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चूक और लापरवाही ने ले ली मायरा की जान
Updated Wed, 21 Feb 2018 05:24 PM IST
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चूक और लापरवाही ने ले ली मायरा की जान
गाजियाबाद/साहिबाबाद। 10वीं मंजिल से चार साल की मायरा का गिरना चूक और लापरवाही का नतीजा है। चूक परिजनों से हुई कि बालकनी का दरवाजा खुला रह गया। लापरवाही यह है कि बिल्डिंग में बालकनी के लिहाज से सुरक्षा के इंतजाम नहीं थे। वह इतनी ऊंची और ग्रिल से कवर नहीं थी कि हादसा को टाला जा सके। चिंता इस बात की है कि यह कहानी सिर्फ एक बिल्डिंग की नहीं है। बहुमंजिला इमारत कल्चर के बीच यह हादसा झकझोर देने के अलावा अलर्ट भी करता है। गाजियाबाद में सैकड़ों बहुमंजिला इमारत हैं। एकल परिवार होने की वजह से बच्चे घर में अकेले रहने की स्थिति बहुतों के साथ पैदा होती है।
पहचान के लिए कराना पड़ा एनाउंसमेंट
मायरा जब बालकनी से गिरी तो सोसायटी के लोग और सुरक्षाकर्मी उसे पहचान नहीं सके। 10 मिनट तक पता ही नहीं चला। बाद में मेंटीनेंस के लोगों ने एनाउंसमेंट कराया गया। एनाउसमेंट के जरिए बताया गया कि एफ ब्लॉक से एक बच्ची गिर गई है। जल्द ही बच्ची के माता पिता आएं। इस दौरान बच्ची का हुलिया भी बताया गया। मायरा की बहन परी भी घर पहुंच गई। उसे घर में मायरा नहीं मिली। बालकनी का दरवाजा खुला था। एनाउंसमेंट परी ने सुना था। उसने मम्मी-पापा को फोन किया। आनन-फानन में नेहा सोसायटी पहुंचीं। तब तक मायरा को अस्पताल ले गए थे। अस्पताल में नेहा को मायरा की मौत की सूचना मिली। पांच महीने पहले परिवार एफ ब्लॉक में शिफ्ट हुआ था।
बंद रहता था बालकनी का दरवाजा
परिजनों ने बताया कि मायरा और मनीष हमेशा ही बालकनी का दरवाजा बंद रखते थे। वह बच्चों को बालकनी में अकेले जाने से रोकते थे। बालकनी का दरवाजा चेक भी करते थे। सोमवार को बालकनी का दरवाजा खुला रह गया। दरवाजा खुला देखकर मायरा कुर्सी पर चढ़कर बालकनी से नीचे झांकने लगी।
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कंबल फिसलने की वजह से खोया संतुलन
सोसायटी के लोगों ने बताया बालकनी की दीवार पर कंबल रखा था। मायरा कुर्सी पर चढ़कर झांकने लगी तो कंबल नीचे की तरफ खिसक गया। इसकी वजह से मायरा का संतुलन बिगड़ा और वह बीम से टकराते हुए नीचे गिर गई। उसके सिर में गंभीर चोट आई।
लोगों का आरोप है बिल्डर ने ऊंची नहीं बनाई बालकनी
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि बिल्डर ने मानकों के अनुरूप बालकनी नहीं बनाई। सोसायटी के कई फ्लैट्स में बालकनी की दीवार को पांच फीट तक बनाया गया है। बालकनी की दीवार ऊंची बनी होने की वजह से नीचे दिखाई नहीं देता। इसकी वजह से बच्चे किसी चीज पर चढ़कर बालकनी से झांकते हैं। लोगों का कहना है कि बिल्डर को बालकनी में दीवार की जगह लोहे की ग्रील लगानी चाहिए थी। बालकनी में लोहे की ग्रिल होती और वह ग्रिल से कवर भी होती तो हादसा नहीं होता।
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गाजियाबाद/साहिबाबाद। 10वीं मंजिल से चार साल की मायरा का गिरना चूक और लापरवाही का नतीजा है। चूक परिजनों से हुई कि बालकनी का दरवाजा खुला रह गया। लापरवाही यह है कि बिल्डिंग में बालकनी के लिहाज से सुरक्षा के इंतजाम नहीं थे। वह इतनी ऊंची और ग्रिल से कवर नहीं थी कि हादसा को टाला जा सके। चिंता इस बात की है कि यह कहानी सिर्फ एक बिल्डिंग की नहीं है। बहुमंजिला इमारत कल्चर के बीच यह हादसा झकझोर देने के अलावा अलर्ट भी करता है। गाजियाबाद में सैकड़ों बहुमंजिला इमारत हैं। एकल परिवार होने की वजह से बच्चे घर में अकेले रहने की स्थिति बहुतों के साथ पैदा होती है।
पहचान के लिए कराना पड़ा एनाउंसमेंट
मायरा जब बालकनी से गिरी तो सोसायटी के लोग और सुरक्षाकर्मी उसे पहचान नहीं सके। 10 मिनट तक पता ही नहीं चला। बाद में मेंटीनेंस के लोगों ने एनाउंसमेंट कराया गया। एनाउसमेंट के जरिए बताया गया कि एफ ब्लॉक से एक बच्ची गिर गई है। जल्द ही बच्ची के माता पिता आएं। इस दौरान बच्ची का हुलिया भी बताया गया। मायरा की बहन परी भी घर पहुंच गई। उसे घर में मायरा नहीं मिली। बालकनी का दरवाजा खुला था। एनाउंसमेंट परी ने सुना था। उसने मम्मी-पापा को फोन किया। आनन-फानन में नेहा सोसायटी पहुंचीं। तब तक मायरा को अस्पताल ले गए थे। अस्पताल में नेहा को मायरा की मौत की सूचना मिली। पांच महीने पहले परिवार एफ ब्लॉक में शिफ्ट हुआ था।
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बंद रहता था बालकनी का दरवाजा
परिजनों ने बताया कि मायरा और मनीष हमेशा ही बालकनी का दरवाजा बंद रखते थे। वह बच्चों को बालकनी में अकेले जाने से रोकते थे। बालकनी का दरवाजा चेक भी करते थे। सोमवार को बालकनी का दरवाजा खुला रह गया। दरवाजा खुला देखकर मायरा कुर्सी पर चढ़कर बालकनी से नीचे झांकने लगी।
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कंबल फिसलने की वजह से खोया संतुलन
सोसायटी के लोगों ने बताया बालकनी की दीवार पर कंबल रखा था। मायरा कुर्सी पर चढ़कर झांकने लगी तो कंबल नीचे की तरफ खिसक गया। इसकी वजह से मायरा का संतुलन बिगड़ा और वह बीम से टकराते हुए नीचे गिर गई। उसके सिर में गंभीर चोट आई।
लोगों का आरोप है बिल्डर ने ऊंची नहीं बनाई बालकनी
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि बिल्डर ने मानकों के अनुरूप बालकनी नहीं बनाई। सोसायटी के कई फ्लैट्स में बालकनी की दीवार को पांच फीट तक बनाया गया है। बालकनी की दीवार ऊंची बनी होने की वजह से नीचे दिखाई नहीं देता। इसकी वजह से बच्चे किसी चीज पर चढ़कर बालकनी से झांकते हैं। लोगों का कहना है कि बिल्डर को बालकनी में दीवार की जगह लोहे की ग्रील लगानी चाहिए थी। बालकनी में लोहे की ग्रिल होती और वह ग्रिल से कवर भी होती तो हादसा नहीं होता।