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Ghaziabad News: नाबालिग को बहलाकर ले जाने के आरोपी को अग्रिम जमानत
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गाजियाबाद। मोदीनगर क्षेत्र में नाबालिग किशोरी को बहलाकर ले जाने और अन्य आरोपों के मामले में आरोपी नितिन कश्यप को अदालत से अग्रिम जमानत मिल गई। विशेष पॉक्सो न्यायाधीश एवं अपर सत्र न्यायाधीश नीरज गौतम की अदालत ने मामले के तथ्यों, परिस्थितियों और उपलब्ध रिकॉर्ड का परीक्षण करने के बाद यह आदेश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि अग्रिम जमानत देते समय मामले के गुण दोष पर कोई अंतिम राय व्यक्त नहीं की जा रही है।
अदालत से मिली जानकारी के अनुसार 19 अगस्त 2026 को किशोरी घर से चली गई थी। परिजनों ने पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि वह अपने साथ रुपये और सोने के आभूषण लेकर गई है। शिकायत में नितिन से फोन पर बातचीत होने का भी उल्लेख किया गया था। आरोपी की ओर से अदालत में दलील दी गई कि उसे झूठा फंसाया गया है। उसके खिलाफ कोई स्वतंत्र साक्ष्य नहीं है और उसके पास से कोई बरामदगी भी नहीं हुई है। बचाव पक्ष ने यह भी बताया कि आरोपी चाउमीन की ठेली लगाकर परिवार का पालन पोषण करता है। उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। अदालत से जांच में सहयोग करने का भरोसा भी दिलाया गया।
अभियोजन और पीड़िता की ओर से अग्रिम जमानत का विरोध किया गया। अदालत के समक्ष पीड़िता के अलग-अलग बयानों की जानकारी दी। अदालत ने पाया कि उसके बयानों में घटनाक्रम को लेकर कुछ विरोधाभासी कथन सामने आए हैं। अदालत ने यह भी देखा कि थाना स्तर की रिपोर्ट में आरोपी का कोई आपराधिक इतिहास दर्ज नहीं है। मामले की परिस्थितियों और अपराध की प्रकृति को देखते हुए अदालत ने आरोपी को अग्रिम जमानत देने का पर्याप्त आधार माना।
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अदालत से मिली जानकारी के अनुसार 19 अगस्त 2026 को किशोरी घर से चली गई थी। परिजनों ने पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि वह अपने साथ रुपये और सोने के आभूषण लेकर गई है। शिकायत में नितिन से फोन पर बातचीत होने का भी उल्लेख किया गया था। आरोपी की ओर से अदालत में दलील दी गई कि उसे झूठा फंसाया गया है। उसके खिलाफ कोई स्वतंत्र साक्ष्य नहीं है और उसके पास से कोई बरामदगी भी नहीं हुई है। बचाव पक्ष ने यह भी बताया कि आरोपी चाउमीन की ठेली लगाकर परिवार का पालन पोषण करता है। उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। अदालत से जांच में सहयोग करने का भरोसा भी दिलाया गया।
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अभियोजन और पीड़िता की ओर से अग्रिम जमानत का विरोध किया गया। अदालत के समक्ष पीड़िता के अलग-अलग बयानों की जानकारी दी। अदालत ने पाया कि उसके बयानों में घटनाक्रम को लेकर कुछ विरोधाभासी कथन सामने आए हैं। अदालत ने यह भी देखा कि थाना स्तर की रिपोर्ट में आरोपी का कोई आपराधिक इतिहास दर्ज नहीं है। मामले की परिस्थितियों और अपराध की प्रकृति को देखते हुए अदालत ने आरोपी को अग्रिम जमानत देने का पर्याप्त आधार माना।
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