012 में बसपा से चुनाव लड़कर विधायक बने अमरपाल शर्मा ने भाजपा से ही सुनील शर्मा को करीब 25 हजार वोटों से हराया था।
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इस बार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे अमरपाल से सुनील शर्मा की टक्कर कांटे की मानी जा रही थी। मगर चुनाव नतीजों ने सभी को आश्चर्य में डाल दिया। भाजपा प्रत्याशी सुनील शर्मा ने 262000 हजार मत प्राप्त करते हुए अमरपाल शर्मा को रिकॉर्ड 150685 मतों से हराया।
तेजी से विकसित होते साहिबाबाद विधानसभा में इंदिरापुरम में गगनचुंबी इमारतें हैं तो दूसरी ओर सबसे पिछले इलाकों में से एक खोड़ा। पहले राउंड की मतगणना में 3221 वोटों की बढ़त बनाने वाले सुनील शर्मा की बढ़त 30 राउंड खत्म होने के बाद डेढ़ लाख से भी ज्यादा की पहुंच गई।
मुस्लिम क्षेत्र से भी भाजपा विधायक को मिला वोट
सुनील शर्मा की जीत में साहिबाबाद के मुस्लिम बहुल इलाकों ने भी भूमिका निभाई। इसे मोदी लहर कहें या तीन तलाक के मुद्दे पर भाजपा का रवैया, मगर शहीदनगर, पसौंडा और महाराजपुर जैसे जिन मुस्लिम बहुल इलाकों में पिछली बार भाजपा का खाता भी नहीं खुला था। इस बार वहां से भी 25-30 फीसदी वोट भाजपा को मिली।
- इंदिरापुरम, वसुंधरा और वैशाली से मिले वोट से मिली जीत
2012 चुनाव तक वसुंधरा, वैशाली और इंदिरापुरम की हाईराइज सोसायटी का वोट प्रतिशत सिर्फ 15-20 तक ही रहता था। जबकि इस चुनाव में इंदिरापुरम में करीब 49, वसुंधरा में 51 और वैशाली में भी करीब 50 फीसदी वोटिंग हुई। तीनों कालोनियों में पढ़े लिखे वर्ग के लोगों की संख्या अधिक है। इन कालोनियों से सुनील शर्मा को एकतरफा वोट मिले। जो उनकी बड़ी जीत का कारण रहा।