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ढाई साल पहले दुर्लभ सर्जरी से बचाई थी जान, अब फिर मिला नया जीवन

Tue, 05 Feb 2019 09:35 PM IST
शाहरुख खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली Published by: शाहरुख खान Updated Tue, 05 Feb 2019 09:35 PM IST
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Five year old child once again gave new life by Apollo hospital doctors
प्रतीकात्मक तस्वीर
करीब ढाई साल पहले दिल्ली के अपोलो अस्पताल में एक बच्चे का दुर्लभ इलाज करने के बाद जीवन बचाया गया था, लेकिन वापस घर जाने के चंद समय बाद ही शरीर में फैले संक्रमण ने बच्चे की सांसें खतरे में डाल दी। संक्रमण के चलते उसके दिल को रक्त की आपूर्ति नहीं हो पा रही थी। 
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दिल की जन्मजात बीमारी से पीड़ित इस पांच साल के बच्चे को एक बार फिर अपोलो अस्पताल के डॉक्टरों ने नया जीवन दिया है। डॉक्टरों का कहना है कि चूंकि ये केस पहले से ही काफी दुर्लभ था, इसलिए केस में चुनौतियों से इंकार नहीं किया जा सकता। घर जाने के बाद अचानक उसे तकलीफ शुरू हुई और जांच में संक्रमण की पुष्टि हुई।       
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दरअसल, म्यामांर निवासी पांच वर्षीय बच्चे मो के दिल में बड़ा छेद था। बाएं हिस्से का वॉल्व जन्म से ही लीक था। चिकित्सीय जांच के बाद करीब ढाई साल पहले ये बच्चा अपोलो अस्पताल आया था। 
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यहां डॉक्टरों ने कम उम्र और दुर्लभ चुनौतियों पर अध्ययन के बाद ऑपरेशन किया। डॉ. मुथू जोथी का कहना है कि उस वक्त उन्होंने ऑपरेशन के जरिये न सिर्फ दिल का छेद बंद किया था, बल्कि बायीं ओर के वॉल्व मिट्रल की मरम्मत भी की थी, ताकि उसका लीक होना बंद हो सके।  

दिल्ली आने के बाद मिली जटिल स्थिति

कुछ ही समय पहले इसी वॉल्व में बच्चे को संक्रमण हो गया। म्यांमार के डॉक्टरों से बातचीत के बाद कुछ दिन तक एंटीबॉयोटिक्स दवाओं पर रखा गया ताकि भारत आने तक उसे वक्त मिल सके।

दिल्ली अपोलो में दोबारा भर्ती होने के बाद डॉक्टरों ने ऑपरेशन के दौरान पाया कि उसके दिल का आकार काफी बढ़ गया है। मिट्रल वॉल्व पहले की तरह लीक हो रहा था। दायीं ओर ट्राइकस्पिड वॉल्व भी लीक होने लगता था। 

इस कारण खून फिर से बाएं वेंट्रिकल (मुख्य पंपिंग चेंबर) से बाएं एट्रियम में लौटने लगता है। इस कारण फेफड़ों पर प्रेशर बढ़ रहा था, जो लगभग शरीर के प्रेशर के बराबर था। 

इन वॉल्व को बदलने के अलावा डॉक्टरों के पास अन्य कोई विकल्प नहीं बचा था। दिल का आकार बढ़ने से बच्चे की छाती चिपक गई थी। इसे खोलने के लिए ही डॉक्टरों को करीब 2 घंटे का वक्त लग गया।       
 

फिलहाल बच्चा है स्वस्थ    

 डॉ. मुथू जोथी का कहना है फिलहाल बच्चे की हालत पहले से बेहतर है। वह ठीक से खा रहा है। बच्चे को अगले छह महीने तक दवाओं पर रखा जाएगा। साथ ही नियमित रूप से उसका ईको किया जाएगा।    
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