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भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए-Cordination
Updated Thu, 01 Feb 2018 05:20 PM IST
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भूकंप के झटके महसूस किए, लोग घरों से निकले
नोएडा/गाजियाबाद।
बुधवार दोपहर 12:42 बजे एनसीआर में भूकंप के झटके महसूस किए गए। गाजियाबाद में हल्के झटके महसूस हुए। जबकि नोएडा में तेज झटके लगे। भूकंप के खौफ से ऊंची इमारतों में रहने वाले लोग घर से बाहर निकल आए। राजनगर एक्सटेंशन, क्रासिंग रिपब्लिक सहित साहिबाबाद स्थित ऊंची इमारतों में रहने वाले परिवारों में काफी देर हड़कंप मचा रहा। अधिकतर लोगों में यह अफवाह रही कि चंद्रग्रहण के कारण भूकंप आया है। अहम बात यह है कि दिल्ली नोएडा और गाजियाबाद का इलाका सिस्मिक जोन चार की श्रेणी में आने की वजह से संवेदनशील है।
एनसीआर सिस्मिक जोन चार में होने की वजह मध्यम से उच्च क्षमता का भूकंप आने से इस जोन में काफी नुकसान हो सकता है। भू-वैज्ञानिकों के मुताबिक, दिल्ली और इससे सटे इलाकों से कई फॉल्ट लाइनें गुजर रही हैं। इन फॉल्ट लाइनों में रिक्टर स्केल पर 6 या इससे ज्यादा भूकंप पैदा करने की क्षमता है। इमारतों को भूकंप से सुरक्षित बनाने के लिए दिल्ली एनसीआर में आमतौर पर रिक्टर स्केल मैग्निट्यूड 4.5 की तीव्रता का भूकंप झेलने के लिए तैयार किया जाता है। भूकंप का आभास होते ही लोग अपने-अपने घरों व दफ्तरों से बाहर निकल गए। डरे-सहमे लोग कुछ देर तक बाहर ही रहे। इसी बीच समाचार पत्रों पर भूकंप से संबंधित खबरें आने लगी। इसमें भूकंप की तीव्रता 6.2 बताई जा रही थी। एनसीआर में सबसे ज्यादा डर बिल्डर सोसाइटी में रहने वाले लोगों को था, क्योंकि ऊंची-ऊंची इमारतों में तेज झटके सहने की झमता नहीं है। हालांकि बिल्डर दावा करते हैं कि भूकंप झेलने की क्षमता है। उधर, इसका असर जम्मू- कश्मीर, दिल्ली- एनसीआर और पंजाब में दिखा। मौसम विभाग के सूत्रों के मुताबिक भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान बताया जा रहा है।
जापान की तर्ज पर बनाए जाएं घर
-जापान में बहुत ज्यादा तीव्रता वाले भूकंप के झटके आते रहते हैं। इमारतों को इससे बचाने के लिए बेस आइसोलेशन तकनीक अपनाई जाती है। बेस आइसोलेशन में तकनीक के जरिए धरातल और इमारत के बीच में घूमने वाले बियरिंग या पैड लगाए जाते हैं। ये आइसोलेटर काफी लचीले होते हैं। जब भूकंप आता है तो इसका असर इमारत पर नहीं आता। इसके अलावा इमारतों को सिस्मिक डैंपर्स लगाकर भूकंप के झटकों से बचाया जाता है। डैंपर्स लगाने से बिल्डिंग पर तेज भूकंप का असर नहीं होता है।
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उत्तरी हवाओं से फिर बदलेगा मौसम
गाजियाबाद। पश्चिमी विक्षोभ के जम्मू कश्मीर को क्रास करने के बाद उत्तरी हवा चलने से मौसम फिर करवट लेगा। बुधवार को अधिकतम तापमान सुबह 28 डिग्री सेल्सियस मापा गया। देर शाम को यह तापमान घटकर 18 डिग्री सेल्सियस रह गया। दिल्ली मौसम विभाग के निदेशक डॉक्टर रंजीत सिंह ने बताया 10 दिन पहले अफगानिस्तान से आए पश्चिमी विक्षोभ की वजह से बरसात के साथ हवा चलने पर सर्दी लौट आई थी। तापमान लगातार गिर रहा था, जिसकी वजह से सर्दी अचानक बढ़ गई थी, लेकिन पिछले चार दिन से फिर मौसम में गर्मी का अहसास होने लगा है। पश्चिमी विक्षोभ के जम्मू कश्मीर को क्रास करते ही एक-दो दिन में फिर से उत्तरी हवाएं चलने लगेंगी। इससे तापमान में गिरावट आने लगेगी। इसकी वजह से फिर मौसम थोड़ा सर्द हो जाएगा।
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नोएडा/गाजियाबाद।
बुधवार दोपहर 12:42 बजे एनसीआर में भूकंप के झटके महसूस किए गए। गाजियाबाद में हल्के झटके महसूस हुए। जबकि नोएडा में तेज झटके लगे। भूकंप के खौफ से ऊंची इमारतों में रहने वाले लोग घर से बाहर निकल आए। राजनगर एक्सटेंशन, क्रासिंग रिपब्लिक सहित साहिबाबाद स्थित ऊंची इमारतों में रहने वाले परिवारों में काफी देर हड़कंप मचा रहा। अधिकतर लोगों में यह अफवाह रही कि चंद्रग्रहण के कारण भूकंप आया है। अहम बात यह है कि दिल्ली नोएडा और गाजियाबाद का इलाका सिस्मिक जोन चार की श्रेणी में आने की वजह से संवेदनशील है।
एनसीआर सिस्मिक जोन चार में होने की वजह मध्यम से उच्च क्षमता का भूकंप आने से इस जोन में काफी नुकसान हो सकता है। भू-वैज्ञानिकों के मुताबिक, दिल्ली और इससे सटे इलाकों से कई फॉल्ट लाइनें गुजर रही हैं। इन फॉल्ट लाइनों में रिक्टर स्केल पर 6 या इससे ज्यादा भूकंप पैदा करने की क्षमता है। इमारतों को भूकंप से सुरक्षित बनाने के लिए दिल्ली एनसीआर में आमतौर पर रिक्टर स्केल मैग्निट्यूड 4.5 की तीव्रता का भूकंप झेलने के लिए तैयार किया जाता है। भूकंप का आभास होते ही लोग अपने-अपने घरों व दफ्तरों से बाहर निकल गए। डरे-सहमे लोग कुछ देर तक बाहर ही रहे। इसी बीच समाचार पत्रों पर भूकंप से संबंधित खबरें आने लगी। इसमें भूकंप की तीव्रता 6.2 बताई जा रही थी। एनसीआर में सबसे ज्यादा डर बिल्डर सोसाइटी में रहने वाले लोगों को था, क्योंकि ऊंची-ऊंची इमारतों में तेज झटके सहने की झमता नहीं है। हालांकि बिल्डर दावा करते हैं कि भूकंप झेलने की क्षमता है। उधर, इसका असर जम्मू- कश्मीर, दिल्ली- एनसीआर और पंजाब में दिखा। मौसम विभाग के सूत्रों के मुताबिक भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान बताया जा रहा है।
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जापान की तर्ज पर बनाए जाएं घर
-जापान में बहुत ज्यादा तीव्रता वाले भूकंप के झटके आते रहते हैं। इमारतों को इससे बचाने के लिए बेस आइसोलेशन तकनीक अपनाई जाती है। बेस आइसोलेशन में तकनीक के जरिए धरातल और इमारत के बीच में घूमने वाले बियरिंग या पैड लगाए जाते हैं। ये आइसोलेटर काफी लचीले होते हैं। जब भूकंप आता है तो इसका असर इमारत पर नहीं आता। इसके अलावा इमारतों को सिस्मिक डैंपर्स लगाकर भूकंप के झटकों से बचाया जाता है। डैंपर्स लगाने से बिल्डिंग पर तेज भूकंप का असर नहीं होता है।
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उत्तरी हवाओं से फिर बदलेगा मौसम
गाजियाबाद। पश्चिमी विक्षोभ के जम्मू कश्मीर को क्रास करने के बाद उत्तरी हवा चलने से मौसम फिर करवट लेगा। बुधवार को अधिकतम तापमान सुबह 28 डिग्री सेल्सियस मापा गया। देर शाम को यह तापमान घटकर 18 डिग्री सेल्सियस रह गया। दिल्ली मौसम विभाग के निदेशक डॉक्टर रंजीत सिंह ने बताया 10 दिन पहले अफगानिस्तान से आए पश्चिमी विक्षोभ की वजह से बरसात के साथ हवा चलने पर सर्दी लौट आई थी। तापमान लगातार गिर रहा था, जिसकी वजह से सर्दी अचानक बढ़ गई थी, लेकिन पिछले चार दिन से फिर मौसम में गर्मी का अहसास होने लगा है। पश्चिमी विक्षोभ के जम्मू कश्मीर को क्रास करते ही एक-दो दिन में फिर से उत्तरी हवाएं चलने लगेंगी। इससे तापमान में गिरावट आने लगेगी। इसकी वजह से फिर मौसम थोड़ा सर्द हो जाएगा।