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Ek Vote Ek Rozgar: घनघोर बारिश में हुई जन संसद, जंतर-मंतर पर 'एक वोट-एक रोजगार' की मांग को लेकर उठी आवाज

Sun, 09 Jul 2023 08:15 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला ब्यूरो, दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, दिल्ली Published by: Digvijay Singh Updated Sun, 09 Jul 2023 08:15 PM IST
सार

एक वोट एक रोजगार आंदोलन समिति के प्रदर्शनकारियों ने कहा कि हर क्षेत्र में सरकारी नौकरियों की कमी की जा रही है। तकनीकी विकास के नाम पर प्राइवेट क्षेत्र में भी नौकरियों के अवसरों में कमी आ रही है जिससे युवाओं को नौकरी नहीं मिल रही है। 

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Ek Vote Ek Rozgar People's Parliament held in heavy rain
घनघोर बारिश में हुई जन संसद - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव और अगले वर्ष होने जा रहे लोकसभा चुनाव के पहले बेरोजगारी के सवाल पर तमाम बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने तेज बारिश में भी अपनी आवाज उठाई। दिल्ली के जंतर मंतर पर जन संसद का आयोजन किया और बारिश में भीगते हुए हरेक वोट के बदले रोज़गार की मांग की। एक वोट एक रोजगार आंदोलन समिति के संयोजक प्रोफेसर आनंद कुमार की अगुवाई में प्रदर्शनकारियों ने बड़ी संख्या में इस जन संसद में हिस्सा लिया और तेज बरसात में भी अपनी बात रखी।

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एक वोट एक रोजगार आंदोलन समिति के प्रदर्शनकारियों ने कहा कि हर क्षेत्र में सरकारी नौकरियों की कमी की जा रही है। तकनीकी विकास के नाम पर प्राइवेट क्षेत्र में भी नौकरियों के अवसरों में कमी आ रही है जिससे युवाओं को नौकरी नहीं मिल रही है। बेरोजगारी लगातार बढ़ती जा रही है जिसके परिणाम स्वरूप नौजवान अवसाद, नशा, अपराध की तरफ़ बढ़ रहे हैं। हजारों की तादाद में पढ़े लिखे नौजवान रोजगार नहीं मिलने पर आत्महत्या करने के लिए मजबूर हैं। सरकारी क्षेत्र में जो नौकरियां हैं उन पर बड़ी संख्या में संविदा पर भर्ती की जा रही है, इन पदों पर कार्य करने वाले संविदा कर्मियों को कई साल की नौकरी के बाद अचानक हटा दिया जाता है, कई बार बेरोजगारी की दशा में विस्थापित हुआ यह कर्मी आत्महत्या तक कर लेता है, इसलिए संविदा पर नियुक्तियां बंद हो और जो लोग वहां कार्य कर रहे हैं, उन्हें वहीं स्थायी किया जाए और देश में जितने भी सरकारी पद हैं उन पर तत्काल स्थायी नियुक्ति की जाए।
 

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प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि काम मिल भी रहा है तो सरकार की तरफ से तय न्यूनतम मजदूरी कहीं कहीं किसी दफ्तर या फैक्ट्री में नहीं मिल रही। आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस (AI) ने अब उच्चतम शिक्षा प्राप्त नौजवानों के भविष्य को भी अंधेरे में डाल दिया है। हमारे बुजुर्गों ने राष्ट्र और समाज का निर्माण अकुशल और कुशल श्रमिकों के रूप में किया आज उन्हें पेंशन नहीं मिल रही और जो पेंशन है भी तो भीख की तरह जिसमें उनका बुढ़ापा दयनीय स्थिति में है, यह भारतीय संस्कृति पर एक भद्दा मजाक है। 

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इस जन संसद में दिल्ली और देश के अलग अलग क्षेत्रों के युवा, आम जनता, बुद्धिजीवी, समाजसेवी और अलग अलग दलों के संवेदनशील राजनेता शामिल हुए। इनमें मुख्य वक्ता के रूप में जाने माने अर्थशास्त्री प्रोफेसर अरुण कुमार, प्रख्यात समाजशास्त्री प्रोफेसर आनंद कुमार, संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य डाक्टर सुनीलम, पूर्व सांसद संदीप दीक्षित, जमाता-ए-उलेमा हिंद के सद्भावना मंच के राष्ट्रीय संयोजक मौलाना जावेद कासमी समेत तमाम लोग शामिल हुए एवं अपनी बात रखी।


 

समिति ने रोजगार कानून बनाने के अलावा, न्यूनतम मजदूरी की गारंटी एवं समान काम का समान वेतन देने, सभी खाली पदों को तुरंत भरने, संविदा प्रणाली खत्म करने, संविदा कर्मचारियों को स्थाई करने, सभी गांव एवं मोहल्ला में एक रोजगार कार्यालय खोलने और सभी बुजुर्गों को न्यूनतम मजदूरी का आधा पेंशन देने की मांग की है।

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