{"_id":"5ba139ec867a5523e2569602","slug":"151537292780-faridabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अरावली में निर्माण पर एनजीटी ने प्रदेश सरकार से मांगी रिपोर्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अरावली में निर्माण पर एनजीटी ने प्रदेश सरकार से मांगी रिपोर्ट
Updated Tue, 18 Sep 2018 11:16 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
अरावली में निर्माण पर एनजीटी ने प्रदेश सरकार से मांगी रिपोर्ट
फरीदाबाद। सूरजकुंड स्थित अरावली पहाड़ियों में चल रहे निर्माण के मामले में राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने हरियाणा सरकार से रिपोर्ट तलब की है। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की ओर से इस मामले में हरियाणा शासन को एक साल पहले रिपोर्ट भेज कर इस पर प्रदेश सरकार की टिप्पणी मांगी थी। एनजीटी ने प्रदेश सरकार को 30 सितंबर तक टिप्पणी सहित रिपोर्ट वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को भेजने का आदेश दिया है।
पर्यावरण केयर सोसायटी नामक एनजीओ की ओर से वर्ष 2016 में अरावली में हो रहे निर्माण कार्यों को पर्यावरण का नुकसान करार देते हुए एनजीटी में केस दायर किया गया था। एनजीओ ने सूरजकुंड रोड स्थित एक बड़ी कंपनी के हाउसिंग प्रोजेक्ट को भी पर्यावरण के लिए हानिकारक बताया था। सोसायटी की प्रधान अध्यक्ष सीमा शर्मा के अनुसार, आठवीं सदी में राजा अनंगपाल ने इस जंगल में अनंगपुर जलाशय का निर्माण करवाया था। आरोप है कि 2015 में इस जलाशय के दोनों ओर प्रॉपर्टी डीलर ने जंगल के पेड़ पौधे काटे और अवैध खनन कर पहाड़ को समतल कर डाला। जलाशय के किनारे लगभग साठ फार्म हाउस बना डाले गए। एनजीटी में डाले गए केस में यह भी दावा किया गया था कि अरावली पहाड़ियों पर अभी भी जंगल को उजाड़ने का काम जारी है। पेड़ कटाई और खनन से लगातार सिकुड़ रहे जंगलों के कारण इसमें रहने वाले पशु पक्षियों का प्राकृतिक आवास खत्म होता जा रहा है।
सीमा शर्मा ने बताया कि इससे क्षेत्रीय पर्यावरण को गंभीर खतरा पैदा हो गया है। दिल्ली एनसीआर का फेफड़ा कही जाने वाली अरावली पहाड़ियों और उनकी प्रकृति को बचाने के लिए एनजीटी में संस्था की पैरवी कर रहे एडवोकेट आलोक बचावत ने बताया कि केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की ओर से जानकारी दी गई कि हरियाणा शासन को इस संबंध में एक साल पहले रिपोर्ट भेज कर इस पर प्रदेश सरकार के कमेंट मांगे गए थे, जो आज तक प्राप्त नहीं हुए। इस पर एनजीटी के मुख्य न्यायाधीश आदर्श कुमार गोयल की बेंच ने नाराजगी जाहिर करते हुए मुख्य सचिव हरियाणा सरकार, डीसी, पुलिस कमिश्नर, नगर निगम कमिश्नर, डायरेक्टर जनरल पुरातत्व विभाग, अध्यक्ष ग्राउंड वाटर अथॉरिटी, सचिव खान मंत्रालय को नोटिस जारी कर 30 सितंबर तक रिपोर्ट मांगी है।
फरीदाबाद। सूरजकुंड स्थित अरावली पहाड़ियों में चल रहे निर्माण के मामले में राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने हरियाणा सरकार से रिपोर्ट तलब की है। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की ओर से इस मामले में हरियाणा शासन को एक साल पहले रिपोर्ट भेज कर इस पर प्रदेश सरकार की टिप्पणी मांगी थी। एनजीटी ने प्रदेश सरकार को 30 सितंबर तक टिप्पणी सहित रिपोर्ट वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को भेजने का आदेश दिया है।
पर्यावरण केयर सोसायटी नामक एनजीओ की ओर से वर्ष 2016 में अरावली में हो रहे निर्माण कार्यों को पर्यावरण का नुकसान करार देते हुए एनजीटी में केस दायर किया गया था। एनजीओ ने सूरजकुंड रोड स्थित एक बड़ी कंपनी के हाउसिंग प्रोजेक्ट को भी पर्यावरण के लिए हानिकारक बताया था। सोसायटी की प्रधान अध्यक्ष सीमा शर्मा के अनुसार, आठवीं सदी में राजा अनंगपाल ने इस जंगल में अनंगपुर जलाशय का निर्माण करवाया था। आरोप है कि 2015 में इस जलाशय के दोनों ओर प्रॉपर्टी डीलर ने जंगल के पेड़ पौधे काटे और अवैध खनन कर पहाड़ को समतल कर डाला। जलाशय के किनारे लगभग साठ फार्म हाउस बना डाले गए। एनजीटी में डाले गए केस में यह भी दावा किया गया था कि अरावली पहाड़ियों पर अभी भी जंगल को उजाड़ने का काम जारी है। पेड़ कटाई और खनन से लगातार सिकुड़ रहे जंगलों के कारण इसमें रहने वाले पशु पक्षियों का प्राकृतिक आवास खत्म होता जा रहा है।
विज्ञापन
सीमा शर्मा ने बताया कि इससे क्षेत्रीय पर्यावरण को गंभीर खतरा पैदा हो गया है। दिल्ली एनसीआर का फेफड़ा कही जाने वाली अरावली पहाड़ियों और उनकी प्रकृति को बचाने के लिए एनजीटी में संस्था की पैरवी कर रहे एडवोकेट आलोक बचावत ने बताया कि केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की ओर से जानकारी दी गई कि हरियाणा शासन को इस संबंध में एक साल पहले रिपोर्ट भेज कर इस पर प्रदेश सरकार के कमेंट मांगे गए थे, जो आज तक प्राप्त नहीं हुए। इस पर एनजीटी के मुख्य न्यायाधीश आदर्श कुमार गोयल की बेंच ने नाराजगी जाहिर करते हुए मुख्य सचिव हरियाणा सरकार, डीसी, पुलिस कमिश्नर, नगर निगम कमिश्नर, डायरेक्टर जनरल पुरातत्व विभाग, अध्यक्ष ग्राउंड वाटर अथॉरिटी, सचिव खान मंत्रालय को नोटिस जारी कर 30 सितंबर तक रिपोर्ट मांगी है।
विज्ञापन