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... तो हक के लिए संसद पर धावा बोलेंगे किसान

Mon, 13 Jan 2014 11:51 AM IST
अमर उजाला, नई दिल्ली
अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 13 Jan 2014 11:51 AM IST
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farmers will protest at parliament

दिल्ली-एनसीआर के किसानों ने अधिग्रहण के बदले मिले प्लॉट का मालिकाना हक लेने के लिए आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। पूर्वी दिल्ली में हुई महापंचायत में किसान नेताओं ने मांगों को जल्द नहीं माने जाने की सूरत में संसद भवन के घेराव की चेतावनी भी दी।

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महापंचायत के दौरान नोएडा प्राधिकरण को 26 जनवरी तक मालिकाना हक देने पर काम शुरू करने का अल्टीमेटम दिया गया। साथ ही ऐसा नहीं होने पर नोएडा से आंदोलन की शुरुआत करने की बात कही गई।
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किसान नेता रघुराज सिंह ने कहा कि वर्ष 1985 से एनसीआर प्लानिंग बोर्ड के तहत किसानों की भूमि का अधिग्रहण होना चाहिए था लेकिन एनसीआर के एक भी प्राधिकरण ने बोर्ड के अनुसार न तो भूमि का अधिग्रहण किया है और न ही शहर की तर्ज पर उसका विकास किया है।
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उन्होंने कहा कि वर्ष 1989 में वर्ष 2001 का रीजनल प्लान तैयार किया गया। प्लान के अनुसार जिस गांव की भूमि अधिग्रहित हुई है उस गांव का विकास अत्याधुनिक ढंग से किया जाना था। लेकिन प्राधिकरणों ने किसानों और गांवों का वजूद खत्म कर दिया।

विधेयक पास होने के बाद नया कानून बना, लेकिन एनसीआर बोर्ड के कानून को किसी भी प्राधिकरण ने नहीं माना। जिसके तहत लाखों हेक्टेयर भूमि का अनाधिकृत ढंग से अधिग्रहण किया गया है।

दिल्ली के लिए बने इस कानून का अनुपालन कराने की एनसीआर के एमपी, एमएलए व नौकरशाहों से भी जवाबदेही मांगने का पंचायत में निर्णय लिया गया है। महापंचायत का आयोजन दीपक कुमार ने और अध्यक्षता चौ. केशराम ने की।

30 जनवरी से होगा किसान सत्याग्रह

किसानों ने केंद्र सरकार के मौजूदा भूमि अधिग्रहण बिल में बदलाव की मांग की है। ऐसा नहीं होने की सूरत में 30 जनवरी से रामलीला मैदान में किसान सत्याग्रह की शुरुआत होगी। किसान सत्याग्रह से भी बात नहीं बनी तो किसान नेता आमरण अनशन पर बैठ जाएंगे।

जेडीयू (किसान) मोर्चा के अध्यक्ष मनवीर तेवतिया ने बताया कि राहुल गांधी, भट्टा परसोल और टप्पल में किसानों से मिलकर न्याय दिलाने का वादा कर गए थे लेकिन उन्हीं की सरकार ने किसान विरोधी बिल लाकर बता दिया की वह किसानों के साथ नहीं है।


इसी तरह अगर कोई विकास प्राधिकरण जमीन अधिग्रहण कर रहा है तो उसे क्षेत्र में लाई जा रही विकास योजनाओं में किसान को 25 फीसदी का आरक्षण एक ही बार दिया जाए। इस नई नीति को वर्ष 2000 से लागू किया जाए। साथ ही उन्होंने किसानों के ऊपर दर्ज मामले वापस लेने की भी मांग की।

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