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13 बार मौत को दिया मात, अब हुआ दिल का इलाज

Tue, 24 Jul 2018 11:14 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 24 Jul 2018 11:14 PM IST
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first time in India 71 year old patients were engaged in LVAD machine
71 year old patients
किसी व्यक्ति को दिल का दौरा पड़ा हो और उसका शरीर प्रत्यारोपण के लिए तैयार न हो तो ऐसे मरीजों का भी अब उपचार संभव है। दिल्ली के मैक्स अस्पताल ने 13 बार मौत को मात दे चुके मशीन मैन के दिल का सफल प्रत्यारोपण कर दिया है। मंगलवार को प्रेस कान्फ्रेंस में साकेत स्थित मैक्स अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि 41 वर्षीय मरीज शुभांकर धर चौधरी फरवरी 2015 में सांस फूलने की शिकायत को लेकर अस्पताल में भर्ती हुए थे। 
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कुछ ही दिनों में हालत इस कदर दयनीय हो गई कि उन्हें वेंटिलेटर पर रखना पड़ा। मल्टी ऑर्गन फेलियर की शिकायत मिली। दिल का प्रत्यारोपण जरूरी हो गया था, लेकिन मरीज की शारीरिक क्षमता कमजोर होने से यह काम चुनौती बन गय था।
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बाद में डॉक्टरों ने वेंटिक्यूलर एसिस्ट डिवाइस (एलवीएडी) लगाकर उन्हें हार्ट की सर्जरी कुछ समय के लिए टाल दी। डॉक्टरों का कहना है कि शुभांकर तीन वर्षों में कई बार मौत की दहलीज तक पहुंचे, लेकिन हर बार उन्हें बचा लिया गया। 
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मैक्स अस्पताल के डॉ. रजनीश मल्होत्रा बताते हैं कि एलवीएडी मशीन दिल के किसी एक चैंबर में लगाई जाती है, जो बैटरी से संचालित होती है। इसे लगाने के बाद व्यक्ति एक तरह से मशीन मैन कहलाता है। शुभांकर का हार्ट का प्रत्यारोपण करना ही था, इसीलिए डोनर मिलने के बाद हाल ही में डॉक्टरों ने इस सर्जरी को सफलता पूर्वक पूरा कर लिया।
     
वरिष्ठ डॉ. केवल कृष्ण बताते है कि देश में हार्ट फेलियर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इसकी अपेक्षा डोनर कम मिल रहे हैं। ऐसे में एलवीएडी डिवाइस वारदात साबित हो रही है। उनका कहना था कि वर्ष 2016 में सबसे पहले 71 वर्षीय मरीज आरपी गर्ग को देश में पहली बार एलवीएडी हार्ट मेट थ्री इम्प्लांट किया गया था।

दो वर्ष पूरे होने के बाद भी गर्ग स्वस्थ हैं। डॉ. रजनीश मल्होत्रा ने बताया कि इस समय युवाओं में शराब, धूम्रपान, अनियमित जीवनशैली रक्त धमनियों में अवरोध पैदा कर रही है। इसका परिणाम यह होता है कि मरीज को सीधे एंजियोप्लास्टि, ओपन हार्ट सर्जरी या फिर ह्दय प्रत्यारोपण ही विकल्प बचते हैं।       

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