ये NGO चला रहा था बच्चे बेचने का गोरखधंधा
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पुलिस ने एक ऐसे फर्जी एनजीओ का खुलासा किया है जो बच्चों की चोरी व अगवा करके निसंतान दंपति को लाखों रुपये में बेच देता था। इसके साथ ही एनजीओ, सरोगेसी से जन्म लिए बच्चे को भी मुहैया करवाने का दावा करता था।
पुलिस ने एक महिला समेत तीन लोगों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से दो साल के बच्चे को बरामद किया है। पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने अब तक 20 बच्चों को बेचा है, इसमें और लोगों की गिरफ्तारी हो सकती है।
दक्षिण पश्चिम जिला पुलिस उपायुक्त आरए संजीव ने बताया कि वीमेन एंड चाइल्ड डेवलपमेंट निदेशक की ओर से द्वारका नॉर्थ थाने में दर्ज शिकायत के मुताबिक द्वारका सेक्टर-16 में एक एनजीओ राष्ट्रीय जनहित जनसेवा संगठन चलाया जा रहा है।
पुलिस ने इस तरह बनाया एनजीओ को फांसने का प्लान
यह संगठन फर्जी तरीके से नवजात बच्चों को गोद देने की बात कहकर उन्हें लाखों रुपये में बेच रहा है। जांच में पुलिस ने पाया कि राष्ट्रीय जनहित जनसेवा संगठन नाम का कोई एनजीओ रजिस्टर्ड नहीं है और न ही वह सीएआरए (सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स एजेंसी) के गाइडलाइंस का ही पालन कर रहा है।
पुलिस ने इसका खुलासा करने के लिए रणनीति तैयार की। इसके तहत 4 जून को एक नकली दंपति को एनजीओ के पास भेजा। वहां मौजूद लोगों ने एक बच्चे के गोद लेने की कीमत 4.20 लाख रुपये बताई।
साथ ही दंपति से पंजीकरण के लिए आठ हजार रुपये लिए। आरोपियों ने बताया कि एनजीओ संचालक विनोद कुमार गोद लेने की प्रक्रिया के सभी कागजात उन्हें मुहैया करवा देगा। जिससे दंपति उसके असली माता पिता लगेंगे।
दो साल का बच्चा बेचते थे 5.50 लाख में
विनोद ने दंपति को 8 जून को बच्चा लेने के लिए बुलाया। उन लोगों ने कहा कि उनके पास एक नवजात और दो साल का बच्चा है। दो साल के बच्चे की कीमत 5.50 लाख है।
दंपति की सहमति से सौदा तय हो गया। पुलिस टीम ने वहां पहुंचकर गोयला डेयरी निवासी विनोद कुमार (42), माजरा पल्ला निवासी शिखा चौधरी (28) और गोयला डेयरी निवासी अनिल पांडे (27) को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस ने उनके कब्जे से बरामद दो साल के बच्चे को चाइल्ड होम भेज दिया। आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि वह तीन तरीके से बच्चों को लाकर निसंतान दंपति को मुहैया करवाते थे।
निसंतान दंपति को तीन तरह से मुहैया कराते थे बच्चे
आरोपियों ने बताया कि सबसे पहले बच्चों की चोरी करते थे, उसके बाद बच्चों को अगवा और फिर सरोगेसी के जरिये मुहैया करवाते थे।
उनके गिरोह के सदस्य अन्य राज्यों में सक्रिय हैं। पुलिस सूत्रों का कहना है कि सरोगेसी के लिए उन लोगों ने छोटे-छोटे नर्सिंग होम से संपर्क कर रखा है।
जिससे सरोगेट मदर से बच्चा पैदा होने पर उसे बेच देते थे। पुलिस का कहना है कि फिलहाल मामले की जांच की जा रही है और इसके बाद कई लोगों की गिरफ्तारी संभव है।