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Ghaziabad News: शहर के 21 मॉल-रेस्टोरेंट के पास प्रदूषण की रोकथाम के नहीं उपाय, यूपीपीसीबी को एनजीटी ने भेजा नोटिस
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गाजियाबाद। शहर में संचालित 21 मॉल व रेस्टोरेंट के पास प्रदूषण की रोकथाम के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से बिना एनओसी के इनका संचालन हो रहा है। पर्यावरण कार्यकर्ता प्रसून पंत और प्रदीप डाहलिया की याविक पर एनजीटी ने मामले का संज्ञान लेते हुए यूपीपीसीबी को नोटिस जारी कर पूछा है कि शहर में और कितने ऐसे मॉल व रेस्टोरेट और हैं जिन्होंने एनओसी नहीं ली है। कोर्ट ने यूपीपीसीबी को एक महीने में जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। प्रदीप डहालिया ने आरटीआई के जरिए पीसीबी से जानकारी मांगी थी कि शहर में चल रहे होटलों, मॉल में जहां रसोई चलती है वहां ठोस अपशिष्ट के निस्तारण व जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण की रोकथाम के क्या इंतजाम हैं। प्रदीप का कहना है कि जवाब में पता चला कि 21 ने पीसीबी से एनओसी नहीं ली है। प्रदीप ने एनजीटी में याचिका दायर कर दी। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता रुचिन मेहरा ने बताया कि तीन मई को सुनवाई के बाद न्यायिक सदस्य, न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद की प्रधान पीठ ने पीसीबी को नोटिस भेजा है। याचिका में जिन बड़े टिकट वाले मॉल, होटल और बैंक्वेट हाल का नाम बताया गया है उनमें महागुन मेट्रो मॉल, शॉप्रिक्स मॉल, अंसल प्लाजा मॉल, जयपुरिया मॉल, आदित्य मॉल, ईडीएम मॉल, सिल्वर स्पून्स, गोल्डन ट्यूलिप, विंटेज बैंक्वेट्स, गैलेक्सी मॉल, होटल क्रिस्टल पैलेस, मुकुट रीजेंसी होटल, होटल आरके रेजीडेंसी, इरोस मॉल, क्लार्क्स इन, द वैशाली इन, बनाना ट्री होटल, होटल सनशाइन पार्क, हॉलीवुड ड्रीम्स, क्लार्क्स इन एप्पल ट्री और सिग्नेचर ग्लोबल मॉल हैं।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि 21 प्रतिष्ठान एक महीने में लगभग 30-40 लाख लोगों के आने का गवाह हैं, जो गाजियाबाद में हवा, पानी, शोर और अपशिष्ट उत्पादन सहित सभी प्रकार के प्रदूषण का कारण बन रहे हैं। उन्होंने याचिका में कहा कि एनओसी के बिना काम करने का मतलब जल (प्रदूषण रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम 1974 और वायु (प्रदूषण रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम 1981 के साथ-साथ अन्य पर्यावरणीय मानदंडों का उल्लंघन है। याचिकाकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि यूपीपीसीबी ने सीटीई के बिना इनमें से कई प्रतिष्ठानों को सीटीओ की अनुमति दी थी, जो पर्यावरणीय मानदंडों के खिलाफ है।
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याचिकाकर्ताओं का कहना है कि 21 प्रतिष्ठान एक महीने में लगभग 30-40 लाख लोगों के आने का गवाह हैं, जो गाजियाबाद में हवा, पानी, शोर और अपशिष्ट उत्पादन सहित सभी प्रकार के प्रदूषण का कारण बन रहे हैं। उन्होंने याचिका में कहा कि एनओसी के बिना काम करने का मतलब जल (प्रदूषण रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम 1974 और वायु (प्रदूषण रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम 1981 के साथ-साथ अन्य पर्यावरणीय मानदंडों का उल्लंघन है। याचिकाकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि यूपीपीसीबी ने सीटीई के बिना इनमें से कई प्रतिष्ठानों को सीटीओ की अनुमति दी थी, जो पर्यावरणीय मानदंडों के खिलाफ है।
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