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देह दान के लिए प्रेरित करते हैं ‘दधिचि’
रश्मि ओझा/अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Tue, 23 Jun 2015 01:10 AM IST
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सांस भले ही रुक जाए मगर मृत्यु के बाद भी आपकी आंखें दुनिया देखती रहेंगी। आपका दिल दूसरों की धड़कन बन सकता है। देहावसान के बाद उनकी हड्डी किसी के काम आए यही चाहत रखते हैं कलियुग के ‘दधिचि’।
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सिद्धपीठ डासना देवी मंदिर के महंत नरसिंहानंद सरस्वती ने अपना देहदान किया है। उन्होंने न केवल खुद देहदान किया है कि बल्कि हापुड़, मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा और दिल्ली के करीब 100 लोगों से भी देहदान करने की शपथ दिला चुके हैं।
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छह महीने पहले शुरू किए गए इस अभियान के तहत अब तक 100 लोगों ने एम्स के ऑर्गो विभाग में रजिस्ट्रेशन कराया है। उनके संपर्क में आने वाले कई सहयोगियों ने भी देहदान किया है।
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इनमें से एडवोकेट चेतना शर्मा ने देहदान किया और राजीव शर्मा ने मृत्यु के बाद अपनी आंखें दान करने का संकल्प लिया है।
शास्त्रीनगर निवासी आरके गर्ग ने न सिर्फ अपना अंग दान दिया है बल्कि अपने क्षेत्र से और 15 लोगों से देहदान के लिए फार्म भरवाएं हैं।
यति नरसिंहानंद सरस्वती ने बताया कि देश में हजारों लोग किसी अंग के खराब होने से और रक्त के अभाव में दम तोड़ देते हैं। सनातन धर्म में भी ऋषियों द्वारा अंग दान के कई उदाहरण हमें मिल जाएंगे।
इसलिए अंगदान का संकल्प लिया था। इस अभियान के तहत पहली बार 12 जुलाई को आईएमए भवन में एक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा जिसमें दधिचि फाउंडेशन बनाकर कानूनी प्रक्रिया के साथ देहदान और अंगदान के फार्म भरे जाएंगे।