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आशियाने का सपना दिखा बिल्डर ने ठगे सात लाख रुपये
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आशियाने का सपना दिखा बिल्डर ने ठगे सात लाख रुपये
फरीदाबाद। सेक्टर-89 ग्रेटर फरीदाबाद में आशियाने का सपना दिखा दंपति से सात लाख रुपये ठगने के मामले में थाना भूपानी पुलिस ने पाल इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपर्स के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है।
सेक्टर-9 निवासी अनिल कुमार मित्तल ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उन्होंने अपने और अपनी पत्नी शैल मित्तल के नाम से पाल इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपर्स के सेक्टर-89 स्थित पाल गार्डन प्रोजेक्ट में जनवरी 2007 में दो फ्लैट बुक किए थे। बुकिंग के समय उन्होंने 3.50 लाख रुपये प्रति फ्लैट के हिसाब से अग्रिम राशि जमा करवाई थी। इस दौरान ग्रुप के निदेशक हरपाल सिंह यादव, मानव चंद्रा और राजेश कुमार ने उन्हें बताया था कि प्रोजेक्ट के लिए जमीन मिल चुकी है और मई 2007 तक जिला नगर एवं योजनाकार विभाग से उन्हें निर्माण के लिए लाइसेंस भी मिल जाएगा। इसके कुछ दिन बाद ही उन्हें कंपनी की ओर से पंजीकरण की बकाया राशि 3.10 लाख रुपये को जमा करवाने के लिए पत्र मिलने लगे।
गुरुग्राम में है कंपनी का कार्यालय
इस पर उन्हें कुछ शक हुआ तो वे गुरुग्राम स्थित कंपनी के कार्यालय गए और वहां से लाइसेंस आदि दस्तावेज दिखाने की मांग की। कई बार चक्कर काटने के बाद भी कंपनी ने उन्हें किसी तरह का कोई दस्तावेज नहीं दिखाया। अनिल मित्तल ने जिला नगर एवं योजनाकार विभाग में अपने स्तर पर जांच की तो पता चला कि पाल इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपर्स को सेक्टर-89 स्थित पाल गार्डन प्रोजेक्ट के लिए कोई लाइसेंस नहीं मिला। इस पर अनिल मित्तल को अपने साथ हुई धोखाधड़ी का पता चला। अनिल मित्तल ने कंपनी से कई बार अपने पैसे वापस मांगे, मगर उन्हें रुपये नहीं लौटाए गए। इस पर उन्होंने इसकी शिकायत पुलिस में की, जिस पर अब धोखाधड़ी का मामला दर्ज हुआ है।
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फरीदाबाद। सेक्टर-89 ग्रेटर फरीदाबाद में आशियाने का सपना दिखा दंपति से सात लाख रुपये ठगने के मामले में थाना भूपानी पुलिस ने पाल इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपर्स के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है।
सेक्टर-9 निवासी अनिल कुमार मित्तल ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उन्होंने अपने और अपनी पत्नी शैल मित्तल के नाम से पाल इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपर्स के सेक्टर-89 स्थित पाल गार्डन प्रोजेक्ट में जनवरी 2007 में दो फ्लैट बुक किए थे। बुकिंग के समय उन्होंने 3.50 लाख रुपये प्रति फ्लैट के हिसाब से अग्रिम राशि जमा करवाई थी। इस दौरान ग्रुप के निदेशक हरपाल सिंह यादव, मानव चंद्रा और राजेश कुमार ने उन्हें बताया था कि प्रोजेक्ट के लिए जमीन मिल चुकी है और मई 2007 तक जिला नगर एवं योजनाकार विभाग से उन्हें निर्माण के लिए लाइसेंस भी मिल जाएगा। इसके कुछ दिन बाद ही उन्हें कंपनी की ओर से पंजीकरण की बकाया राशि 3.10 लाख रुपये को जमा करवाने के लिए पत्र मिलने लगे।
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गुरुग्राम में है कंपनी का कार्यालय
इस पर उन्हें कुछ शक हुआ तो वे गुरुग्राम स्थित कंपनी के कार्यालय गए और वहां से लाइसेंस आदि दस्तावेज दिखाने की मांग की। कई बार चक्कर काटने के बाद भी कंपनी ने उन्हें किसी तरह का कोई दस्तावेज नहीं दिखाया। अनिल मित्तल ने जिला नगर एवं योजनाकार विभाग में अपने स्तर पर जांच की तो पता चला कि पाल इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपर्स को सेक्टर-89 स्थित पाल गार्डन प्रोजेक्ट के लिए कोई लाइसेंस नहीं मिला। इस पर अनिल मित्तल को अपने साथ हुई धोखाधड़ी का पता चला। अनिल मित्तल ने कंपनी से कई बार अपने पैसे वापस मांगे, मगर उन्हें रुपये नहीं लौटाए गए। इस पर उन्होंने इसकी शिकायत पुलिस में की, जिस पर अब धोखाधड़ी का मामला दर्ज हुआ है।
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