मोदी के नाम पर सैकड़ों को बनाया शिकार
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दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने प्रधानमंत्री आदर्श योजना के नाम पर नकली वेबसाइट बनाकर देश भर के भोले-भाले लोगों को ठगने वाले गैंग के मास्टर माइंड को गिरफ्तार किया है।
आरोपी की पहचान हावड़ा, पश्चिम बंगाल निवासी सुदिप्ता चटर्जी (43) के रूप में हुई है। आरोपी लोन दिलाने का झांसा देकर लोगों से उनकी रकम ठग लेता था।
गिरोह कई अन्य नकली सरकारी वेबसाइट बनाकर गोरखधंधा चला रहा था। पुलिस की माने तो गैंग ने देश भर में सैकड़ों लोगों से करोड़ों रुपये ठगे हैं।
पुलिस को गैंग के 43 बैंक खातों का पता चला है। पुलिस ने इनके पास से भारी मात्रा ठगी में इस्तेमाल किए जाने वाले दस्तावेज, लोन अर्जी की किट बरामद की है। अपराध शाखा पुलिस गैंग के बाकी आरोपियों की तलाश कर रही है।
पश्चिम बंगाल से दबोचा मास्टर माइंड
अपराध शाखा के संयुक्त आयुक्त रविंद्र यादव ने बताया कि टीम को सूचना मिली कि प्रधानमंत्री आदर्श योजना के नाम पर नकली वेबसाइट बनाकर लोन दिलाने की बात कर ठगी की जा रही है।
पुलिस ने फौरन मामले को गंभीरता से लेते हुए छानबीन शुरू कर दी। जांच में पुलिस को पता चला कि वेबसाइट का सर्वर यूएसए से ऑपरेट किया जा रहा है।
पुलिस ने टेक्निकल जांच के बाद पता किया कि वेबसाइट को हावड़ा, कोलकाता से चलाया जा रहा है। दिल्ली पुलिस की टीम आरोपी को दबोचने के लिए कोलकाता पहुंच गई।
लोगों के भरोसे के लिए कॉल सेंटर का लिया सहारा
लोकल पुलिस की मदद ठाकुरराम कृष्णा लेन हावड़ा से मास्टर माइंड सुदिप्ता चटर्जी को दबोच लिया गया। सुदिप्ता ने बताया कि शरत चटर्जी रोड, हावड़ा स्थित ग्राउंड फ्लोर से पूरा गोरखधंधा किया जा रहा था।
पुलिस ने वहां से 20 मोबाइल फोन, इंटरनेट डोंगल, हार्ड डिस्क, विभिन्न सरकारी दफ्तरों की रबर स्टैंप और एप्लीकेशन किट बरामद की।
शनिवार को सुदिप्ता को कोलकाता के एक कोर्ट में पेश कर दिल्ली पुलिस ट्रांजिट रिमांड पर राजधानी ले आई।
पुलिस की मानें तो आरोपी ने bharat-sarkar.in, govindia.in, CGTMSE-govt.in, goi@developmentofindia.in, project@developmentofindia.in, के नाम से नकली वेबसाइट बनाई हुई थीं। पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि वह इस तरह की वेबसाइट से सावधान रहें।
ऐसे ठगते थे थे लोगों को
सुदिप्ता ने बताया कि उसने वेबसाइट को गूगल से सूचीबद्ध कराया। कोई भी सरकारी वेबसाइट खोलने की कोशिश करता था सबसे ऊपर यही वेबसाइट ही खुलती थी।
गोरखधंधे के लिए 17 सदस्यों का एक कॉल सेंटर भी खोला था। ऑनलाइन लोन की एप्लीकेशन मंगाई जाती थी। फिर कॉल सेंटर कर्मी लोगों से संपर्क करते थे।
कुछ चुने लोगों की जानकारी लेकर सुदिप्ता खुद उनसे बातचीत करता था। जब लोन लेने वाला शर्तों को मान लेता था तो उससेे लोन देने के नाम पर मोटी रकम सिक्योरिटी के नाम पर मांगी जाती थी।
बाकायदा पीड़ितों का खाता खोेलने का दिखावा किया जाता था, लेकिन उसके सारेे कागजात सुदिप्ता खुद ही रखता था। बाद में जैसे ही पीड़ित अपने खोले गए खाते में रकम डालता फौरन सुदिप्ता रुपयोें को निकाल लिया करता था।
कौन है सुदिप्ता चटर्जी
पुलिस की पूछताछ में आरोपी सुदिप्ता चटर्जी ने बताया कि वह मूलरूप से हावड़ा कोलकाता का रहने वाला है। बीकॉम की पढ़ाई बीच में छोड़ने के बाद 2002 से 2009 के बीच रीयल स्टेट का व्यवसाय किया।
इसी बीच उसने ई-व्यवसाय भी शुरू कर दिया। इसके लिए उसने कॉल सेंटर भी खोला। इसके बाद उसने हर्बल मेडिसिन और इसी तरह के अन्य व्यवसाय किए।
सफल न होने पर उसने ई-बिजनेस के अनुभव का फायदा उठाते हुए नकली वेबसाइट बनाकर लोगों को ठगने की योजना बनाई। पुलिस की माने तो उसनेे 2012 से इस धंधे को शुरू किया।
इन लोगों को नहीं फंसाता था
सुदिप्ता ने पुलिस के सामने खुलासा किया है कि लोन की एप्लीकेशन मंगाते समय वह इस बात का पता लगा लिया करता था कि लोन लेने वाले शख्स का संबंध किसी आईएएस, आईपीएस या नेता से तो नहीं है।
अगर कोई इसकी पुष्टि करता था तो वह उसकी लोन की अर्जी स्वीकार नहीं करता था। सुदिप्ता के मुताबिक ऐसे लोगों की अर्जी स्वीकार करने में उसके फंसने की आशंका रहती थी।
दूसरी ओर वह पश्चिम बंगाल के लोगों को भी पकड़े जाने के डर से नहीं ठगता था। सुदिप्ता को लगता था कि दूसरे राज्यों के लोगों को ठगने के बाद वह उसकी शिकायत नहीं कर सकते हैं।
संयुक्त आयुक्त रविंद्र यादव ने बताया कि सुदिप्ता बेहद चालक है। उसे किसी का भी ब्रेनवॉश करने में महारत हासिल है। पुलिस ने जब उसे दबोचा तो वह पुलिसकर्मियों पर अपनी ट्रिक लगाने लगा।
शुरुआत में उसने बताया कि वह तो बेरोजगारों को लोन दिलाकर उनकी सहायता कर रहा था। लेकिन बहुत जल्दी वह पुलिसकर्मियों से कहने लगा कि उसे समय पर पकड़ कर पुलिस ने अच्छा काम किया है।