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प्रदूषण बना सांस की नलियों का दुश्मन: बुखार ठीक फिर भी खांसी बरकरार; सही होने के बाद भी हफ्तों तक खांस रहे लोग

Thu, 29 Oct 2026 05:27 PM IST
Akash Dubey अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: Akash Dubey Updated Thu, 29 Oct 2026 05:27 PM IST
सार

संक्रमण के बाद लंबे समय तक खांसी रहने पर एंटीबायोटिक दवाएं अक्सर बेअसर होती हैं। डॉक्टरों के अनुसार, दिल्ली का बढ़ता वायु प्रदूषण इस परेशानी को और बढ़ा रहा है। 

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Fever has subsided but cough persists
संक्रमण ठीक होने के बाद भी नहीं जा रही खांसी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बुखार चला गया, गले की खराश भी ठीक हो गई, लेकिन खांसी है कि पीछा छोड़ने का नाम ही नहीं ले रही। बोलने लगते हैं तो खांसी शुरू हो जाती है और कई बार आवाज भी बैठ जाती है। अगर आप भी ऐसी परेशानी से जूझ रहे हैं, तो हर बार एंटीबायोटिक दवा लेना इसका हल नहीं है। डॉक्टरों के अनुसार, संक्रमण ठीक होने के बाद भी सांस की नलियों में सूजन और संवेदनशीलता बनी रह सकती है। दिल्ली में बढ़ता वायु प्रदूषण इस परेशानी को और बढ़ा सकता है। ऐसे में खांसी की असली वजह जानना और सही इलाज कराना जरूरी है।

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इन दिनों डॉक्टरों के पास ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं, जिन्हें कई सप्ताह या महीनों से खांसी है। खास बात यह है कि इनमें से कई लोगों को बुखार या वजन घटने जैसे दूसरे लक्षण नहीं हैं। पल्मोनरी, क्रिटिकल केयर और स्लीप मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. जीसी खिलनानी के अनुसार, संक्रमण ठीक होने के बाद भी सांस की नलियों को सामान्य होने में समय लग सकता है। इस दौरान धूल, धुआं और प्रदूषण खांसी को बढ़ा सकते हैं।

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हर खांसी में एंटीबायोटिक कारगर नहीं
डॉक्टरों के अनुसार, एंटीबायोटिक दवाएं बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमण के खिलाफ काम करती हैं। वायरल संक्रमण या सांस की नलियों में बची सूजन के कारण होने वाली खांसी में इनसे फायदा नहीं होता। इसके बावजूद बार-बार एंटीबायोटिक लेने से बचना चाहिए। दवा का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह पर ही करना चाहिए। उनके अनुसार, लंबे समय तक खांसी रहने के पीछे अस्थमा, एलर्जी, टीबी, सीओपीडी और एसिड रिफ्लक्स जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। इसलिए केवल बुखार न होने के आधार पर यह मान लेना सही नहीं है कि सांस से जुड़ी कोई बीमारी नहीं है।

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बोलते ही क्यों शुरू हो जाती है खांसी?
रेस्पिरेटरी मेडिसिन के डॉ. अनिमेष आर्य के अनुसार, लगातार खांसी के कारण गले और स्वर यंत्र में जलन हो सकती है। इससे खांसी का रिफ्लेक्स अधिक संवेदनशील हो जाता है। बोलते समय खांसी आना या आवाज बैठना वायरल संक्रमण, एसिड रिफ्लक्स, एलर्जी या वोकल कॉर्ड में सूजन का संकेत हो सकता है। कुछ मामलों में अस्थमा भी इसकी वजह बन सकता है। ऐसी स्थिति में ईएनटी विशेषज्ञ या फेफड़ों के डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। जांच के बाद जरूरत के अनुसार इलाज, वॉयस थेरेपी और दूसरी सावधानियां अपनाई जा सकती हैं।

प्रदूषण खांसी को बना रहा जिद्दी
दिल्ली में पीएम 2.5, धूल, धुआं और वाहनों से निकलने वाली गैसें सांस की नलियों में जलन और सूजन बढ़ा सकती हैं। पहले से एलर्जी, अस्थमा या दूसरी सांस संबंधी बीमारियों से परेशान लोगों पर इसका असर अधिक हो सकता है। डॉक्टरों के अनुसार, सर्दियों में प्रदूषण बढ़ने के साथ यह समस्या और गंभीर हो सकती है। ऐसे में हवा की गुणवत्ता खराब होने पर बाहर निकलने से बचें और खुले में भारी व्यायाम न करें। जरूरत पड़ने पर भीड़भाड़ वाले इलाकों में एन-95 मास्क का इस्तेमाल करें। बुजुर्गों और अस्थमा, सीओपीडी या हृदय रोग से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

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