'विफलताएं छुपाने के लिए नए-नए संकट पैदा कर रहे मुख्यमंत्री'
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मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल चुनावी वादे पूरे करने में नाकाम हो चुके हैं। वे अपनी विफलताएं छुपाने के लिए नए-नए संकट पैदा कर रहे हैं। इसी कड़ी में वे असंवैधानिक तरीके से बनाए गए 21 संसदीय सचिवों की नियुक्ति और बिजली-पानी के संकट से जनता का ध्यान हटाने में लगे हुए हैं।
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी की मुख्य प्रवक्ता शर्मिष्ठा मुखर्जी ने सोमवार को प्रदेश कार्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में मुख्यमंत्री पर आरोपों की झड़ी लगा दी।
उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री अपनी नाकामियां छुपाने के लिए प्रधानमंत्री, उपराज्यपाल, प्रशासनिक अधिकारियों और कांग्रेस पार्टी को कोसने लगते हैं।
आए दिन एक नया संकट पैदा करके जनता का ध्यान विकास के मुद्दे से हटाने का प्रयास कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने बिजली बिल आधा करने और मुफ्त पानी देने की बात कही थी, लेकिन आज दिल्ली में बिजली-पानी का संकट बना हुआ है।
'छवि सुधारने के लिए खर्च कर रहे 200 करोड़'
शर्मिष्ठा ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने निरंतर खराब हो रही छवि सुधारने के लिए ‘परफेक्ट रिलेशन’ नाम की एक प्राइवेट कंपनी को जनता की कमाई के 200 करोड़ रुपये देकर अनुबंधित किया।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जनलोकपाल बिल को लेकर गंभीर नहीं हैं। इसी कारण उन्होंने बिल विधानसभा में रखने से पहले उपराज्यपाल की मंजूरी नहीं ली, जबकि उपराज्यपाल से मंजूरी लेना जरूरी है।
इस मौके पर कांग्रेस नेता अमन पंवार ने कहा कि मुख्यमंत्री पूर्ण राज्य के मामले में जनमत संग्रह की बात कर रहे हैं। मगर भारतीय संविधान इसकी अनुमति नहीं देता।
उन्होंने केशवानंद भारती के मुकदमे का हवाला देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के 13 न्यायाधीशों की खंडपीठ ने भारत में जनमत संग्रह को सिरे से नकार दिया था।