बिजली की बर्बादी से आहत डीएम ने किया ऐसा काम, कर्मचारी बोले-गर्मी में ये क्या कर दिया..
- डीएम कार्यालय पहुंचे तो पहले से चलते मिले पंखे-एसी, जलती मिलीं लाइटें
- स्टाफ को दिया आदेश, जितनी देर पहले खोले, अब उतनी देर तक रखे जाएं बंद
-डीएम ने कहा, बिजली का दुरुपयोग देखा गया तो अर्थदंड लगाकर होगी वसूली
विस्तार
बिजली जाने पर अधिकारियों का पारा चढ़ जाने और कर्मचारियों पर कार्रवाई की खबरें अक्सर सुर्खियों में रहती हैं लेकिन गाजियाबाद के डीएम अजय शंकर पांडेय ने इससे इतर अनोखी नजीर पेश की है।
अपने कार्यालय में बिजली का दुरुपयोग देख डीएम इतने आहत हुए कि उन्होंने कार्यालय की सभी लाइटें, पंखे-एसी बंद करा दिए और गर्मी में बैठकर फरियादियों की समस्याएं सुनीं।
डीएम ने कर्मचारियों को निर्देश दिया कि उनके आने से पहले दफ्तर की लाइट व पंखे ऑन न किए जाएं। उन्होंने कहा कि यह सरकारी धन की बर्बादी है। यदि खाली कार्यालय में बिजली का दुरुपयोग पाया गया तो अर्थदंड लगाकर बिल की वसूली की जाएगी।
डीएम ने गुरुवार को कलक्ट्रेट परिसर स्थित कार्यालयों का निरीक्षण किया तो सारे पंखे व एसी चलते मिले। लाइटें भी जल रही थीं। डीएम ने स्वयं इन्हें बंद किया। इसके बाद ठीक 10 बजे वह अपने कार्यालय पहुंचे तो वहां पर भी लाइटें जल रही थीं। पंखे व एसी चल रहे थे।
पहले भी आरटीओ ऑफिस पर कर चुके हैं कार्रवाई
पहले से चल रहे उपकरणों को देखकर उन्होंने पूछा तो स्टाफ ने बताया कि 15 मिनट पहले ही पंखे व एसी चलाए हैं। इस पर डीएम ने कहा कि जितनी देर पहले चलाए हैं अब उतनी ही देर इसे बंद रखो। इसके बाद उन्होंने सारी लाइटें और पंखे-एसी बंद करा दिए। उन्होंने कार्यालय के सभी खिड़की दरवाजे खुलवाए और गर्मी में बैठकर फरियादियों की समस्याएं सुनीं।
ये पहला मामला नहीं है जब डीएम ने बिजली के दुरुपयोग पर नाराजगी जताई हो। इससे पहले डीएम ने आरटीओ, पीडब्ल्यूडी समेत कई दफ्तरों का निरीक्षण किया था। आरटीओ ऑफिस में बिजली का दुरुपयोग मिलने पर उन्होंने पूरे स्टाफ पर अर्थदंड लगाया था। यही नहीं, इससे पूर्व कलक्ट्रेट में पानी की बर्बादी पर डीएम ने स्वयं अपने ऊपर एक हजार रुपये का अर्थदंड लगाया था।