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लैंड पूलिंग पॉलिसी के तहत फ्लैट बुकिंग में फर्जीवाड़ा
Sun, 13 Oct 2019 05:07 AM IST
Mohit Mudgal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Mohit Mudgal
Updated Sun, 13 Oct 2019 05:07 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
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लैंड पूलिंग पॉलिसी के तहत बनने वाले फ्लैटों के नाम पर फर्जीवाड़े का मामला प्रकाश में आया है। डीडीए ने लैंड पूलिंग पॉलिसी के तहत फिलहाल किसी भी बिल्डर को फ्लैट बनाने की अनुमति नहीं दी है। कुछ बिल्डर डीडीए के नाम का प्रयोग करके गलत तरीके से लोगों से फ्लैटों की बुकिंग करा रहे हैं। डीडीए ने लोगों से अपील की है कि वे लैंड पूलिंग पॉलिसी के नाम पर हो रहे फर्जीवाड़े से सावधान रहें।
आधिकारिक सूत्रों की मानें तो खरीदारों को आकर्षित करने के लिए कुछ बिल्डर डीडीए के नाम का भी प्रयोग कर रहे हैं। इस संबंध में भ्रामक विज्ञापन भी दिए जा रहे हैं। लैंड पूलिंग पॉलिसी को 11 अक्तूबर 2018 को अधिसूचित किया गया था। इसके तहत किसानों और बिल्डरों ने अपनी जमीन के दस्तावेज डीडीए के पास जमा करा दिए हैं। डीडीए अब इन दस्तावेज का सत्यापन कर रहा है।
इसके बाद उन सभी सेक्टर के लिए कंसोर्टियम का गठन होगा, जहां 70 फीसदी से ज्यादा जमीन एकत्र हो चुकी है। इसके बाद कंसोर्टियम या बिल्डर को फ्लैट बनाने के लिए डीडीए की ओर से अनुमति दी जाएगी। इस पॉलिसी के तहत 60 फीसदी जमीन पर बिल्डर फ्लैट का निर्माण करेंगे, जबकि 40 फीसदी जमीन पर डीडीए सड़क, स्कूल, सामुदायिक भवन, साइकिल ट्रैक और पार्क बनाएगा।
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बताया गया है कि अभी किसी भी बिल्डर को लैंड पूलिंग पॉलिसी के तहत फ्लैट बनाने का लाइसेंस नहीं दिया गया है। इसके बावजूद, कुछ कंपनियां, सोसायटी और डेवलपर्स लोगों को आकर्षक स्कीम के झांसे में फंसा रहे हैं। फ्लैट/प्लॉट बुक कराने का झांसा देकर लोगों से पंजीकरण शुल्क लिया जा रहा है।
डीडीए का कहना है कि रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (रेरा) के तहत परियोजना के पूर्व पंजीकरण के बिना किसी भी परियोजना में प्लॉट/फ्लैट की खरीद के लिए विज्ञापन देना या बुकिंग लेना गलत है। डीडीए का कहना है कि इस तरह लोगों के साथ ठगी भी हो सकती है। इसलिए डीडीए ने अपील की है कि किसी भी फ्लैट या प्लॉट को खरीदने से पहले बिल्डर के लाइसेंस की जांच कर लें।
लैंड पूलिंग पॉलिसी के तहत बनेंगे 17 लाख फ्लैट
ज्ञात हुआ है कि लैंड पूलिंग पॉलिसी के तहत कुछ वर्षों में 17 लाख फ्लैट बनने हैं। ये फ्लैट कौन बनाएगा, कहां बनाएगा और कैसे बनाएगा, यह अभी तय नहीं है। जब डीडीए इस पॉलिसी के तहत बिल्डरों को लाइसेंस और जमीन दे देगा, उसके बाद ही फ्लैटों के लिए कराई जाने वाली बुकिंग वैध होगी।
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आधिकारिक सूत्रों की मानें तो खरीदारों को आकर्षित करने के लिए कुछ बिल्डर डीडीए के नाम का भी प्रयोग कर रहे हैं। इस संबंध में भ्रामक विज्ञापन भी दिए जा रहे हैं। लैंड पूलिंग पॉलिसी को 11 अक्तूबर 2018 को अधिसूचित किया गया था। इसके तहत किसानों और बिल्डरों ने अपनी जमीन के दस्तावेज डीडीए के पास जमा करा दिए हैं। डीडीए अब इन दस्तावेज का सत्यापन कर रहा है।
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इसके बाद उन सभी सेक्टर के लिए कंसोर्टियम का गठन होगा, जहां 70 फीसदी से ज्यादा जमीन एकत्र हो चुकी है। इसके बाद कंसोर्टियम या बिल्डर को फ्लैट बनाने के लिए डीडीए की ओर से अनुमति दी जाएगी। इस पॉलिसी के तहत 60 फीसदी जमीन पर बिल्डर फ्लैट का निर्माण करेंगे, जबकि 40 फीसदी जमीन पर डीडीए सड़क, स्कूल, सामुदायिक भवन, साइकिल ट्रैक और पार्क बनाएगा।
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बताया गया है कि अभी किसी भी बिल्डर को लैंड पूलिंग पॉलिसी के तहत फ्लैट बनाने का लाइसेंस नहीं दिया गया है। इसके बावजूद, कुछ कंपनियां, सोसायटी और डेवलपर्स लोगों को आकर्षक स्कीम के झांसे में फंसा रहे हैं। फ्लैट/प्लॉट बुक कराने का झांसा देकर लोगों से पंजीकरण शुल्क लिया जा रहा है।
डीडीए का कहना है कि रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (रेरा) के तहत परियोजना के पूर्व पंजीकरण के बिना किसी भी परियोजना में प्लॉट/फ्लैट की खरीद के लिए विज्ञापन देना या बुकिंग लेना गलत है। डीडीए का कहना है कि इस तरह लोगों के साथ ठगी भी हो सकती है। इसलिए डीडीए ने अपील की है कि किसी भी फ्लैट या प्लॉट को खरीदने से पहले बिल्डर के लाइसेंस की जांच कर लें।
लैंड पूलिंग पॉलिसी के तहत बनेंगे 17 लाख फ्लैट
ज्ञात हुआ है कि लैंड पूलिंग पॉलिसी के तहत कुछ वर्षों में 17 लाख फ्लैट बनने हैं। ये फ्लैट कौन बनाएगा, कहां बनाएगा और कैसे बनाएगा, यह अभी तय नहीं है। जब डीडीए इस पॉलिसी के तहत बिल्डरों को लाइसेंस और जमीन दे देगा, उसके बाद ही फ्लैटों के लिए कराई जाने वाली बुकिंग वैध होगी।