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गुजरात के 5 नंबरों ने किया हेल्पलाइन की नाक में दम

Tue, 30 Sep 2014 03:59 AM IST
Updated Tue, 30 Sep 2014 03:59 AM IST
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fake and blank calls from gujrat in women helpline.

दिल्ली की महिला हेल्पलाइन 181 पर गुजरात से आने वाली ब्लैंक कॉल से वेटिंग क्यू बढ़ गई है। कॉल सेंटर पर ब्लैंक व अप्रासंगिक कॉल से जाम लग रहा है। इससे तीस फीसदी कॉल अटेंड नहीं हो रही हैं।

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टोलफ्री नंबर होने के कारण इस ब्लैंक कॉल का पैसा भी सरकार को खर्च करना पड़ रहा है। दिल्ली पुलिस को साल की शुरुआत में शिकायत भी की गई है, लेकिन अभी तक कॉल बंद नहीं हुई है।
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दिल्ली पुलिस और एमटीएनएल की जांच से कुछ सूचनाएं दिल्ली प्रशासन को मिली हैं। इनके मुताबिक ये पांच के पांच लैंडलाइन नंबर गुजरात (अमरेली) के हैं। सभी अलग-अलग बैंकों के हैं। एक दो नहीं बल्कि अभी तक 29558 कॉल आ चुकी हैं।
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घरेलू हिंसा की शिकायतें अधिक

fake and blank calls from gujrat in women helpline.

महिला हेल्पलाइन की संयोजिका और मानवाधिकार कार्यकर्ता खदीजा फारुकी के मुताबिक हेल्पलाइन नंबर टोल फ्री है। इसमें जो भी कॉल आती हैं, उसके बदले सरकार को भुगतान करना पड़ता है।

मसलन मासिक आने वाले औसतन 2 लाख रुपये के बिल में 50-60 हजार रुपये ब्लैंक व अप्रासंगिक कॉल व इतने ही छूटी हुई कॉल के लिए भरने पड़ते हैं। क्योंकि कॉल रिसीव होकर कंप्यूटर रिसोर्स मैनेजमेंट से पीआरआई पर आती है तो एमटीएनएनएल इनबॉक्स में डाल देता है। इसमें कॉल जारी रहती है।

सबसे अधिक कॉल शाम को 4 बजे से रात 8 बजे तक आती हैं। क्योंकि इस समय कॉल औसत से अधिक आती हैं। इसमें घरेलू हिंसा की शिकायतें अधिक होती हैं। इसमें भी शाम को 6-8 बजे सबसे अधिक 16-17 फीसदी कॉल अटेंड नहीं हो पाती हैं।

क्या है असली है समस्या?

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महिला हेल्पलाइन पर आने वाली ब्लैंक कॉल महत्वपूर्ण होती है। आने वाली कॉल का विश्लेषण किया गया तो यह बात सामने आई है कि उसी नंबर से बाद में कॉल आई है, जिन्होंने पीड़ा बताई है। एक बार तो पूर्वी दिल्ली से एक किशोरी ने कई दिन तक ब्लैंक कॉल किए।

फिर एक दिन उसने रात डेढ़ बजे बताया कि उसके पिता गलत हरकत करते हैं। फिर पुलिस की सहायता से मामला दर्ज करके पिता को गिरफ्तार कराया गया। इसलिए ब्लैंक कॉल को बंद नहीं कराया जा सकता, न ही उस नंबर पर वापस कॉल की जाती है।

हेल्पलाइन संयोजिका व मानवाधिकार कार्यकर्ता खदीजा फारुकी ने बताया कि औसतन दिन में 595 कॉल छूट जाती हैं। इसमें सबसे अधिक भागीदारी शाम 4 बजे से रात 12 बजे की शिफ्ट की 46 फीसदी है।

जबकि रात 12 बजे से सुबह 8 बजे तक की 12 फीसदी और सुबह आठ बजे से शाम 4 बजे तक छूटने वाली कॉल की भागीदारी 42 फीसदी है। यह हालत तब है जब एक शिफ्ट में कॉलर 480 मिनट में 473 मिनट कॉलिंग पर होती हैं।

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