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Delhi NCR News: खोए हुए लम्हों से जिल्लावतन तक, बेगम मस्रूर जहां की कहानियां से अफसाना हुई शाम
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अफसाना हुई शाम ने बेगम मसरूर जहां की कहानियों से स्त्री-विमर्श को मंच पर जीवंत किया
ज्योति सिंह
नई दिल्ली। इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के सीडी देशमुख सभागार में आयोजित नाट्य-पाठ अफसाना हुई शाम ने साहित्य और रंगमंच के संगम से दर्शकों को गहरे सामाजिक प्रश्नों से रूबरू कराया। विंग्स कल्चरल सोसायटी की प्रस्तुति में उर्दू की चर्चित लेखिका बेगम मसरूर जहां की पांच कहानियों का नाटकीय वाचन किया गया।
तारिक हमीद, साइरा मुजतबा और सुनीता सिंह ने अपनी प्रभावशाली आवाज और अभिनय से कहानियों को मंच पर जीवंत किया। दो हाथ ने रिश्तों की संवेदनाओं को छुआ तो खोए हुए लम्हे ने विवाहोपरांत स्त्री की पहचान व आत्मसम्मान के संघर्ष को मार्मिक ढंग से सामने रखा। गुड़िया स्त्री जीवन की सामाजिक विडंबनाओं पर सवाल उठाती है, कुंजी लैंगिक पहचान व इच्छाओं को संवेदनशीलता से छूती है, तो जिल्लावतन प्रवासी जीवन के अकेलेपन व विस्थापन की पीड़ा को आवाज देती है।
कहानियों को बिना किसी नाटकीय अतिशयोक्ति के साहित्यिक गरिमा व भावनात्मक गहराई के साथ प्रस्तुत किया गया। कलाकारों की संवाद-अभिव्यक्ति ने हर पात्र की मन स्थिति को प्रभावशाली ढंग से उकेरा। तारिक हमीद ने कहा कि अच्छी कहानियां हर दौर में नए अर्थ व सवाल लेकर आती हैं।
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ज्योति सिंह
नई दिल्ली। इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के सीडी देशमुख सभागार में आयोजित नाट्य-पाठ अफसाना हुई शाम ने साहित्य और रंगमंच के संगम से दर्शकों को गहरे सामाजिक प्रश्नों से रूबरू कराया। विंग्स कल्चरल सोसायटी की प्रस्तुति में उर्दू की चर्चित लेखिका बेगम मसरूर जहां की पांच कहानियों का नाटकीय वाचन किया गया।
तारिक हमीद, साइरा मुजतबा और सुनीता सिंह ने अपनी प्रभावशाली आवाज और अभिनय से कहानियों को मंच पर जीवंत किया। दो हाथ ने रिश्तों की संवेदनाओं को छुआ तो खोए हुए लम्हे ने विवाहोपरांत स्त्री की पहचान व आत्मसम्मान के संघर्ष को मार्मिक ढंग से सामने रखा। गुड़िया स्त्री जीवन की सामाजिक विडंबनाओं पर सवाल उठाती है, कुंजी लैंगिक पहचान व इच्छाओं को संवेदनशीलता से छूती है, तो जिल्लावतन प्रवासी जीवन के अकेलेपन व विस्थापन की पीड़ा को आवाज देती है।
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कहानियों को बिना किसी नाटकीय अतिशयोक्ति के साहित्यिक गरिमा व भावनात्मक गहराई के साथ प्रस्तुत किया गया। कलाकारों की संवाद-अभिव्यक्ति ने हर पात्र की मन स्थिति को प्रभावशाली ढंग से उकेरा। तारिक हमीद ने कहा कि अच्छी कहानियां हर दौर में नए अर्थ व सवाल लेकर आती हैं।
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