'भगवान' ने बचाई जान: तीन और चार साल के भाई-बहन ने निगल लिए 16 चुंबक, पेट में गल गई थी आंत, 48 घंटे चला ऑपरेशन
पीडियाट्रिक सर्जरी के वरिष्ठ चिकित्सक नितिन जैन ने बताया कि आमतौर पर बच्चे एक चुंबक या बटन निगल लेते हैं, लेकिन यह मामला अलग था। बच्चों के पेट में 6 और 10 चुंबक चिपकी हुई थी। बच्चों की सर्जरी करना बेहद चुनौतीपूर्ण था।
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एक ही परिवार के दो छोटे बच्चे चुंबक निगल लिया। हालत गंभीर होने पर उन्हें मथुरा से अमृता अस्पताल लाया गया। जब चिकित्सकों ने इसकी जांच की तब पेट में चुंबक चिपके होने की पुष्टि हुई। इसके बाद 48 घंटे के अंदर सर्जरी कर दोनों बच्चों के पेट से चुंबक निकाले।
मथुरा के रहने वाले तीन साल का हीतम और चार साल की हितांशी ने खिलौनों में लगे छोटे-छोटे चुंबकों को निगल लिया था। इससे उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। पहले परिवार को लगा कि पेट में कीड़े होने के कारण ऐसा हो रहा है। परिवार ने बताया कि बच्चों को पेट दर्द और उल्टी की शिकायत होने लगी, जिसके बाद 12 अगस्त की रात बेटे हीतम और 13 अगस्त की दोपहर बेटी हितांशी को अस्पताल ले जाया गया। जांच के दौरान डॉक्टरों को पता चला कि हीतम ने 10 और हितांशी ने 6 चुंबक निगल लिए थे। चुंबकों के आपस में चिपकने से बच्चों की आंतों में गंभीर जटिलताएं उत्पन्न हो गई थीं।
पीडियाट्रिक सर्जरी के वरिष्ठ चिकित्सक नितिन जैन ने बताया कि आमतौर पर बच्चे एक चुंबक या बटन निगल लेते हैं, लेकिन यह मामला अलग था। बच्चों के पेट में 6 और 10 चुंबक चिपकी हुई थी। बच्चों की सर्जरी करना बेहद चुनौतीपूर्ण था। बच्चों के पेट की आंत भी गल गई थी, उसको भी ठीक किया गया। उन्होंने बताया कि दोनों की स्थिति अब स्थिर है और करीब दो सप्ताह की देखरेख के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
बिजली का स्विच
नुकीली या धारदार वस्तुएं
छोटे खिलौने, सिक्के, बटन जैसी बैटरियां, छोटे चुंबक
पुरानी दवाएं, फिनाइल या सिगरेट
टूटे हुए खिलौने
आईना
कांटेदार पौधे
कूलर या टेबल फैल