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विकास का अर्थ व्यक्ति और चरित्र निर्माण: मनोहरलाल

Sun, 03 Jun 2018 07:39 PM IST
Updated Sun, 03 Jun 2018 07:39 PM IST
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विकास का अर्थ व्यक्ति और चरित्र निर्माण: मनोहरलाल

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विकास का अर्थ व्यक्ति और चरित्र निर्माण: मनोहरलाल

फरीदाबाद। हम सरकार चलाते हैं, जनता की अपेक्षा रहती है कि विकास किया जाए। विकास का मतलब सड़क, अस्पताल, बिजली आदि उपलब्ध कराना मान लिया जाता है। इसी भौतिक निर्माण को इतिश्री मान लिया जाता है। इसके साथ व्यक्ति निर्माण और चरित्र निर्माण हो तभी सच्चा विकास होता है। व्यक्ति और चरित्र का निर्माण संत जनों के इस तरह के कार्यक्रमों के जरिए होता है। यह बात मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने सेक्टर 12 में आयोजित संत मुरारी बापू की राम कथा के कार्यक्रम में कही। वह कार्यक्रम के अंतिम दिन रामकथा सुनने पहुंचे थे।
मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने कहा कि संत जनों के इस तरह के कार्यक्रमों से प्रेम, त्याग, सदाचार की भावना पैदा होती है जो व्यक्ति और चरित्र का निर्माण करती है। उन्होंने ऋषि जामवंत का उदाहरण देते हुए बताया कि अपनी शक्तियां भूल बैठे हनुमान को जामवंत ने मार्गदर्शन कराया था, वर्तमान में संत मुरारी बापू लोगों को उनके व्यक्ति और चरित्र निर्माण की याद दिला रहे हैं, ऐसे संतों का प्रवचन और आशीर्वाद बहुत जरूरी है।
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‘राजा के समान प्रजा का भी युगधर्म होता है’
नौ दिवसीय रामकथा के अंतिम दिन मुरारी बापू ने मुख्यमंत्री की बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि जैसे राजा का युगधर्म होता है वैसे ही प्रजा का भी युग धर्म होता है। प्रजा का युगधर्म है कि परस्पर प्रीति, यानी वर्ग, कौम, भाषा, जाति, प्रांत, वर्ण, पक्ष आदि सब भेदों को समाप्त कर एक दूसरे से प्रेम करे। यदि प्रजा इन भेदों की दीवार से मुक्त हो परस्पर प्रीति करेगी तो रामराज रहेगा। हम मजहब, कौम, भाषा, ऊंच-नीच के कारण कितने विभक्त हो चुके हैं इसे खत्म करना होगा। प्रजा का दूसरा युग धर्म समानता का व्यवहार करना है। जिसके पास है वह उसकी मदद और सेवा करे जिसके पास नहीं है। राजा और प्रजा दोनों का ही युगधर्म राष्ट्रप्रीति है। राजा को ऐसी राजनीति कभी नहीं करनी चाहिए जिसके आगे राष्ट्रप्रीति छोटी पड़ जाए। जनता को भी ऐसी राजनीति से बचना चाहिए जिसके आगे राष्ट्रप्रीति छोटी होने लगे। मुरारी बापू ने गुरु नानक, बाबा फरीद, सीता जी की जीवनियों का उदाहरण देते हुए कहा कि धर्म सत्ता और राजसत्ता दोनों का काम समाज के आखिरी छोर पर बैठे व्यक्ति तक पहुंचना और उसकी सेवा करना है। यदि आखिरी व्यक्ति तक न गया तो धर्म और राज से जनता का विश्वास उठ जाएगा। अंतिम दिन बापू न अयोध्या कांड, अरण्य कांड, किष्कंधा कांड, सुंदर कांड, लंका कांड और उत्तर कांड का वर्णन किया। कार्यक्रम में उद्योग मंत्री विपुल गोयल, बीजेपी जिला अध्यक्ष गोपाल शर्मा, एडीजीपी आलोक मित्तल, अजय गौर सहित अन्य गण्यमान्य भी पहुंचे थे।
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