शातिर गिरोह: 50 से अधिक बैंकों से लोन लेकर की करोड़ों की ठगी, सरकारी विभाग का अधिकारी बताकर लगाते चूना
आरोपी फर्जी दस्तावेज के आधार पर लोन लेकर फरार हो जाते थे। इन लोगों ने एक बैंक से 30 लाख रुपये का लोन लिया था। उसकी शिकायत पर अपराध शाखा ने वर्ष 2022 में मुकदमा दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू की थी।
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खुद को सरकारी विभाग का अधिकारी बताकर 50 से अधिक बैंकों से लोन लेकर ठगी करने वाले एक गिरोह का दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने खुलासा किया है। पुलिस ने इस संबंध में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान विनय अग्रवाल, कुलदीप सिंह और सुनील कुमार के रूप में हुई है।
आरोपी फर्जी दस्तावेज के आधार पर लोन लेकर फरार हो जाते थे। इन लोगों ने एक बैंक से 30 लाख रुपये का लोन लिया था। उसकी शिकायत पर अपराध शाखा ने वर्ष 2022 में मुकदमा दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू की थी। पकड़े गए आरोपियों में कुलदीप और सुनील दोनों ग्रेजुएट हैं और पहले अलग-अलग बैंकों में नौकरी कर चुके हैं। उनको अच्छी तरह पता था कि बैंकों से कैसे ठगी की जा सकती है।
शुरुआती जांच के बाद पुलिस को पता चला कि इन लोगों ने 50 से ज्यादा बैंकों को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया है। पुलिस तीनों से पूछताछ कर छानबीन कर रही है। गैंग के बाकी आरोपियों की तलाश की जा रही है। पुलिस ठगी का शिकार हुए बाकी बैंकों से शिकायत लेकर कार्रवाई करने की तैयारी कर रही है। अपराध शाखा के पुलिस उपायुक्त सतीश कुमार ने बताया कि निजी बैंक बजाज फाइनेंस की ओर लोन के नाम पर 30 लाख रुपये की ठगी की शिकायत अपराध शाखा को मिली थी। पुलिस ने मामला दर्ज कर छानबीन शुरू की। जांच के लिए इंस्पेक्टर अक्षय, एसआई राहुल व अन्य की टीम का गठन किया गया।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि मनीष कुमार व अन्य ने सैलरी के आधार पर बैंक से लोन लिया था। लोन लेने के बाद जब उसकी किस्त अदा नहीं की गई तो ठगी का पता चला। पुलिस ने सीडीआर की पड़ताल कर एक नंबर की पहचान की। उसे कुलदीप सिंह इस्तेमाल कर रहा था। इसके अलावा बाकी आरोपियों की भी पहचान की हुई। पुलिस की टीम ने तीनों आरोपियों को दिल्ली के अलग-अलग इलाकों से दबोच लिया। आरोपियों ने बताया कि वह वर्ष 2019 से इसी तरह कई बैंकों से लोन लेकर ठगी कर रहे हैं। अब तक वह 50 से ज्यादा बैंकों से ठगी कर चुके हैं।
फर्जी कंपनियां बनाकर खोलते थे खाते
विभिन्न बैंकों को अपने जाल में फंसाने के लिए आरोपी फर्जी कंपनियां बनाते थे। इसके बाद आरोपी फर्जी तरीके से सैलरी के नाम पर कुछ रकम बैंक में कंपनी के नाम से ट्रांसफर करते थे। कुछ ही माह बाद बैंक सैलरी अकाउंट देखकर उस पर प्री-अप्रूव्ड पर्सनल लोन ऑफर कर दिया करता था। मौका मिलते ही आरोपी बैंक से लोन ले लिया करते थे।
इन लोगों ने ज्यादातर मामलों में फर्जी कंपनियां बनाकर ठगी की। बाकी कई मामलों में खुद को सरकारी अधिकारी बताकर भी इन लोगों ने बैंकों को नुकसान पहुंचाया। तीनों ही आरोपी विनय अग्रवाल, कुलदीप सिंह और सुनील कुमार किसी न किसी रूप से बैंकों में नौकरी कर चुके थे। उनको बैंकों की लोन प्रक्रिया की अच्छी तरह जानकारी थी। फर्जी कंपनियां बनाने के लिए पहले फर्जी आधार कार्ड और पैन कार्ड तैयार कर कंपनी का रजिस्ट्रेशन करवाकर उसके नाम परकरंट अकाउंट खोला जाता था। कंपनी में कई लोगों की नियुक्ति दिखाकर उनकी हर महीने सैलरी भेजी जाती थी। कुछ माह बाद बैंक सैलरी के आधार पर लोन देने का ऑफर दे दिया करते थे।
इसके बाद किसी भी अनजान व्यक्ति की फोटो चिपकाकर लोन के लिए बैंक में फर्जी कागजात के आधार पर आवेदन कर दिया जाता था। सैलरी के आधार पर बैंक भी आंख मूंदकर लोन अप्रूव कर दिया करते थे। लोन की रकम मिलते ही उसे अकाउंट से निकालकर आरोपी आपस में बांट लिया करते थे। इसी तरह इन लोगों ने तीन लाख से 30 लाख रुपये तक की कई बैंकों के साथ ठगी की है। पुलिस ने ठगी का शिकार हुए बैंकों से संपर्क किया है। शिकायतें मिलने के बाद पता चल पाएगा कि आरोपियों ने कितने की ठगी की है। हालांकि आशंका व्यक्त की जा रही है कि इन लोगों ने करोड़ों रुपये की ठगी की है।