#Demonetization: जब पुराने नोट से नहीं मिला कफन, तो उधार लेने को हुए मजबूर
अंतिम संस्कार पर भी गहराया संकट
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श्मशान हो या कब्रिस्तान नोटबंदी का असर यहां भी दिख रहा है। हालत यह है कि एक शख्स के पास पुराने नोट थे जो बाजार में नहीं चल रहे थे। ऐसे में उसे उधार में कफन खरीदना पड़ा।
अंजुमन इस्लाहुल मुसलिमिन इंतजामिया कमेटी के अध्यक्ष मोहम्मद उमर फारूक ने बताया कि नोटबंदी की वजह से काफी दिक्कत आई है।
कब्रिस्तान में दफनाने से पहले परिजन को एक रसीद कटानी पड़ाती है, जिसे दफन रसीद कहते हैं। इसके लिए भी लोग पुराने नोट लेकर आ रहे हैं। अगर लोग पैसे का इंतजाम कर ले रहे हैं तो बेहतर है। अगर नए नोट का इंतजाम नहीं हो पा रहा है तो उन्हें उधार में ही रसीद दी जा रही है।
छोटे नोटों की इतनी किल्लत है कि सेक्टर-9 के एक शख्स को जब पुराने नोट से कफन नहीं मिला तो उसने उधार में लेकर काम चलाया। बाद में पैसे आने पर उसने दुकान पर आकर चुकता किया।
इसी तरह से सेक्टर-94 स्थित शवदाह गृह अंतिम निवास के संचालक महेश सक्सेना ने बताया कि उन्होंने अपने यहां पहले से ही चेक सिस्टम कर दिया है। अंतिम संस्कार के बाद जितना भी पैसा बनता हो उसका चेक देकर चुकता किया जा सकता है।
इसके अलावा वहां पुराने नोट भी लिए जा रहे हैं, लेकिन इसमें एक ही दिक्कत है कि फिर उन पुराने नोट को जमा करने के लिए रोज एक लड़के को बैंक की लाइन में लगने के लिए भेजा जाता है। अब यह रोजाना का काम हो गया है। इससे काफी परेशानी है। हालांकि, उन्होंने गरीबों की मदद के लिए पहले से ही घोषणा कर रखी है।