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प्रदूषित हिंडन नदी अब बांट रहीं ‘जहर’
Updated Sat, 20 Jan 2018 01:53 AM IST
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प्रदूषित हिंडन नदी अब बांट रही ‘जहर’
गाजियाबाद/साहिबाबाद। गणतंत्र के 68 वर्षों के बाद भी तंत्र जिले के लोगों को शुद्ध पेयजल तक मुहैया नहीं करा पा रहा है। कभी गाजियाबाद के लिए जीवनदायिनी मानी जाने वाली हिंडन नदी ही अब ‘जहर’ बांट रही है। आलम यह है कि बिना शोधित किए पानी सीधे हिंडन नदी में डाला जा रहा। नालों और उद्योगों के पानी की वजह से नदी में खतरनाक रसायन घुल गया है, जो भूजल को भी प्रभावित कर रहा है। यही वजह है कि हिंडन के आसपास बसे गाजियाबाद जिले के 14 गांवों का पानी अब ‘जहरीला’ हो गया है।
भूजल में आर्सेनिक, फ्लोराइड की मात्रा बढ़ गई है। अब एनजीटी की फटकार के बाद जल निगम प्रभावित गांवों में पाइप लाइन से पानी पहुंचाने की तैयारी कर रहा है। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने हिंडन नदी को श्रेणी-ई में रखा है। यह नदी के जल प्रदूषण के पैमाने का अंतिम पड़ाव है। बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार हिंडन नदी के पानी में टोटल कोलीफॉर्म आर्गेनिज्म (टीसीओ) की मात्रा ज्यादा है। इसकी वजह से इसके पानी में टॉक्सिक हैवी मेटल बढ़ गए हैं। टॉक्सिक हैवी मेटल इतने खतरनाक हैं कि शरीर के अंग तक फेल हो सकते हैं।
खतरनाक स्तर प्रदूषित हो चुका नदी का पानी
जल बिरादरी के सर्वे के मुताबिक हिंडन में आक्सीजन की मात्रा शून्य हो गई है। टीसीओ ज्यादा होने से पानी बैक्टीरिया से भी संक्रमित है। फैक्ट्रियों का पानी छोड़े जाने की वजह से हिंडन के पानी में लेड, मरकरी, आर्सेनिक, कैडिमियम और क्रोमियम जैसे हेवी मेटल हैं। डा. रमेश त्रिपाठी ने बताया कि मरकरी बेहद ही खतरनाक है, इसके संपर्क में आने से त्चचा का रंग बदलने लगता है और पिंक डिसीज हो सकती है। हैवी मेटल के संपर्क में आने से शरीर के अंग प्रभावित होते हैं, कैंसर तक हो सकता है। उधर, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी अजय शर्मा ने बताया कि जो भी फैक्ट्री बिना ट्रीटमेंट के हिंडन में पानी डालती है, उस पर कार्रवाई की जाती है। बीते दिनों कई उद्योगों को नोटिस जारी किया गया है।
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हिंडन किनारे के गांवों का भूजल जहरीला
दोआबा पर्यावरण समिति नाम की एक सामाजिक संस्था ने भी पूरे वेस्ट यूपी में ग्राउंड वाटर प्रदूषित होने के संबंध में एनजीटी में याचिका दाखिल कर रखी है। संस्था ने 154 गांवों की सूची देकर ग्राउंड वाटर ‘जहरीला’ होने का दावा किया था। इस सूची में गाजियाबाद के कई गांव शामिल हैं। एनजीटी ने पूर्व में जल निगम से इस पर जवाब मांगा था। जल निगम ने रिपोर्ट के साथ इन गांवों में पानी सप्लाई के लिए एक्शन प्लान बनाने की जानकारी भी एनजीटी को दी थी।
इन 14 गांवों में प्रदूषित मिला पानी
नगला अटौर, मकरेड़ा, भनेड़ा खुर्द, राजपुर सरीफाबाद, सिरोरा, महमूदपुर, विहंग, मटौर, भदौली, नेकपुर-साबित नगर, सुराना, असालतपुर-फर्रुखनगर, सुठारी, नाहली
हेवी मेटल होती हैं ये बीमारियां
लेड और मरकरी : नर्वस सिस्टम यानी दिमाग पर असर करता है। ये दोनों हेवी मेटल इंसान की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर हमला करते हैं। लंबे समय तक संपर्क में रहने से कैंसर और अंग फेलियर की स्थिति बन सकती है। किडनी पर असर डालता है।
क्रोमियम: रेड ब्लड सेल्स पर हमला बोलता है, खून की कमी होने लगती है।
आर्सेनिक: डायरिया और डायबिटीज हो जाती है।
कैडिमियम: फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है और कैंसर हो सकता है।
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गाजियाबाद/साहिबाबाद। गणतंत्र के 68 वर्षों के बाद भी तंत्र जिले के लोगों को शुद्ध पेयजल तक मुहैया नहीं करा पा रहा है। कभी गाजियाबाद के लिए जीवनदायिनी मानी जाने वाली हिंडन नदी ही अब ‘जहर’ बांट रही है। आलम यह है कि बिना शोधित किए पानी सीधे हिंडन नदी में डाला जा रहा। नालों और उद्योगों के पानी की वजह से नदी में खतरनाक रसायन घुल गया है, जो भूजल को भी प्रभावित कर रहा है। यही वजह है कि हिंडन के आसपास बसे गाजियाबाद जिले के 14 गांवों का पानी अब ‘जहरीला’ हो गया है।
भूजल में आर्सेनिक, फ्लोराइड की मात्रा बढ़ गई है। अब एनजीटी की फटकार के बाद जल निगम प्रभावित गांवों में पाइप लाइन से पानी पहुंचाने की तैयारी कर रहा है। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने हिंडन नदी को श्रेणी-ई में रखा है। यह नदी के जल प्रदूषण के पैमाने का अंतिम पड़ाव है। बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार हिंडन नदी के पानी में टोटल कोलीफॉर्म आर्गेनिज्म (टीसीओ) की मात्रा ज्यादा है। इसकी वजह से इसके पानी में टॉक्सिक हैवी मेटल बढ़ गए हैं। टॉक्सिक हैवी मेटल इतने खतरनाक हैं कि शरीर के अंग तक फेल हो सकते हैं।
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खतरनाक स्तर प्रदूषित हो चुका नदी का पानी
जल बिरादरी के सर्वे के मुताबिक हिंडन में आक्सीजन की मात्रा शून्य हो गई है। टीसीओ ज्यादा होने से पानी बैक्टीरिया से भी संक्रमित है। फैक्ट्रियों का पानी छोड़े जाने की वजह से हिंडन के पानी में लेड, मरकरी, आर्सेनिक, कैडिमियम और क्रोमियम जैसे हेवी मेटल हैं। डा. रमेश त्रिपाठी ने बताया कि मरकरी बेहद ही खतरनाक है, इसके संपर्क में आने से त्चचा का रंग बदलने लगता है और पिंक डिसीज हो सकती है। हैवी मेटल के संपर्क में आने से शरीर के अंग प्रभावित होते हैं, कैंसर तक हो सकता है। उधर, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी अजय शर्मा ने बताया कि जो भी फैक्ट्री बिना ट्रीटमेंट के हिंडन में पानी डालती है, उस पर कार्रवाई की जाती है। बीते दिनों कई उद्योगों को नोटिस जारी किया गया है।
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हिंडन किनारे के गांवों का भूजल जहरीला
दोआबा पर्यावरण समिति नाम की एक सामाजिक संस्था ने भी पूरे वेस्ट यूपी में ग्राउंड वाटर प्रदूषित होने के संबंध में एनजीटी में याचिका दाखिल कर रखी है। संस्था ने 154 गांवों की सूची देकर ग्राउंड वाटर ‘जहरीला’ होने का दावा किया था। इस सूची में गाजियाबाद के कई गांव शामिल हैं। एनजीटी ने पूर्व में जल निगम से इस पर जवाब मांगा था। जल निगम ने रिपोर्ट के साथ इन गांवों में पानी सप्लाई के लिए एक्शन प्लान बनाने की जानकारी भी एनजीटी को दी थी।
इन 14 गांवों में प्रदूषित मिला पानी
नगला अटौर, मकरेड़ा, भनेड़ा खुर्द, राजपुर सरीफाबाद, सिरोरा, महमूदपुर, विहंग, मटौर, भदौली, नेकपुर-साबित नगर, सुराना, असालतपुर-फर्रुखनगर, सुठारी, नाहली
हेवी मेटल होती हैं ये बीमारियां
लेड और मरकरी : नर्वस सिस्टम यानी दिमाग पर असर करता है। ये दोनों हेवी मेटल इंसान की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर हमला करते हैं। लंबे समय तक संपर्क में रहने से कैंसर और अंग फेलियर की स्थिति बन सकती है। किडनी पर असर डालता है।
क्रोमियम: रेड ब्लड सेल्स पर हमला बोलता है, खून की कमी होने लगती है।
आर्सेनिक: डायरिया और डायबिटीज हो जाती है।
कैडिमियम: फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है और कैंसर हो सकता है।